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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   UP Nikay Chunav 2023 It is difficult for BJP to stop familyism, many veterans and ministers want to carry forw

UP Nikay Chunav 2023: परिवारवाद को रोकना भाजपा के लिए मुश्किल , कई दिग्गज व मंत्री आगे बढ़ाना चाहते हैं विरासत

Wed, 12 Apr 2023 09:34 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 12 Apr 2023 09:34 AM IST
सार

भारतीय जनता पार्टी के लिए परिवारवाद को रोकना मुश्किल होगा। कई दिग्गज नेता और मंत्री पत्नी बच्चों के जरिए राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाना चाहते हैं। 

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UP Nikay Chunav 2023 It is difficult for BJP to stop familyism, many veterans and ministers want to carry forw
प्रतिकात्मक तस्वीर - फोटो : social media

विस्तार

सरकार और संगठन ने निकाय चुनाव में परिवारवाद को रोकने के लिए मंत्री, सांसद और विधायकों के रिश्तेदारों को टिकट नहीं देने का निर्णय कर लिया है। लेकिन निकाय चुनाव में जीत के मूल मंत्र के साथ मैदान में उतरी भाजपा के लिए परिवारवाद को रोकना आसान नहीं होगा।
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प्रदेश सरकार के मंत्री से लेकर कई सांसद और नेता अपने निकाय चुनाव में पत्नी बच्चों के जरिए राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाना चाहते हैं। प्रयागराज नगर निगम में महापौर का पद अनारक्षित है। औद्योगिक विकास मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी की पत्नी अभिलाषा नंदी वहां से दूसरी बार महापौर है।
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बताया जा रहा है कि नंदी अपनी पत्नी अभिलाषा को तीसरी बार महापौर बनवाने के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं। नंदी ने लखनऊ से दिल्ली तक टिकट के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है। राजधानी लखनऊ में महापौर का पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है। लखनऊ उत्तर से विधायक नीरज बोरा अपनी पत्नी बिंदु बोरा के लिए महापौर पद का टिकट मांग रहे हैं।
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निवर्तमान महापौर संयुक्ता भाटिया अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए पुत्रवधृू रेशु भाटिया के लिए टिकट की मांग कर रही हैं। महापौर की दौड़ में पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की पत्नी का नाम भी चर्चा में हैं।

पंचायत चुनाव में लेना पड़ा था यू टर्न

पंचायत चुनाव 2021 में भाजपा ने जिला पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्य के चुनाव में किसी मंत्री, सांसद या विधायक के परिवारजन को टिकट न देने का निर्णय सख्ती से लागू किया था। लेकिन, कुछ जगह नेताओं के परिजन ने बगावत कर पर्चा दाखिल कर दिया। उसके बाद क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में पार्टी को निर्णय बदलना पड़ा। उसके बाद तत्कालीन कई मंत्रियों, विधायक और सांसदों के परिवारजन ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए।
 
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