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अस्पतालों में तोड़फोड़ की तो जाना पड़ सकता है जेल

Tue, 12 Feb 2013 01:21 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो
लखनऊ/ब्यूरो Updated Tue, 12 Feb 2013 01:21 PM IST
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up govt will present new clinical protection act

अब अगर अस्पतालों में किसी ने तोड़-फोड़ की तो उसे जेल की हवा खानी पड़ सकती है। सरकार नया क्लीनिकल प्रोटेक्टशन एक्ट बना रही है, जिसके तहत अस्पतालों और नर्सिंग होम को सुरक्षा दी जाएगी। यह कानून नर्सिंग होम पर शिकंजा कसने के लिए क्लीनिकल इस्टेबलिसमेंट एक्ट से पूरी तरह अलग होगा। इसमें अस्पतालों के हितों का ख्याल रखा जाएगा।

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यह कानून अभी महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और उड़ीसा में लागू है। इन्हीं की तर्ज पर प्रदेश सरकार ने अपना कानून तैयार किया है। हालांकि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और नर्सिंग होम एसोसिएशन ने भी इन कानूनों का अध्ययन कर एक ड्राफ्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपा है। उसके कुछ हिस्से भी इस मसौदे में शामिल किए जा सकते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के इस प्रस्ताव में सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों को कानून के दायरे में लेने की तैयारी की जा रही है। इसमें अगर किसी मरीज के तीमारदार ने इलाज में दिक्कत होने पर अस्पताल में तोड़-फोड़ की तो उसे तीन साल तक की सजा दी जा सकती है। इसके अलावा उपकरण, फर्नीचर या शीशा तोड़ने का हर्जाना उससे नकद वसूल किया जाएगा।
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इसमें वित्त और न्याय विभाग से यह राय ली जा रही है कि इस हर्जाने की वसूली राजस्व की तरह की जाए या नहीं। राजस्व की वसूली हर जिले में जिलाधिकारी कार्यालय से आरसी काटकर की जाती है। सम्पत्ति का हर्जाना न देने पर कुर्की तक का प्रावधान होता है।

इस्टेबलिस्टमेंट कानून से अलग होगा एक्ट
इससे पूर्व पिछली प्रदेश सरकार ने जनवरी, 2011 में केन्द्र सरकार के निजी क्लीनिकों और प्राइवेट अस्पतालों पर निगरानी के लिए बने क्लीनिकल इस्टेबलिशमेंट एक्ट को कैबिनेट से पास कराया था। यूपी में यह पूरा एक्ट केन्द्र सरकार के द क्लीनिकल इस्टेबलिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एण्ड रेगुलेशन बिल-2010) के आधार पर बनाया गया है।

यूपी में पास इस एक्ट में मुख्य रूप से दो बिन्दुओं पर कड़ाई की गई है। एक बिन्दु पर मरीजों के हित में सारी जिम्मेदारी नर्सिंग होम, निजी क्लीनिक या पैथालाजी की निर्धारित की गई है। दूसरे बिन्दु पर अस्पताल, क्लीनिक चलाने के मानक तैयार किए गए हैं। इस पूरे एक्ट को न्यायपालिका से अलग रखा गया है यानी इसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश या अधिवक्ता नहीं रखे गए हैं।


हालांकि नियमावली न बन पाने से अभी तक इसे लागू नहीं किया जा सका है। सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार ने अब नियमावली भेज दी है। क्लीनिकल प्रोटेक्शन एक्ट के साथ ही यह कानून भी लागू हो जाएगा।

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