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जिस मामले में किरकिरी, उसे हाईकोर्ट में उठाएगी सरकार
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Sat, 11 May 2013 02:02 AM IST
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कचहरी सीरियल ब्लास्ट के आरोपियों से केस वापस लिए जाने की प्रदेश सरकार की मंशा को शुक्रवार को जोरदार झटका लगा है।
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अदालत के आदेश के बाद अखिलेश सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस मसले को ऊपरी अदालत में ले जाएगी।
संसदीय कार्यमंत्री आजम खां ने कहा कि बेगुनाहों को इंसाफ देने की प्रक्रिया रुकनी नहीं चाहिए। इंसाफ नहीं मिलता है तो आतंकवाद आता है।
बड़ी अदालत में अपील : आजम
नगर विकास मंत्री आजम खां ने बताया कि अदालत के अपने अधिकार हैं और सरकार के अपने। यह सरकार और न्यायपालिका के बीच टकराव नहीं है। सरकार ने हमेशा अदालतों के आदेशों का पूरा सम्मान किया है।
सरकार को कोई बेगुनाह लगता है तो पुलिस जांच कराने के बाद मुकदमा वापस लेती है। कानून से सरकार का टकराव नहीं होना चाहिए। बेगुनाहों को न्याय देने की प्रक्रिया नहीं रुकनी चाहिए।
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न्याय नहीं मिलता है तो आतंकवाद आता है। देश ने 6 दिसंबर 1992 के बाद मानव बम और आरडीएक्स के बारे में जाना। यह सरकार को झटका नहीं है। यह आखिरी अदालत नहीं है। हम इससे ऊपर की अदालत में जाएंगे।
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तीन मई को दिया था कोर्ट को आवेदन
प्रदेश सरकार ने कचहरी सीरियल ब्लास्ट के आरोपियों के मुकदमे वापसी के लिए प्रमुख सचिव न्याय की ओर से जिलाधिकारी को पत्र भेजा था।
इसी के आधार पर 3 मई को मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत में विशेष लोक अभियोजक अपर जिला शासकीय अधिवक्ता विनोद कुमार द्विवेदी ने मुकदमा वापसी के लिए प्रार्थना पत्र दिया था।
इसमें कहा गया था कि क्षेत्र की सुरक्षा, व्यापक जनमानस व सांप्रदायिक सौहार्द्र के दृष्टिगत आरोपियों पर से मुकदमा वापस लिया जाना न्यायोचित होगा।
यह था मामला
लखनऊ, फैजाबाद और वाराणसी कचहरी में हुए सीरियल बम विस्फोट के आरोप में एटीएस व एसटीएफ ने 22 दिसंबर 2007 की सुबह खालिद मुजाहिद व तारिक कासमी को बाराबंकी रेलवे स्टेशन के नजदीक विश्वनाथ होटल के पास से गिरफ्तार किया था।
एटीएस ने दोनों के कब्जे से जिलेटिन की नौ रॉड, तीन स्टील बजर और डेटोनेटर बरामद किए थे। बाराबंकी कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था।
सीओ चिरंजीवीनाथ सिन्हा और राजेश कुमार श्रीवास्तव ने तीन माह में ही न्यायालय में आरोप पत्र पेश कर दिया था।
तफ्तीश में तारिक कासमी को यूपी का हूजी चीफ और खालिद मुजाहिद को यूपी के फौजी दस्ते का कमांडर बताया गया।
इन पर मुकदमे की वापसी के लिए अक्तूबर 2012 में शासन ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी। इसी के तहत मुकदमा वापसी की कार्रवाई अदालती अंजाम तक पहुंची।