UP Election 2022: बांदा की महिलाओं के क्या हैं चुनावी मुद्दे, इस मुस्लिम महिला ने पीएम मोदी से कर दी ये मांग
चाय पर चर्चा और युवाओं से बातचीत के बाद 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' देश की आधी आबादी के बीच बांदा पहुंचा। यहां महिलाओं ने खुलकर चुनावी मुद्दों पर चर्चा की।
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उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' देश की आधी आबादी के बीच बांदा पहुंचा। इस दौरान यहां कि महिलाओं ने विकास, महंगाई, शिक्षा, और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर खुलकर बात की। इस दौरान कुछ महिलाओं ने वर्तमान सरकार के कामकाज की तारीफ की तो कुछ ने कमियां गिनाई। पढ़िए किसने क्या कहा?
कार्यक्रम की शुरुआत में आशा सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में यहां बहुत विकास हुआ है। जब से बंदा हमारी कमिश्नरी बन गई है तब से शिक्षा के क्षेत्र में, स्वास्थ्य के क्षेत्र में विकास हुआ है। राजनीति में भी महिलाएं काफी सक्रिय हो गई हैं। अभी पंचायत चुनाव में जो सदस्य चुनी गई हैं, जो प्रधान हैं, वो सब महिला हैं। उन्होंने आगे कहा कि बांदा में सड़कें बनी हैं। हां, यहां के लोगों में समाजिक सोच बदलने की दरकार है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि योगी राज में महिलाएं सुरक्षित हैं।
डॉ शशि मिश्रा ने कहा कि बांदा बाबा बामदेव की नगरी है। सबसे पहली बात यह है कि यहां पर महिलाओं का नजरिया क्या है? यहां महिलाएं बड़ी कर्मशील हैं, जिस किसी भी क्षेत्र में हो वो पीछे नहीं रहतीं, आगे बढ़ती हैं चाहे राजनीति के क्षेत्र में हो या शिक्षा के क्षेत्र में। प्रदेश की सरकार ने जो मिशन शक्ति अभियान चलाया है उसका बड़ा रही सकारात्मक प्रभाव पड़ा है लेकिन इसमें अभी और अधिक जागरूकता की आवश्यकता है। समाज को अपनी सोच को और बदलने की दरकार है। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए मिशन शक्ति योजना को और बड़े पैमाने पर चलाए जाने की आवश्यकता है। शिक्षा के क्षेत्र में पढ़ाई गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए। सरकार अच्छा काम कर रही है।
बफाता नाम की मुस्लिम महिला ने कहा कि बांदा में विकास हुआ है। फ्री राशन मिला है, सड़कें बनीं हैं, बिजली भी है। मोदी और योगी जी ने विकास तो अच्छा किया है लेकिन महंगाई है। मदिना खातुन ने पढ़ाई का मसला उठाया। उन्होंने कहा कि दो साल से पढ़ाई बंद है। मोदी सरकार बच्चों के भविष्य के बारे में नहीं सोच रही है। सरकार और कुछ सोचे न सोचे बच्चों के भविष्य के बारे में जरूर सोचे।
डॉ शशि ने कहा कि बांदा में अभी शिक्षा उतनी नहीं है जितनी होनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों में अभी भी जागरूकता की कमी है। इसके लिए उसके माता पिता को भी जागरूक होना बहुत जरूरी है ताकि लड़कियों को शिक्षित कर सके। शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम है, जिससे हम अन्य क्षेत्रों में विकास कर सकते हैं। चाहे स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो, चाहे सामाजिक क्षेत्र में हो, चाहे नारी शक्ति का उत्थान हो। मोदी सरकार ने कोरोना से निपटने के लिए स्कूल कॉलेज बंद किए थे और उस समय यह जरूरी भी था। अब सब खुल चुके हैं और ऑनलाइन व ऑफलाइन पढ़ाई भी चल रही हैं। उन्होंने कहा कि पढ़ाई में गुणवत्ता जरूरी है, केवल किताबी ज्ञान से काम नहीं चलेगा। रानी ने कहा कि माता पिता को जागरूक करने की जरुरत है।
अर्चना मेहरा ने कहा कि बांदा काफी बदल गया है। मार्केट खूब बन गया है। पहले एकदम सन्नाटा रहता था अब तो जाम की समस्या रहती है। दीपिका विश्वकर्मा ने पेपर लीक का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पांच साल से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही हूं लेकिन क्या करें कभी पेपर ही लीक हो जाती है तो कभी फॉर्म ही नहीं निकलता है। अखिलेश की अपेक्षा ये सरकार अच्छी है। वहीं, लैपटॉप देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि शुरुआत में ही अखिलेश ने लैपटॉप दिया बाद में कहां दिया?
प्रतिक्षा मेहरा ने कहा कि बांदा में महिलाओं को शिक्षित करना चाहिए।.उनके लिए बाहर निकलने के लिए रास्ते बनाने चाहिए। यहां महिलाओं के लिए टीचिंग के अलावा कुछ नहीं है। शबाना ने कहा कि यहां महिलाओं की स्थिति खराब है। महिलाओं के पास रोजगार नहीं है। मेरा कहना है कि जो जिस लायक उसे उस लायक काम मिलना चाहिए। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। पढ़ लिख कर लड़कियां घर में बैठी हैं। सरकार को रोजगार की तरफ ध्यान देना देगा है। हम तो वर्तमान सरकार के कामकाज से खुश नहीं हैं।
आशा सिंह ने कहा बुंदेलखंड की औरतें बहुत मजबूत होती हैं। यहां सबसे ज्यादा तो आदमी खाली रहते हैं। औरतें घर में घूमकर घूमकर काम करती हैं और उके आदमी सिर्फ खाते हैं और पीते (दारू) हैं। इस पर मदिना ने कहा ठीक कह रही हैं, फ्री का खाते हैं और महिलाओं को पीटते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मोदी जी तो सबकुछ करते हैं लेकिन दारू, गांजा और जुआ बंद नहीं करते।