फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Unnao News ›   within years road destroyed

दो साल में बह गया विकास

Thu, 13 Oct 2016 12:23 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव Updated Thu, 13 Oct 2016 12:23 AM IST
विज्ञापन
within years road destroyed
destroyed road - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

विकासखंड की ग्राम पंचायत चांदपुर झलिहई का राजस्व ग्राम ओहरापुर कौड़िया का चयन वर्ष 2014-15 में डा. राममनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना में हुआ था। चूंकि यह प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना थी इसलिए बसपा शासनकाल के अंबेडकर गांव की तर्ज पर लोहिया गांव का भी विकास किया जाना था। शासन ने भी गांव में विकास के लिए लाखों रुपये जारी किए। ब्लाक से लेकर ग्रामस्तरीय अधिकारियों ने गांव में विकास की गंगा बहाने के लिए पानी की तरह से पैसे बहाए। सीसी रोड व नालियों के निर्माण में खूब पैसा खर्च हुआ, लेकिन यह विकास दो साल में ही पानी की तरह ‘बह’ गया। मौजूदा समय में नालियां पूरी तरह से टूट चुकी हैं। गंदा पानी टूटी नालियों के ऊपर से बह रहा है। गांव को जाने वाला मार्ग भी खस्ताहाल होकर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।  गड्ढों में पानी भरा है। जिससे ग्रामीणों को आवागमन में खासी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। कमीशनबाजी के चक्कर में शौचालय भी प्रयोग करने लायक नहीं बचे हैं। काफी संख्या में लोग शौचालय का प्रयोग नहीं करते हैं। गांव के कोई भी मार्ग को मुख्य सड़क से आज तक नहीं जोड़ा जा सका है। ऐसे में लोहिया गांव में चयनित होने के बाद भी ओहरापुर कौड़िया गांव अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाने को मजबूर है।

विज्ञापन

नोडल अफसर ने लगाई थी चौपाल
इसी साल गांव में जिले के नोडल अफसर व मुख्य विकास अधिकारी ने चौपाल लगाई थी। उस समय ग्रामीणों ने खस्ताहाल मार्गों व ध्वस्त नालियों की शिकायत की थी। लेकिन आज तक नालियां सही नहीं कराई जा सकीं और ना ही रोड की मरम्मत हुई। दोअक्तूबर को कहने को तो गांव में सफाई अभियान चलाया गया लेकिन सिर्फ खानापूरी की गई। बच्चों के प्राथमिक विद्यालय में बाउंड्री तक नहीं बन पाई है।
विज्ञापन


गांव की कहानी, ग्रामीणों की जुबानी
 गांव की महिला सोहधरा पत्नी गजराज ने बताया कि जब उन्हें पता चला था कि ओहरापुर कौड़िया का लोहिया गांव में चयन हुआ था तो गांव में विकास की उम्मीद बंधी थी। सपना देखा था कि शहर की तरह गांव में भी चमाचम सड़कें होंगी। नालियां पक्की होंगी लेकिन यह सपना, ‘सपना’ ही रह गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


सारा खेल कमीशनबाजी का रहा। मार्ग व नालियों के निर्माण में मानकों की धज्जियां उड़ाईं गई। परिणामस्वरुप दो साल में ही मार्ग ध्वस्त हो गए। नालियां टूट गईं और पानी ऊपर से बहकर गांव में हुए विकास की पोल खोल रहा है। यह कहना है गांव के दिलीप राजपूत का।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed