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कमीशनबाजी में सड़कें दो साल में फेल
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
Updated Wed, 27 Apr 2016 12:35 AM IST
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खस्ताहाल सड़क
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सड़क निर्माण में कमीशन के खेल का खामियाजा देखना है तो विकासखंड की दो सड़कों की मौजूदा स्थिति को देख लीजिए। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से इन दो मार्गों का निर्माण दो साल पहले कराया गया था। करोड़ों की लागत से बनी इन सड़कों में जमकर कमीशन का खेल खेला गया। परिणाम यह रहा कि दो साल में ही यह सड़कें ध्वस्त हो गईं। जहां एक ओर प्रदेश सरकार सड़कों को गड्ढामुक्त करने के दावे कर रही है वहीं उनके दावों की पोल यहां की सड़कें खोल रही हैं। कमीशनबाजी ने विकास की धुरी कही जाने वाली सड़कों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। इन सड़कों में इतने ज्यादा गड्ढे हो गए हैं कि लोगों को पता ही नहीं चलता है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क है। इसका खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ रहा है। उन्हें हिचकोले खाते सफर करना पड़ता है। सड़क से गुजरने के दौरान अक्सर वाहनों के पंचर हो जाने से चालकोें को कई किलोमीटर दूर तक गाड़ियों को पैदल ही खींचना पड़ता है।
सड़क नंबर-1
मौरावां-बिहार मार्ग
लंबाई -18 किमी. लागत 7 करोड़ रुपये
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत वर्ष 2013-14 में इस सड़क का निर्माण कराया गया था। यह पुरवा और भगवंतनगर विधानसभा सहित फतेहपुर जनपद को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। इस मार्ग से दोनों विधानसभाओं लगभग 30 हजार से भी अधिक आबादी का आवागमन होता है। इस मार्ग पर केदारखेड़ा, पिंजरा, शिवपुरा, मोहदद्ीपुर, कोड़रा, नयागांव, बसहा, रसूलपूर आदि गांव स्थित हैं। दो वर्षों में ही इस सड़क ने दम तोड़ दिया है। मौजूदा समय में इस सड़क में इतने गड्ढे हो गए हैं कि लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है।
सड़क नंबर-2
असावर-मदारपुर मार्ग
लंबाई 4 किमी. लागत 175 लाख रुपये
त्वरित विकास योजना द्वारा निर्माण
विकासखंड की असावर और मदारपुर ग्राम पंचायत सहित तहसील मुख्यालय पुरवा को जोड़ने वाले इस प्रमुख का निर्माण त्वरित विकास योजना के जरिए किया गया था। 4 किमी. लंबे इस मार्ग का निर्माण वर्ष 2013 में हुआ था और इस पर 175 लाख रुपये का खर्च आया था। जानकारों की मानें तो सड़क निर्माण में उस समय मानकों की अनदेखी की गई थी। इससे यह सड़क दो सालों में ही गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। हाल यह है कि इस मार्ग पर चलना दुश्वार हो गया है।
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सड़क नंबर-3
पुरवा-सोहरामऊ मार्ग
लंबाई 19 किमी. लागत 392 लाख रुपये
तहसील मुख्यालय को राजधानी से जोड़ने वाले इस प्रमुख मार्ग का निर्माण 2013 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से शुरू हुआ था। शुरुआती समय में तो सड़क निर्माण में कुछ तेजी दिखी, लेकिन बाद में काम ठप हो गया। करीब तीन साल बीत गए, लेकिन यह मार्ग आज तक पूरा नहीं बन सका है। इस मार्ग में इतने गड्ढे हो गए हैं जिनकी चपेट में आए दिन हादसे होते हैं। गौरतलब बात यह है कि इसी मार्ग का उपयोग करके अधिकारी तहसील पुरवा व ब्लाक पहुंचते हैं। इस मार्ग से कांथा, सहरांवा, मिर्रीकला, शाहाबाद ग्रांट, अभूसा, धौरहरा, फतेहगंज, गोर्साइंखेड़ा, लालाखेड़ा, दरसवां, दऊ, असावर सहित लगभग आधा सैकड़ा गांव जुड़े हुए हैं। 20 हजार से अधिक लोग आवागमन के लिए इसी मार्ग का सहारा लेते हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
कुछ दिन पहले ही जिले में चार्ज लिया है। दो साल में सड़कों के ध्वस्त होने की जानकारी उन्हें नहीं है। अब मामला प्रकाश में आया है तो इसकी जांच कराई जाएगी। यदि सड़कें दो साल में ही जवाब दे गई हैं तो ठेकेदार से मरम्मत कराई जाएगी। संजीव सिंह, मुख्य विकास अधिकारी।
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सड़क नंबर-1
मौरावां-बिहार मार्ग
लंबाई -18 किमी. लागत 7 करोड़ रुपये
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत वर्ष 2013-14 में इस सड़क का निर्माण कराया गया था। यह पुरवा और भगवंतनगर विधानसभा सहित फतेहपुर जनपद को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। इस मार्ग से दोनों विधानसभाओं लगभग 30 हजार से भी अधिक आबादी का आवागमन होता है। इस मार्ग पर केदारखेड़ा, पिंजरा, शिवपुरा, मोहदद्ीपुर, कोड़रा, नयागांव, बसहा, रसूलपूर आदि गांव स्थित हैं। दो वर्षों में ही इस सड़क ने दम तोड़ दिया है। मौजूदा समय में इस सड़क में इतने गड्ढे हो गए हैं कि लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है।
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असावर-मदारपुर मार्ग
लंबाई 4 किमी. लागत 175 लाख रुपये
त्वरित विकास योजना द्वारा निर्माण
विकासखंड की असावर और मदारपुर ग्राम पंचायत सहित तहसील मुख्यालय पुरवा को जोड़ने वाले इस प्रमुख का निर्माण त्वरित विकास योजना के जरिए किया गया था। 4 किमी. लंबे इस मार्ग का निर्माण वर्ष 2013 में हुआ था और इस पर 175 लाख रुपये का खर्च आया था। जानकारों की मानें तो सड़क निर्माण में उस समय मानकों की अनदेखी की गई थी। इससे यह सड़क दो सालों में ही गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। हाल यह है कि इस मार्ग पर चलना दुश्वार हो गया है।
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सड़क नंबर-3
पुरवा-सोहरामऊ मार्ग
लंबाई 19 किमी. लागत 392 लाख रुपये
तहसील मुख्यालय को राजधानी से जोड़ने वाले इस प्रमुख मार्ग का निर्माण 2013 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से शुरू हुआ था। शुरुआती समय में तो सड़क निर्माण में कुछ तेजी दिखी, लेकिन बाद में काम ठप हो गया। करीब तीन साल बीत गए, लेकिन यह मार्ग आज तक पूरा नहीं बन सका है। इस मार्ग में इतने गड्ढे हो गए हैं जिनकी चपेट में आए दिन हादसे होते हैं। गौरतलब बात यह है कि इसी मार्ग का उपयोग करके अधिकारी तहसील पुरवा व ब्लाक पहुंचते हैं। इस मार्ग से कांथा, सहरांवा, मिर्रीकला, शाहाबाद ग्रांट, अभूसा, धौरहरा, फतेहगंज, गोर्साइंखेड़ा, लालाखेड़ा, दरसवां, दऊ, असावर सहित लगभग आधा सैकड़ा गांव जुड़े हुए हैं। 20 हजार से अधिक लोग आवागमन के लिए इसी मार्ग का सहारा लेते हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
कुछ दिन पहले ही जिले में चार्ज लिया है। दो साल में सड़कों के ध्वस्त होने की जानकारी उन्हें नहीं है। अब मामला प्रकाश में आया है तो इसकी जांच कराई जाएगी। यदि सड़कें दो साल में ही जवाब दे गई हैं तो ठेकेदार से मरम्मत कराई जाएगी। संजीव सिंह, मुख्य विकास अधिकारी।