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गेहूं, आलू फसलों के साथ नर्सरी भी नष्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Thu, 19 Mar 2015 12:04 AM IST
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असोहा। बारिश व तूफान से सरसों व आलू की फसल में सड़न शुरू हो गई है। क्षेत्र के शोभा रावत, रामलाल, सुनील अवस्थी आदि ने बताया कि हम लोगों ने ककड़ी, भिंडी, टमाटर, यूके लिप्टस की नर्सरी लगाई थी बारिश में ये सब नष्ट हो गया है।
मझखोरिया निवासी सतीश चंद्र अवस्थी ने बताया कि 2 हेक्टेयर गेहूं की फसल भारी बारिश के चलते खेतों में गिरी पड़ी है। खेतों में पानी भरा होने के कारण फसलें सड़ने लगी हैं। जो धन था वह फसलों को बोने व तैयार करने में लगा दिया था। अतरसई निवासी जगत नारायण ने बताया कि खेतों में भरे पानी को पंपिंगसेट के जरिए निकाल रहे हैं।
किसानों को फसल नष्ट होने के कारण बैंक से लिए गए ऋण को जमा करने की चिंता सता रही है। क्षेत्र के किसान सुनील अवस्थी, रामजी शुक्ला, विश्वनाथ यादव, राजकुमार सिंह, अयोध्या लोधी, राकेश, दीना, राजेपाल, रेखपाल यादव आदि ने मुआवजा दिलाने की मांग की है।
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संवाददाता के अनुसार, सफीपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत भदनी के गुलाब सिंह, शीतला प्रसाद अवस्थी, श्यामलाल, सूघर यादव आदि ने मुआवजे की मांग की है। इन किसानों का कहना है कि खरीफ की मुख्य फसल धान के समय बारिश नहीं हुई थी उस समय किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। उन लोगों को उम्मीद थी कि गेहूं की फसल अच्छी होने पर घाटा पूरा हो जाएगा लेकिन प्रकृति की मार से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
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मझखोरिया निवासी सतीश चंद्र अवस्थी ने बताया कि 2 हेक्टेयर गेहूं की फसल भारी बारिश के चलते खेतों में गिरी पड़ी है। खेतों में पानी भरा होने के कारण फसलें सड़ने लगी हैं। जो धन था वह फसलों को बोने व तैयार करने में लगा दिया था। अतरसई निवासी जगत नारायण ने बताया कि खेतों में भरे पानी को पंपिंगसेट के जरिए निकाल रहे हैं।
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किसानों को फसल नष्ट होने के कारण बैंक से लिए गए ऋण को जमा करने की चिंता सता रही है। क्षेत्र के किसान सुनील अवस्थी, रामजी शुक्ला, विश्वनाथ यादव, राजकुमार सिंह, अयोध्या लोधी, राकेश, दीना, राजेपाल, रेखपाल यादव आदि ने मुआवजा दिलाने की मांग की है।
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संवाददाता के अनुसार, सफीपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत भदनी के गुलाब सिंह, शीतला प्रसाद अवस्थी, श्यामलाल, सूघर यादव आदि ने मुआवजे की मांग की है। इन किसानों का कहना है कि खरीफ की मुख्य फसल धान के समय बारिश नहीं हुई थी उस समय किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। उन लोगों को उम्मीद थी कि गेहूं की फसल अच्छी होने पर घाटा पूरा हो जाएगा लेकिन प्रकृति की मार से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।