मौसम की मार से किसान बर्बाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गंजमुरादाबाद क्षेत्र के गंगा नदी के किनारे बसे दर्जनों गांव में से मुन्नी पुरवा, कुंसी, रतईपुरवा, मितानपुरवा, भगवंतपुरवा, गहरपुरवा आदि गांव के किसान गंगा की रेती में ककड़ी, तरबूज, खीरे के अलावा सब्जी तैयार करने में दो-तीन माह से कड़ाके की ठंडी में भी पसीना बहा रहे हैं। दिसंबर के आखिरी सप्ताह से 15 जनवरी तक गिरे भीषण कोहरे ने फसलों को भारी क्षति पहुंचाई है। कोहरे के बीच पाले की मार ने फलदार खेती को लगभग बर्बाद कर दिया है। हाड़तोड़ मेहनत व कर्ज के बलबूते फसल तैयार कर साल भर की जीविका का जुगाड़ कर रहे किसानों का हाल बेहाल है। कर्ज के साथ ही साल के खर्च व दो जून की रोटी का जुगाड़ कैसे होगा। यह सोचकर किसानों के आंसू थम नहीं रहे।
किसानों ने बयां किया दर्द
गुलरिहा किसान सूबेदार मौसम की बेरुखी से हुए नुकसान की जानकारी देते वक्त आंसुओं को रोक न सके। उनके अनुसार 50 फीसदी से ज्यादा फसल बर्बाद हो चुकी है। रतई पुरवा के रामखेलावन ने बताया कि कोहरे व पाले की चपेट में एक दो नहीं बल्कि तीन बार तरबूज के बीज की बुआई की, लेकिन नुकसान ही हाथ लगा। कुंशी निवासी किसान राजेश कुमार, सिपाहीलाल भी फसल में भारी नुकसान देख परेशान नजर आए। प्रकृति की बेरुखी से किसानों का हाल बेहाल है। ऐसे में आने वाले दिनों में मौसमी सब्जियों व फलों में महंगाई का तड़का लगना भी किसान तय मान रहे हैं।
फसल बर्बादी का आंकलन में जुटा प्रशासन
ओलावृष्टि से रबी की फसलों को काफी नुकसान हुआ है। प्रकृति की बेरुखी से किसानों का सुख चैन गायब हो गया है। फिलहाल फसलों को हुए नुकसान का आंकलन जिला प्रशासन ने शुरू कर दिया है, लेकिन सरकारी गाइड लाइन की शर्तों को चलते किसानों को राहत मिलने की उम्मीद न के बराबर है।
प्रकृति की मार से गंगा की तराई ही नहीं मैदानी क्षेत्र के किसान भी प्रभावित है। ओलावृष्टि व बेमौसम बारिश की चपेट में आकर तिलहन फसलें लगभग दम तोड़ गई हैं। किसानों के दर्द पर मरहम लगाने को सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने तहसीलवार फसल नुकसान का आंकलन शुरु कर दिया है। हसनगंज तहसीलदार विजय मिश्र ने बताया कि सरकार की गाइड लाइन के तहत फसल नुकसान का सर्वे किया जा चुका है। 33 फीसदी नुकसान होने पर मुआवजा देने की गाइड लाइन है जबकि सर्वे में लगभग 20 फीसदी नुकसान की रिपोर्ट आई है। सफीपुर तहसीलदार दशरथ कुमार समेत अन्य तहसील के तहसीलदारों ने सर्वे शुरु होने की बात कही है। वहीं बैक अधिकारियों का कहना है कि कृषि बीमा योजना के तहत किसान को चौबीस घंटे के भीतर सूचना देना होता है। जिन किसानों की फसलों का सर्वे हुआ है क्षति का आंकलन करने के बाद नुकासन के अनुरूप क्षतिपूर्ति दी जाएगी।