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वाहनों से वसूली के लिए सिपाहियों ने रखे ‘चेकर’
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Sun, 29 Mar 2015 11:28 PM IST
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उन्नाव। वाहनों से अवैध वसूली में व्यस्त खाकी को महकमे के अफसरों का भी खौफ नहीं
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रहा। जनता की मदद के लिए लगाई गई एक्शन मोबाइल का ईंधन पब्लिक की शिकायतों
के बजाय वाहनों का पीछा करने में खप रहा है।
पिकेट ड्यूटी के जवान चोर लुटेरों पर नहीं वाहनों पर नजर रखने में व्यस्त रहते हैं। हैरानी की बात यह है कि अवैध उगाही का यह खेल हाइवे पर खुलेआम चल रहा है।
हाईवे हो या अन्य मुख्य मार्ग सभी पर पिकेट और एक्शन मोबाइल ड्यूटी में तैनात जवान खुले वाहनों को दौड़ा-दौड़ाकर वसूली करते नजर आते हैं। कई प्रमुख चौराहों और तिराहों पर तैनात पुलिस जवान खुद को बचाने के लिए अपने गुर्गों से वसूली कराते हैं।
सिपाही सीटी बजाकर या टार्च की रोशनी से इशारा कर वाहन चालकों को रोकते हैं और उनके गुर्गे दौड़कर नोट लेकर चले आते हैं। इन प्राइवेट कर्मियों को पुलिस महकमे में ‘चेकर’ के नाम से जाना जाता है। लखनऊ-कानपुर हाइवे, हरदोई मार्ग और रायबरेली मार्ग पुलिस के लिए सबसे कमाई वाले मार्ग साबित हो रहे हैं।
यहां पिकेट और एक्शन मोबाइल में ड्यूटी पाने के लिए जवान थानेदार से लेकर ड्यूटी मुंशी तक की मुट्ठी गरम करते हैं और मोटी कमाई करते हैं।
यहां तैनाती के लिए लगती है होड़
उन्नाव। जाजमऊ, ललऊखेड़ा, गंगा बैराज, मगरवारा, दोस्तीनगर, दहीचौकी, नवाबगंज और सोहरामऊ के अलावा बांगरमऊ, पुरवा, अचलगंज, बीघापुर थाना और उनके क्षेत्र की पुलिस चौकियां सबसे कमाई वाली मानी जाती हैं। यहां तैनाती के लिए दरोगा और सिपाहियों में होड़ लगी रहती है।
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नहीं रुक रही पशु तस्करी और ओवर लोडिंग
उन्नाव। कमाई के चक्कर में भार वाहनों के जरिए तमाम अवैध काम भी होते हैं। मवेशी लदे ट्रक चालक नोट थमाते हुए बड़े आराम से स्लाटर हाउस तक पहुंच जाते हैं। इसके अलावा ओवर लोडिंग और बिना फिटनेस के वाहन भी आराम से सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
फाइलों में दबी जांच और कार्रवाई
उन्नाव। वाहनों से अवैध वसूली की शिकायतें जांच की फाइलों में दफन हो जाती हैं। तीन महीने पहले सदर कोतवाली क्षेत्र में हाईवे पर वाहनों से अवैध वसूली को लेकर ट्रक चालक और सिपाहियों के बीच बवाल हो गया था। नाराज ट्रक चालकों ने ट्रकों को आड़ा तिरछा खड़ा कर जाम भी लगाया था।
इसके बाद लगातार कई दिनों तक मामला सुर्खियों में रहने के बाद पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर मामला दर्ज हुआ और जांच के निर्देश दिए गए। कई महीने बीतने के बाद भी अभी यही तय नहीं हो पाया है कि वसूली करने वाले चौकी के जवान थे या ट्रैफिक पुलिस के।
इससे पूर्व में अजगैन थानाक्षेत्र में तत्कालीन सीओ ने एक स्लाटर हाउस के पास पिकेट ड्यूटी पर तैनात तीन पुलिस जवानों को एक युवक के साथ रंगेहाथ पकड़ा था। तमाम हो हल्ला मचने के बाद कार्रवाई करते हुए जवानों को पुलिस लाइन भेज दिया गया मगर इसके बाद जांच के नाम पर सब ठंडे बस्ते में चला गया।
होती है जांच और कार्रवाई
अपर पुलिस अधीक्षक रामकिशुन यादव ने बताया कि जब भी ऐसी शिकायत मिलती है सख्त कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि इसी तरह की शिकायतों के चलते गंगाघाट और सदर कोतवाली क्षेत्र की पुलिस चौकियों के सभी सिपाहियों का पुलिस लाइन तबादला कर दिया गया था। काफी समय से एक ही थाने या पुलिस चौकी में जमे करीब आधा सैकड़ा जवानों को दूसरे थाना-चौकियों में तबादला किया गया है। उन्होंने बताया कि जहां कहीं भी इस तरह की शिकायत मिलेगी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पिकेट ड्यूटी के जवान चोर लुटेरों पर नहीं वाहनों पर नजर रखने में व्यस्त रहते हैं। हैरानी की बात यह है कि अवैध उगाही का यह खेल हाइवे पर खुलेआम चल रहा है।
हाईवे हो या अन्य मुख्य मार्ग सभी पर पिकेट और एक्शन मोबाइल ड्यूटी में तैनात जवान खुले वाहनों को दौड़ा-दौड़ाकर वसूली करते नजर आते हैं। कई प्रमुख चौराहों और तिराहों पर तैनात पुलिस जवान खुद को बचाने के लिए अपने गुर्गों से वसूली कराते हैं।
सिपाही सीटी बजाकर या टार्च की रोशनी से इशारा कर वाहन चालकों को रोकते हैं और उनके गुर्गे दौड़कर नोट लेकर चले आते हैं। इन प्राइवेट कर्मियों को पुलिस महकमे में ‘चेकर’ के नाम से जाना जाता है। लखनऊ-कानपुर हाइवे, हरदोई मार्ग और रायबरेली मार्ग पुलिस के लिए सबसे कमाई वाले मार्ग साबित हो रहे हैं।
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यहां पिकेट और एक्शन मोबाइल में ड्यूटी पाने के लिए जवान थानेदार से लेकर ड्यूटी मुंशी तक की मुट्ठी गरम करते हैं और मोटी कमाई करते हैं।
यहां तैनाती के लिए लगती है होड़
उन्नाव। जाजमऊ, ललऊखेड़ा, गंगा बैराज, मगरवारा, दोस्तीनगर, दहीचौकी, नवाबगंज और सोहरामऊ के अलावा बांगरमऊ, पुरवा, अचलगंज, बीघापुर थाना और उनके क्षेत्र की पुलिस चौकियां सबसे कमाई वाली मानी जाती हैं। यहां तैनाती के लिए दरोगा और सिपाहियों में होड़ लगी रहती है।
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नहीं रुक रही पशु तस्करी और ओवर लोडिंग
उन्नाव। कमाई के चक्कर में भार वाहनों के जरिए तमाम अवैध काम भी होते हैं। मवेशी लदे ट्रक चालक नोट थमाते हुए बड़े आराम से स्लाटर हाउस तक पहुंच जाते हैं। इसके अलावा ओवर लोडिंग और बिना फिटनेस के वाहन भी आराम से सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
फाइलों में दबी जांच और कार्रवाई
उन्नाव। वाहनों से अवैध वसूली की शिकायतें जांच की फाइलों में दफन हो जाती हैं। तीन महीने पहले सदर कोतवाली क्षेत्र में हाईवे पर वाहनों से अवैध वसूली को लेकर ट्रक चालक और सिपाहियों के बीच बवाल हो गया था। नाराज ट्रक चालकों ने ट्रकों को आड़ा तिरछा खड़ा कर जाम भी लगाया था।
इसके बाद लगातार कई दिनों तक मामला सुर्खियों में रहने के बाद पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर मामला दर्ज हुआ और जांच के निर्देश दिए गए। कई महीने बीतने के बाद भी अभी यही तय नहीं हो पाया है कि वसूली करने वाले चौकी के जवान थे या ट्रैफिक पुलिस के।
इससे पूर्व में अजगैन थानाक्षेत्र में तत्कालीन सीओ ने एक स्लाटर हाउस के पास पिकेट ड्यूटी पर तैनात तीन पुलिस जवानों को एक युवक के साथ रंगेहाथ पकड़ा था। तमाम हो हल्ला मचने के बाद कार्रवाई करते हुए जवानों को पुलिस लाइन भेज दिया गया मगर इसके बाद जांच के नाम पर सब ठंडे बस्ते में चला गया।
होती है जांच और कार्रवाई
अपर पुलिस अधीक्षक रामकिशुन यादव ने बताया कि जब भी ऐसी शिकायत मिलती है सख्त कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि इसी तरह की शिकायतों के चलते गंगाघाट और सदर कोतवाली क्षेत्र की पुलिस चौकियों के सभी सिपाहियों का पुलिस लाइन तबादला कर दिया गया था। काफी समय से एक ही थाने या पुलिस चौकी में जमे करीब आधा सैकड़ा जवानों को दूसरे थाना-चौकियों में तबादला किया गया है। उन्होंने बताया कि जहां कहीं भी इस तरह की शिकायत मिलेगी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।