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चौथे दिन भी गांव में रहा पुलिस का पहरा
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बबुरहा गांव जाने वाले मार्ग पर लगा बैरियर व तैनात पुलिसबल।
- फोटो : UNNAO
असोहा(उन्नाव)। वारदात के चौथे दिन भी गांव में पुलिस का कड़ा पहरा रहा। गांव की गलियों में पुलिस व पीएसी के बूटों की धमक से ग्रामीण सहमे रहे। मुख्य मार्ग से गांव व अन्य रास्तों में बैरिकेडिंग लगा पुलिस हर आने-जाने वालों पर नजर रखे रही। किसी की बेवजह गांव में घुसने की अनुमति नहीं दी गई। एसडीएम व एसपी गांव में मौजूद रहे। पीएसी भी अलर्ट पर रही।
हर आने-जाने वाले को रोककर चेक करने और पूछताछ के बाद ही गांव में प्रवेश दिया गया। बाहरी लोगों को लौटाया गया। गांव तक पहुंचने से पहले दो अन्य बैरियर पर भारी फोर्स तैनात रहा। गांव में दो अलग-अलग जगहों पर पीएसी कैंप करती रही। एसडीएम पुरवा राजेश कुमार चौरसिया व एएसपी वीके पांडेय गांव के अंदर पुलिस को चौकन्ना रहने और हर गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश देते रहे। गांव में एक जगह किसी को खड़ा नहीं होने दिया गया। लोग घरों या छतों से ही गांव आने-जाने वाले राजनीतिक दलों को देखते रहे। डीएम रवींद्र कुमार और एसपी आनंद कुलकर्णी असोहा थाना में मौजूद रहकर हालातों पर नजर रखे रहे। किसी भी राजनीतिक दल के पहुंचने पर एएसपी या सीओ उनके साथ पीड़ित परिवार के घर तक आते-जाते रहे।
मुआवजे पर विवाद की स्थिति
डीएम की ओर से मृत किशोरियों के परिजनों को दी गई पांच-पांच लाख की आर्थिक सहायता राशि को लेकर दोनों परिवारों में विवाद की स्थिति बनी रही। एक किशोरी के बाबा का कहना है कि उसकी पौत्री की मां सौतेली थी। बचपन से वह उसे पाल रहा था। पिता का सहयोग जरूर मिलता था। इसका मतलब यह नहीं कि पूरी आर्थिक राशि उसे ही दे दी जाए। उसने आधी राशि दिए जाने की मांग की है। वहीं दूसरी मृतका के पिता को मिली पांच लाख की चेक में भी बेटों के बीच विवाद की स्थिति रही। बेटों ने पिता से मिली राशि में आधा हिस्सा मांगा तो पिता ने अलग रहने की बात कह दी। इस दौरान परिवारों में विवाद की स्थिति बनी रही। (संवाद)
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हर आने-जाने वाले को रोककर चेक करने और पूछताछ के बाद ही गांव में प्रवेश दिया गया। बाहरी लोगों को लौटाया गया। गांव तक पहुंचने से पहले दो अन्य बैरियर पर भारी फोर्स तैनात रहा। गांव में दो अलग-अलग जगहों पर पीएसी कैंप करती रही। एसडीएम पुरवा राजेश कुमार चौरसिया व एएसपी वीके पांडेय गांव के अंदर पुलिस को चौकन्ना रहने और हर गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश देते रहे। गांव में एक जगह किसी को खड़ा नहीं होने दिया गया। लोग घरों या छतों से ही गांव आने-जाने वाले राजनीतिक दलों को देखते रहे। डीएम रवींद्र कुमार और एसपी आनंद कुलकर्णी असोहा थाना में मौजूद रहकर हालातों पर नजर रखे रहे। किसी भी राजनीतिक दल के पहुंचने पर एएसपी या सीओ उनके साथ पीड़ित परिवार के घर तक आते-जाते रहे।
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मुआवजे पर विवाद की स्थिति
डीएम की ओर से मृत किशोरियों के परिजनों को दी गई पांच-पांच लाख की आर्थिक सहायता राशि को लेकर दोनों परिवारों में विवाद की स्थिति बनी रही। एक किशोरी के बाबा का कहना है कि उसकी पौत्री की मां सौतेली थी। बचपन से वह उसे पाल रहा था। पिता का सहयोग जरूर मिलता था। इसका मतलब यह नहीं कि पूरी आर्थिक राशि उसे ही दे दी जाए। उसने आधी राशि दिए जाने की मांग की है। वहीं दूसरी मृतका के पिता को मिली पांच लाख की चेक में भी बेटों के बीच विवाद की स्थिति रही। बेटों ने पिता से मिली राशि में आधा हिस्सा मांगा तो पिता ने अलग रहने की बात कह दी। इस दौरान परिवारों में विवाद की स्थिति बनी रही। (संवाद)
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