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Unnao News: गंगा की बाढ़ से 36 गांव प्रभावित, एक हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान
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बाबू बंगला गांव जाने वाली सड़क पर भरे बाढ़ के पानी से गुजरते ग्रामीण। संवाद
उन्नाव। गंगा का बढ़ा जलस्तर कम होना शुरू हो गया है। मंगलवार को पानी खतरे के निशान 113 मीटर से घटकर 112.890 मीटर पर आ गया। हालांकि अभी भी कटरी के गांवों में रास्तों व खेतों में पानी भरा है। वहीं प्रशासन द्वारा कराए गए प्राथमिक आकलन में 36 गांवों के बाढ़ प्रभावित होने और करीब एक हजार हेक्टेयर फसल नुकसान का आंकड़ा सामने आया है। विस्तृत जांच के लिए पानी सूखने का इंतजार किया जा रहा है।
जनपद की बीघापुर, सदर, बांगरमऊ व सफीपुर तहसील के करीब 36 गांव प्रशासन की तैयार कराई गई प्राथमिक रिपोर्ट में बाढ़ प्रभावित मिले हैं। इन गांवों में एक हजार हेक्टेयर में बोई गई धान, मक्का, उड़द, मूंग, अरहर व हरी सब्जियों के नष्ट होने की जानकारी सामने आ रही है। गांवों में पानी भरा होने से अभी विस्तृत जांच शुरू नहीं हो सकी है। इसके लिए प्रशासन पानी कम होने व सूखने का इंतजार कर रहा है।
मंगलवार को जलस्तर खतरे के निशान से 11 सेमी नीचे आ गया। हालांकि इसके बाद भी पानी चेतावनी बिंदु 112 मीटर से 89 सेमी ऊपर है। एडीएम वित्त राजस्व सुशील कुमार गोंड ने बताया कि कम तेजी से कम होने लगा है। एक-दो दिन में चेतावनी बिंदु से नीचे आने की उम्मीद है। इसके बाद टीमों को लगाकर प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। नुकसान के आधार पर पीड़ितों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
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इंसेट-1
पानी घटा पर गांवों में कम नहीं हुईं समस्याएं
परियर। पिछले दो दिन में क्षेत्र में आधा फीट तक गंगा का पानी घटा है। इसके बाद भी सदर तहसील क्षेत्र के गांव बाबूबंगला, पनपथा, चंडीबंगला, कोलवा, देवीपुरवा आदि गांवों में पानी भरा हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले दो दिनों में पानी भले ही कम हुआ है लेकिन समस्याओं में कमी नहीं आई है। बाढ़ से घिरे देवीपुरवा, लालतुपुरवा व कोलवा सहित अन्य कई गांवों में अभी प्रशासन को ओर से किसी प्रकार की मदद नहीं पहुंची है। प्रशासन द्वारा राहत सामग्री न पहुंचाने जाने से परेशान ग्रामीणों को बाढ़ से गुजर कर खाने-पीने का सामान लेने परियर या बिठूर की बाजार जाना पड़ रहा है।
इंसेट-2
बाढ़ प्रभावित गांवों में पशुओं का टीकाकरण, दवाएं बांटीं
नवाबगंज। विकासखंड के बाढ़ प्रभावित भितरेपार, सेवसड़, खजूर, मोहनीखेड़ा और बरेला गांवों में मंगलवार को पशुपालन विभाग की टीम ने पहुंचकर पशुओं का टीकाकरण और उपचार किया। पशु चिकित्साधिकारी नवाबगंज डॉ. राजेश मौर्य के नेतृत्व में सचल मोबाइल वेटरनरी यूनिट के डॉ. अंकुर सिंह और टीम ने गांवों में पहुंचकर बीमार पशुओं का उपचार किया। पशुओं को कृमिनाशक दवाएं दीं। लंपी बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण किया। जिन पशुओं को पेट के कीड़ों की समस्या थी, उनके लिए दवाएं भी वितरित की गईं। डॉ. राजेश मौर्य ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं में संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए टीम लगातार निगरानी कर रही है। पशुपालकों को पशुओं को साफ-सुथरे स्थान पर रखने, दूषित पानी से बचाने और किसी भी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
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जनपद की बीघापुर, सदर, बांगरमऊ व सफीपुर तहसील के करीब 36 गांव प्रशासन की तैयार कराई गई प्राथमिक रिपोर्ट में बाढ़ प्रभावित मिले हैं। इन गांवों में एक हजार हेक्टेयर में बोई गई धान, मक्का, उड़द, मूंग, अरहर व हरी सब्जियों के नष्ट होने की जानकारी सामने आ रही है। गांवों में पानी भरा होने से अभी विस्तृत जांच शुरू नहीं हो सकी है। इसके लिए प्रशासन पानी कम होने व सूखने का इंतजार कर रहा है।
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मंगलवार को जलस्तर खतरे के निशान से 11 सेमी नीचे आ गया। हालांकि इसके बाद भी पानी चेतावनी बिंदु 112 मीटर से 89 सेमी ऊपर है। एडीएम वित्त राजस्व सुशील कुमार गोंड ने बताया कि कम तेजी से कम होने लगा है। एक-दो दिन में चेतावनी बिंदु से नीचे आने की उम्मीद है। इसके बाद टीमों को लगाकर प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। नुकसान के आधार पर पीड़ितों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
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पानी घटा पर गांवों में कम नहीं हुईं समस्याएं
परियर। पिछले दो दिन में क्षेत्र में आधा फीट तक गंगा का पानी घटा है। इसके बाद भी सदर तहसील क्षेत्र के गांव बाबूबंगला, पनपथा, चंडीबंगला, कोलवा, देवीपुरवा आदि गांवों में पानी भरा हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले दो दिनों में पानी भले ही कम हुआ है लेकिन समस्याओं में कमी नहीं आई है। बाढ़ से घिरे देवीपुरवा, लालतुपुरवा व कोलवा सहित अन्य कई गांवों में अभी प्रशासन को ओर से किसी प्रकार की मदद नहीं पहुंची है। प्रशासन द्वारा राहत सामग्री न पहुंचाने जाने से परेशान ग्रामीणों को बाढ़ से गुजर कर खाने-पीने का सामान लेने परियर या बिठूर की बाजार जाना पड़ रहा है।
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बाढ़ प्रभावित गांवों में पशुओं का टीकाकरण, दवाएं बांटीं
नवाबगंज। विकासखंड के बाढ़ प्रभावित भितरेपार, सेवसड़, खजूर, मोहनीखेड़ा और बरेला गांवों में मंगलवार को पशुपालन विभाग की टीम ने पहुंचकर पशुओं का टीकाकरण और उपचार किया। पशु चिकित्साधिकारी नवाबगंज डॉ. राजेश मौर्य के नेतृत्व में सचल मोबाइल वेटरनरी यूनिट के डॉ. अंकुर सिंह और टीम ने गांवों में पहुंचकर बीमार पशुओं का उपचार किया। पशुओं को कृमिनाशक दवाएं दीं। लंपी बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण किया। जिन पशुओं को पेट के कीड़ों की समस्या थी, उनके लिए दवाएं भी वितरित की गईं। डॉ. राजेश मौर्य ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं में संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए टीम लगातार निगरानी कर रही है। पशुपालकों को पशुओं को साफ-सुथरे स्थान पर रखने, दूषित पानी से बचाने और किसी भी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है।