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Unnao News: दो साल बाद भी सीईटीपी अधूरे...गंगा में गिर रहा उद्योगों का गंदा पानी
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बंथर औद्योगिक क्षेत्र स्थित सीईटीपी। संवाद
उन्नाव। सात साल पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के मानकों पर फेल जिले के दोनों औद्योगिक क्षेत्रों के कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) तय समय सीमा के दो साल बाद भी अधूरे हैं। इनको आधुनिक उपकरणों से जीरो डिस्चार्ज के अनुरूप बनाने पर 218 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। सितंबर 2022 में बंथर सीईटीपी में काम शुरू हुआ था, जबकि दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र के सीईटीपी में अभी काम की शुरुआत तक नहीं हुई। जिम्मेदारों का कहना है कि अभी दो महीने और लगेंगे। इस कारण उद्योगों का गंदा पानी गंगा में गिर रहा है।
गंगा नदी और पर्यावरण को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए एनजीटी की सख्ती के बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मानकों में बदलाव किए थे। वर्ष 2017 में औद्योगिक क्षेत्र बंथर और दही चौकी के सीईटीपी के फेल घोषित होने पर अपग्रेड करने की योजना बनाई गई। बंथर औद्योगिक क्षेत्र की सीईटीपी पर 111 करोड़ और दही चौकी क्षेत्र के प्लांट पर 107 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। दोनों सीईटीपी को एनजीटी के जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) के अनुरूप तैयार करने का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
ये है योजना
आधुनिक और कंप्यूटरीकृत तकनीक के उपकरण लगाकर सीईटीपी से निकलने वाले पानी से क्रोमियम, फ्लोराइड, सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड), पीएचबी, बीओडी और एसएस (सब स्टैंड सॉलिड) को पानी से अलग किया जाएगा। इससे गंगा नदी और भूगर्भ जल प्रदूषण से मुक्त रहेगा।
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उत्प्रवाह में 50 फीसदी कमी, उत्पादन प्रभावित
प्रदूषण के कारण प्रतिबंध झेल रहीं 41 टेनरियों से सात साल से आधा उत्प्रवाह किया जा रहा है। इसका असर उत्पादन पर भी है। दही चौकी सीईटीपी में पहले प्रतिदिन 20 लाख लीटर (दो एमएलडी) पानी आता था लेकिन वर्तमान में 10 से 11 लाख लीटर ही आता है। वहीं बंथर सीईटीपी में औसतन 30 लाख लीटर (तीन एमएलडी) के बजाय 15 से 16 लाख लीटर ही पानी आ रहा है।
काम में देरी से उद्यमी परेशान
चर्म उत्पाद निर्यातक ताज आलम का कहना है कि सीईटीपी के अपग्रेड होने से टेनरियों और अन्य कारखानों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्हें हर साल माघ मेला सहित अन्य पर्वों के दौरान महीनों तक अपने कारखाने बंद नहीं रखने पड़ेंगे। अपग्रेडेशन से उद्योगों को वार्षिक बंदी से निजात मिल सकेगी लेकिन काम में देरी से उद्यमियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्जन...
एनएमसीजी से स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद बंथर सीईटीपी को अपग्रेड करने का काम जारी है। यहां वाटर ट्रीटमेंट और प्यूरीफायर यूनिट में अत्याधुनिक उपकरण लगाए जा चुके हैं। इन दोनों यूनिट को अगले नवंबर महीने तक चालू कर दिया जाएगा। -ऋतुराज साहू, प्रोजेक्ट मैनेजर।
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गंगा नदी और पर्यावरण को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए एनजीटी की सख्ती के बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मानकों में बदलाव किए थे। वर्ष 2017 में औद्योगिक क्षेत्र बंथर और दही चौकी के सीईटीपी के फेल घोषित होने पर अपग्रेड करने की योजना बनाई गई। बंथर औद्योगिक क्षेत्र की सीईटीपी पर 111 करोड़ और दही चौकी क्षेत्र के प्लांट पर 107 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। दोनों सीईटीपी को एनजीटी के जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) के अनुरूप तैयार करने का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
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ये है योजना
आधुनिक और कंप्यूटरीकृत तकनीक के उपकरण लगाकर सीईटीपी से निकलने वाले पानी से क्रोमियम, फ्लोराइड, सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड), पीएचबी, बीओडी और एसएस (सब स्टैंड सॉलिड) को पानी से अलग किया जाएगा। इससे गंगा नदी और भूगर्भ जल प्रदूषण से मुक्त रहेगा।
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उत्प्रवाह में 50 फीसदी कमी, उत्पादन प्रभावित
प्रदूषण के कारण प्रतिबंध झेल रहीं 41 टेनरियों से सात साल से आधा उत्प्रवाह किया जा रहा है। इसका असर उत्पादन पर भी है। दही चौकी सीईटीपी में पहले प्रतिदिन 20 लाख लीटर (दो एमएलडी) पानी आता था लेकिन वर्तमान में 10 से 11 लाख लीटर ही आता है। वहीं बंथर सीईटीपी में औसतन 30 लाख लीटर (तीन एमएलडी) के बजाय 15 से 16 लाख लीटर ही पानी आ रहा है।
काम में देरी से उद्यमी परेशान
चर्म उत्पाद निर्यातक ताज आलम का कहना है कि सीईटीपी के अपग्रेड होने से टेनरियों और अन्य कारखानों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्हें हर साल माघ मेला सहित अन्य पर्वों के दौरान महीनों तक अपने कारखाने बंद नहीं रखने पड़ेंगे। अपग्रेडेशन से उद्योगों को वार्षिक बंदी से निजात मिल सकेगी लेकिन काम में देरी से उद्यमियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्जन...
एनएमसीजी से स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद बंथर सीईटीपी को अपग्रेड करने का काम जारी है। यहां वाटर ट्रीटमेंट और प्यूरीफायर यूनिट में अत्याधुनिक उपकरण लगाए जा चुके हैं। इन दोनों यूनिट को अगले नवंबर महीने तक चालू कर दिया जाएगा। -ऋतुराज साहू, प्रोजेक्ट मैनेजर।