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Unnao News: ओवरलोडिंग ने निकाला सात सड़कों का कचूमर
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फोटो-1- जर्जर मंगतखेड़ा-कांथा मार्ग से गुजरते वाहन। संवाद
उन्नाव। परिवहन विभाग और सिंडीकेट की सांठगांठ से खनिज लदे ओवरलोड वाहन हाईवे की बजाय दूसरे रास्तों से निकालकर लखनऊ पहुंचाए जा रहे हैं। दिन-रात ओवरलोड वाहनों के आवागमन से लखनऊ को जोड़ने वाली सात प्रमुख सड़कों का कचूमर निकल गया है। इन्हें दोबारा बनाने पर करीब डेढ़ अरब रुपये खर्च होंगे। खराब हुई सड़कों के कारण उन्नाव, पुरवा और बीघापुर क्षेत्र की करीब तीन लाख आबादी मुसीबत झेल रही है।
हमीरपुर, बांदा, झांसी आदि जिलों से गिट्टी, मौरंग और अन्य खनिज लदे ओवरलोड वाहन उन्नाव जिले से होकर लखनऊ मंडी जाते हैं। ओवरलोडिंग के पीछे बड़ा खेल होने से इस पर अंकुश नहीं लग पाया। परिवहन विभाग और सिंडीकेट की सांठगांठ के चलते भारी वाहनों को लखनऊ-कानपुर हाईवे की बजाय दूसरे रास्तों से निकाला गया। हाईवे पर 40 से 100 टन माल लादकर चलने वाले भारी वाहन 20 से 25 टन क्षमता वाली सड़कों से बेधड़क निकल रहे हैं। इससे उन्नाव-मोहनलालगंज मार्ग सहित अन्य संपर्क मार्गों टूट गए।
एआरटीओ कार्यालय के अनुसार खनिज लदे रोजाना औसतन 20 हजार भारी वाहन जिले से होकर निकलते हैं। इनमें लखनऊ की ओर जाने वाले गिट्टी, मौरंग, बालू, स्टोन डस्ट, पत्थर व अन्य खनिज लदे वाहन पुरवा, मौरावां, मंगतखेड़ा, असोहा, सोहरामऊ होकर मोहनलालगंज और जुनाबगंज होकर लखनऊ पहुंचते हैं।
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पीडब्ल्यूडी के मुताबिक, भारी वाहनों से जिले की सात प्रमुख सड़कें खराब हो चुकी हैं। हालत ऐसी हो गई है कि इनकी मरम्मत नहीं हो सकती हैं और नई सड़क बनाने पर 30 से 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
ओवरलोडिंग से खराब हुईं प्रमुख सात सड़कें
- मौरावां-बिहार होते हुए मोहनलालगंज मार्ग-18 किलोमीटर
- पुरवा-बिहार मार्ग होते हुए लखनऊ मार्ग-12 किलोमीटर
- पुरवा मार्ग से मंगतखेड़ा-कांथा-लालखेड़ा चौराहा होते हुए लखनऊ मार्ग-18 किलोमीटर
- पुरवा से मिर्री चौराहा-सोहरामऊ होते हुए लखनऊ के जुनाबगंज मार्ग-22 किलोमीटर
- कालूखेड़ा से असोहा, दरेहटा होते हुए मोहनलालगंज मार्ग- 19 किलोमीटर
- कालूखेड़ा से असरेंदा, निगोहा होते हुए मोहनलालगंज मार्ग-12 किलोमीटर
- मौरावां से हिलौली, बछरावां मार्ग से मोहनलालगंज मार्ग- 12 किलोमीटर
वर्जन....
ओवरलोड वाहनों की वजह से सड़कें टूट गई हैं। इनकी मरम्मत कराना मुश्किल है। इन सड़कों को दोबारा बनाने के लिए लखनऊ मुख्यालय रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। उच्चस्तरीय तकनीकी टीम निरीक्षण भी कर चुकी है। मौरावां-बिहार मार्ग के लिए 49.91 करोड़ रुपये मंजूर हो चुके हैं और कालूखेड़ा-सोहरामऊ मार्ग के लिए 48 करोड़ की डीपीआर बनाकर शासन को भेजी गई है। इसे भी जल्द मंजूरी मिल जाएगी। -हरदयाल अहरवार, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी।
मौरावां-बिहार मार्ग के लिए 49.91 करोड़ मंजूर
भारी वाहनों के आवागमन से खराब 18 किलोमीटर लंबे मौरावां-बिहार मार्ग को शासन ने तीन अक्तूबर 2024 को चौडा़ई बढ़ाने की मंजूरी दी थी। पांच मीटर चौड़े इस मार्ग की चौड़ाई बढ़ाकर सात मीटर की जा रही है। शासन ने इसके लिए 49.91 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
कालूखेड़ा-सोहरामऊ मार्ग के लिए 48 करोड़ की डीपीआर
गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्माण सामग्री की ढुलाई और लखनऊ जाने वाले खनिज लदे ओवर लोड वाहनों की वजह से पूरी तरह ध्वस्त हो चुके कालूखेड़ा-कांथा-सोहरामऊ मार्ग के लिए पीडब्ल्यूडी के डीपीआर को शासन ने मंजूरी दे दी है। यह मार्ग पुरवा तहसील के कालूखेड़ा चौराहा पर उन्नाव-मोहनलालगंज-लखनऊ मार्ग और भल्लार्फाम-असोहा मार्ग को लखनऊ-कानपुर हाईवे को जोड़ता है। इस 18 किलोमीटर मार्ग को फोर लेन किया जाएगा और इसपर 48 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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हमीरपुर, बांदा, झांसी आदि जिलों से गिट्टी, मौरंग और अन्य खनिज लदे ओवरलोड वाहन उन्नाव जिले से होकर लखनऊ मंडी जाते हैं। ओवरलोडिंग के पीछे बड़ा खेल होने से इस पर अंकुश नहीं लग पाया। परिवहन विभाग और सिंडीकेट की सांठगांठ के चलते भारी वाहनों को लखनऊ-कानपुर हाईवे की बजाय दूसरे रास्तों से निकाला गया। हाईवे पर 40 से 100 टन माल लादकर चलने वाले भारी वाहन 20 से 25 टन क्षमता वाली सड़कों से बेधड़क निकल रहे हैं। इससे उन्नाव-मोहनलालगंज मार्ग सहित अन्य संपर्क मार्गों टूट गए।
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एआरटीओ कार्यालय के अनुसार खनिज लदे रोजाना औसतन 20 हजार भारी वाहन जिले से होकर निकलते हैं। इनमें लखनऊ की ओर जाने वाले गिट्टी, मौरंग, बालू, स्टोन डस्ट, पत्थर व अन्य खनिज लदे वाहन पुरवा, मौरावां, मंगतखेड़ा, असोहा, सोहरामऊ होकर मोहनलालगंज और जुनाबगंज होकर लखनऊ पहुंचते हैं।
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पीडब्ल्यूडी के मुताबिक, भारी वाहनों से जिले की सात प्रमुख सड़कें खराब हो चुकी हैं। हालत ऐसी हो गई है कि इनकी मरम्मत नहीं हो सकती हैं और नई सड़क बनाने पर 30 से 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
ओवरलोडिंग से खराब हुईं प्रमुख सात सड़कें
- मौरावां-बिहार होते हुए मोहनलालगंज मार्ग-18 किलोमीटर
- पुरवा-बिहार मार्ग होते हुए लखनऊ मार्ग-12 किलोमीटर
- पुरवा मार्ग से मंगतखेड़ा-कांथा-लालखेड़ा चौराहा होते हुए लखनऊ मार्ग-18 किलोमीटर
- पुरवा से मिर्री चौराहा-सोहरामऊ होते हुए लखनऊ के जुनाबगंज मार्ग-22 किलोमीटर
- कालूखेड़ा से असोहा, दरेहटा होते हुए मोहनलालगंज मार्ग- 19 किलोमीटर
- कालूखेड़ा से असरेंदा, निगोहा होते हुए मोहनलालगंज मार्ग-12 किलोमीटर
- मौरावां से हिलौली, बछरावां मार्ग से मोहनलालगंज मार्ग- 12 किलोमीटर
वर्जन....
ओवरलोड वाहनों की वजह से सड़कें टूट गई हैं। इनकी मरम्मत कराना मुश्किल है। इन सड़कों को दोबारा बनाने के लिए लखनऊ मुख्यालय रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। उच्चस्तरीय तकनीकी टीम निरीक्षण भी कर चुकी है। मौरावां-बिहार मार्ग के लिए 49.91 करोड़ रुपये मंजूर हो चुके हैं और कालूखेड़ा-सोहरामऊ मार्ग के लिए 48 करोड़ की डीपीआर बनाकर शासन को भेजी गई है। इसे भी जल्द मंजूरी मिल जाएगी। -हरदयाल अहरवार, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी।
मौरावां-बिहार मार्ग के लिए 49.91 करोड़ मंजूर
भारी वाहनों के आवागमन से खराब 18 किलोमीटर लंबे मौरावां-बिहार मार्ग को शासन ने तीन अक्तूबर 2024 को चौडा़ई बढ़ाने की मंजूरी दी थी। पांच मीटर चौड़े इस मार्ग की चौड़ाई बढ़ाकर सात मीटर की जा रही है। शासन ने इसके लिए 49.91 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
कालूखेड़ा-सोहरामऊ मार्ग के लिए 48 करोड़ की डीपीआर
गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्माण सामग्री की ढुलाई और लखनऊ जाने वाले खनिज लदे ओवर लोड वाहनों की वजह से पूरी तरह ध्वस्त हो चुके कालूखेड़ा-कांथा-सोहरामऊ मार्ग के लिए पीडब्ल्यूडी के डीपीआर को शासन ने मंजूरी दे दी है। यह मार्ग पुरवा तहसील के कालूखेड़ा चौराहा पर उन्नाव-मोहनलालगंज-लखनऊ मार्ग और भल्लार्फाम-असोहा मार्ग को लखनऊ-कानपुर हाईवे को जोड़ता है। इस 18 किलोमीटर मार्ग को फोर लेन किया जाएगा और इसपर 48 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

फोटो-1- जर्जर मंगतखेड़ा-कांथा मार्ग से गुजरते वाहन। संवाद