{"_id":"69d16ee512ef3819ad05b17b","slug":"unnao-news-unnao-news-c-12-1-knp1055-1479062-2026-04-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Unnao News: पश्चिम एशिया में बिगड़े हालात से डेढ़ गुना हुई निर्यात की लागत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Unnao News: पश्चिम एशिया में बिगड़े हालात से डेढ़ गुना हुई निर्यात की लागत
विज्ञापन
उन्नाव। पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात ने निर्यात व्यापार को गहरा झटका दिया है। एक महीने में ही व्यापार करीब छह महीने पीछे चला गया है। हालांकि, केंद्र सरकार के 497 करोड़ रुपये के पैकेज और तीन महीने के लिए पेट्रोकेमिकल उत्पादों से आयात शुल्क समाप्त करने से कुछ राहत मिली है।
उद्यमी ताज आलम, असद कमाल और जीएन मिश्रा ने बताया कि ईरान और अमेरिका-इस्राराइल के बीच युद्ध से खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता है। इससे समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित है। लाल सागर जैसे प्रमुख शिपिंग मार्गों पर खतरे बढ़ गए हैं। इन खतरों के कारण जहाजों को अब वैकल्पिक रास्तों से निकाला जा रहा है। यूरोपीय देशों में पहले आपूर्ति में बाधा आई थी। अब समुद्री मार्ग की दूरी बढ़ने से व्यापार और प्रभावित हुआ है। पहले यूरोपीय देशों के लिए माल स्वेज नहर और लाल सागर से होकर निकलता था। अब जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे, केप ऑफ गुड होप का चक्कर लगाना पड़ रहा है। यह मार्ग काफी लंबा है। पहले अनुमानित दूरी करीब छह हजार समुद्री मील थी, जो बढ़कर लगभग दस हजार समुद्री मील से अधिक हो गई है। इस कारण यात्रा की अवधि 20 से 25 दिन से बढ़कर 35 से 40 दिन हो गई है। उद्यमी अरुण कुमार माहेश्वरी ने बताया कि शिपिंग कंपनियों को ज्यादा किराया देना पड़ रहा है।
50 से 60 फीसदी व्यापार प्रभावित
चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष यादवेंद्र सचान ने बताया कि केंद्र सरकार के पैकेज से उद्यमियों को राहत मिली है। बिना आपूर्ति रास्ते से लौटने वाले माल का अतिरिक्त भाड़ा नहीं देना पड़ा। अतिरिक्त बीमा और शिपिंग चार्ज से भी राहत मिली है। उन्नाव-कानपुर का चमड़ा निर्यात का 50 से 60 फीसदी व्यापार प्रभावित हुआ है।
विज्ञापन
उन्नाव। पश्चिम एशिया में बिगड़े हालात ने उन्नाव के भी निर्यात व्यापार को झटका दिया है। हालांकि केंद्र सरकार के 497 करोड़ के पैकेज और तीन महीने के लिए पेट्रोकेमिकल उत्पादों से आयात शुल्क समाप्त करने से कुछ राहत मिली है। लेकिन यूरोपीय देशों में पहले आपूर्ति में आई बाधा और अब समुद्री मार्ग की दूरी बढ़ने की वजह से एक महीने में ही व्यापार करीब छह महीने पीछे चला गया है।
उद्यमियों में ताज आलम, असद कमाल, जीएन मिश्रा आदि ने बताया कि अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध से पूरे खाड़ी क्षेत्र में लगातार अस्थिरता का माहौल है और समुद्री यातायात प्रभावित है। बताया कि लाल सागर जैसे प्रमुख शिपिंग मार्गों पर खतरों के कारण, पानी के जहाजों को अब वैकल्पिक रास्तों से निकाला जा रहा है। पहले यूरोपीय देशों के लिए माल लेकर जाने वाले पानी के जहाज स्वेज नहर और लाल सागर से होकर निकलते थे। लेकिन अब इन जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे, केप ऑफ गुड होप का चक्कर लगा कर पहुंचना पड़ रहा है। यह नया मार्ग पहले ही अपेक्षा काफी लंबा है। पहले यह अनुमानित दूरी करीब छह हजार समुद्री मील थी लेकिन केप ऑफ गुड होप का चक्कर लगाने से दूरी बढ़कर लगभग दस समुद्री से अधिक हो गई है। अतिरिक्त दूरी के कारण पहले जो यात्रा 20 से 25 दिन की थी, अब 35 से 40 दिन की हो गई है। उद्यमी अरुण कुमार माहेश्वरी ने बताया कि यूरोप, अमेरिका व अन्य यूरोपीय देशों को निर्यात होने वाले माल को भेजने में शिपिंग कंपनियों को ज्यादा किराया देना पड़ा रहा है। चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष यादवेंद्र सचान ने बताया कि केंद्र सरकार के राहत पैकेज से ये राहत मिली है कि बिना आपूर्ति रास्ते से लौटने वाले माल का अतिरिक्त भाड़ा उद्यमियों को नहीं देना पड़ा और अतिरिक्त बीमा और शिपिंग चार्ज से भी राहत मिली। बताया कि उन्नाव-कानपुर का चमड़ा निर्यात का 50 से 60 फीसदी व्यापार प्रभावित है।
विज्ञापन
उद्यमी ताज आलम, असद कमाल और जीएन मिश्रा ने बताया कि ईरान और अमेरिका-इस्राराइल के बीच युद्ध से खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता है। इससे समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित है। लाल सागर जैसे प्रमुख शिपिंग मार्गों पर खतरे बढ़ गए हैं। इन खतरों के कारण जहाजों को अब वैकल्पिक रास्तों से निकाला जा रहा है। यूरोपीय देशों में पहले आपूर्ति में बाधा आई थी। अब समुद्री मार्ग की दूरी बढ़ने से व्यापार और प्रभावित हुआ है। पहले यूरोपीय देशों के लिए माल स्वेज नहर और लाल सागर से होकर निकलता था। अब जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे, केप ऑफ गुड होप का चक्कर लगाना पड़ रहा है। यह मार्ग काफी लंबा है। पहले अनुमानित दूरी करीब छह हजार समुद्री मील थी, जो बढ़कर लगभग दस हजार समुद्री मील से अधिक हो गई है। इस कारण यात्रा की अवधि 20 से 25 दिन से बढ़कर 35 से 40 दिन हो गई है। उद्यमी अरुण कुमार माहेश्वरी ने बताया कि शिपिंग कंपनियों को ज्यादा किराया देना पड़ रहा है।
विज्ञापन
50 से 60 फीसदी व्यापार प्रभावित
चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष यादवेंद्र सचान ने बताया कि केंद्र सरकार के पैकेज से उद्यमियों को राहत मिली है। बिना आपूर्ति रास्ते से लौटने वाले माल का अतिरिक्त भाड़ा नहीं देना पड़ा। अतिरिक्त बीमा और शिपिंग चार्ज से भी राहत मिली है। उन्नाव-कानपुर का चमड़ा निर्यात का 50 से 60 फीसदी व्यापार प्रभावित हुआ है।
विज्ञापन
उन्नाव। पश्चिम एशिया में बिगड़े हालात ने उन्नाव के भी निर्यात व्यापार को झटका दिया है। हालांकि केंद्र सरकार के 497 करोड़ के पैकेज और तीन महीने के लिए पेट्रोकेमिकल उत्पादों से आयात शुल्क समाप्त करने से कुछ राहत मिली है। लेकिन यूरोपीय देशों में पहले आपूर्ति में आई बाधा और अब समुद्री मार्ग की दूरी बढ़ने की वजह से एक महीने में ही व्यापार करीब छह महीने पीछे चला गया है।
उद्यमियों में ताज आलम, असद कमाल, जीएन मिश्रा आदि ने बताया कि अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध से पूरे खाड़ी क्षेत्र में लगातार अस्थिरता का माहौल है और समुद्री यातायात प्रभावित है। बताया कि लाल सागर जैसे प्रमुख शिपिंग मार्गों पर खतरों के कारण, पानी के जहाजों को अब वैकल्पिक रास्तों से निकाला जा रहा है। पहले यूरोपीय देशों के लिए माल लेकर जाने वाले पानी के जहाज स्वेज नहर और लाल सागर से होकर निकलते थे। लेकिन अब इन जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे, केप ऑफ गुड होप का चक्कर लगा कर पहुंचना पड़ रहा है। यह नया मार्ग पहले ही अपेक्षा काफी लंबा है। पहले यह अनुमानित दूरी करीब छह हजार समुद्री मील थी लेकिन केप ऑफ गुड होप का चक्कर लगाने से दूरी बढ़कर लगभग दस समुद्री से अधिक हो गई है। अतिरिक्त दूरी के कारण पहले जो यात्रा 20 से 25 दिन की थी, अब 35 से 40 दिन की हो गई है। उद्यमी अरुण कुमार माहेश्वरी ने बताया कि यूरोप, अमेरिका व अन्य यूरोपीय देशों को निर्यात होने वाले माल को भेजने में शिपिंग कंपनियों को ज्यादा किराया देना पड़ा रहा है। चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष यादवेंद्र सचान ने बताया कि केंद्र सरकार के राहत पैकेज से ये राहत मिली है कि बिना आपूर्ति रास्ते से लौटने वाले माल का अतिरिक्त भाड़ा उद्यमियों को नहीं देना पड़ा और अतिरिक्त बीमा और शिपिंग चार्ज से भी राहत मिली। बताया कि उन्नाव-कानपुर का चमड़ा निर्यात का 50 से 60 फीसदी व्यापार प्रभावित है।