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दिसंबर से उन्नाव-लखनऊ रूट पर फुल स्पीड से दौड़ेंगी ट्रेनें
ब्यूरो, अमर उजाला,उन्नाव
Updated Sun, 20 Nov 2016 11:58 PM IST
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उन्नाव-सोनिक के बीच रेलवे ट्रैक को ठीक करती बीएमएस मशीन
- फोटो : Amar ujala
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दिसंबर महीने से उन्नाव से लखनऊ के बीच एक्सप्रेस, सुपरफास्ट सहित पैसेंजर ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी। इसके लिए रेलवे का पीडब्ल्यूआई विभाग उन्नाव से लखनऊ के बीच अप व डाउन ट्रैक पर पटरियों की मरम्मत कर रहा है। विभाग ने बीसीएम मशीनें लगाई हैं।
बीते 11 नवंबर से गंगा नदी पर बने रेलवे पुल पर 27 दिनों का मेगा ब्लाक लेकर टर्फ व स्लीपर बदलने का काम हो रहा है। उन्नाव से लखनऊ के बीच खासकर सोनिक स्टेशन तक बीते कुछ दिनों में कई बार रेल ट्रैक फ्रैक्चर के अलावा डिरेल होने की घटनाएं हो चुकी हैं। जानकारी होने पर रेल अधिकारियों लखनऊ से स्टाफ व बैलास्ट क्लीनिंग मशीनों (बीसीएम) को भेजकर ट्रैक की मरम्मत शुरू कराई है। यह मशीनें पटरी पर चलते-चलते ही ट्रैक के नीचे की गिट्टी, मिट्टी, घास व अन्य अनुपयोगी चीजों को बाहर कर देती हैं। वहीं ट्रैक के गैपों को भरने, छोटी व बड़ी गिट्टियों को हटाते हुए आवश्यक आकार की गिट्टियों को ट्रैक में लगाने व ट्रैक में जंपिंग लाने का भी काम करती हैं।
सीनियर सेक्शन इंजीनियर मनोज श्रीवास्तव व राजीव प्रसाद ने बताया कि एक मशीन दो सौ से अधिक गैंगमैनों का काम एक साथ करती है। ट्रैक की मरम्मत के बाद 10 साल तक रेल ट्रैक फ्रैक्चर नहीं रहेगा। मरम्मत कार्य 8 दिसंबर तक पूरा होने के बाद ट्रेनें अपनी पूरी रफ्तार से चल सकेंगी। अधिकारियों की मानें तो शताब्दी एक्सप्रेस देश में कई स्थानों पर फुल स्पीड से चलती है लेकिन उन्नाव से लखनऊ के बीच ट्रैक काफी जर्जर होने के कारण इसे 100 से 110 किमी की स्पीड से ही चलाया जाता था। लेकिन ट्रैक दुरुस्त होने पर यह ट्रेन अपनी फुल स्पीड 140 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेगी। वहीं अन्य ट्रेनों की भी रफ्तार में जबरदस्त इजाफा होगा।
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बीते 11 नवंबर से गंगा नदी पर बने रेलवे पुल पर 27 दिनों का मेगा ब्लाक लेकर टर्फ व स्लीपर बदलने का काम हो रहा है। उन्नाव से लखनऊ के बीच खासकर सोनिक स्टेशन तक बीते कुछ दिनों में कई बार रेल ट्रैक फ्रैक्चर के अलावा डिरेल होने की घटनाएं हो चुकी हैं। जानकारी होने पर रेल अधिकारियों लखनऊ से स्टाफ व बैलास्ट क्लीनिंग मशीनों (बीसीएम) को भेजकर ट्रैक की मरम्मत शुरू कराई है। यह मशीनें पटरी पर चलते-चलते ही ट्रैक के नीचे की गिट्टी, मिट्टी, घास व अन्य अनुपयोगी चीजों को बाहर कर देती हैं। वहीं ट्रैक के गैपों को भरने, छोटी व बड़ी गिट्टियों को हटाते हुए आवश्यक आकार की गिट्टियों को ट्रैक में लगाने व ट्रैक में जंपिंग लाने का भी काम करती हैं।
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सीनियर सेक्शन इंजीनियर मनोज श्रीवास्तव व राजीव प्रसाद ने बताया कि एक मशीन दो सौ से अधिक गैंगमैनों का काम एक साथ करती है। ट्रैक की मरम्मत के बाद 10 साल तक रेल ट्रैक फ्रैक्चर नहीं रहेगा। मरम्मत कार्य 8 दिसंबर तक पूरा होने के बाद ट्रेनें अपनी पूरी रफ्तार से चल सकेंगी। अधिकारियों की मानें तो शताब्दी एक्सप्रेस देश में कई स्थानों पर फुल स्पीड से चलती है लेकिन उन्नाव से लखनऊ के बीच ट्रैक काफी जर्जर होने के कारण इसे 100 से 110 किमी की स्पीड से ही चलाया जाता था। लेकिन ट्रैक दुरुस्त होने पर यह ट्रेन अपनी फुल स्पीड 140 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेगी। वहीं अन्य ट्रेनों की भी रफ्तार में जबरदस्त इजाफा होगा।
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