फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Unnao News ›   Unnao: 14 months in jail without being suffocated

उन्नाव: बिना जुर्म घुट-घुटकर काटे जेल में 14 माह

Thu, 15 Oct 2020 11:18 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 15 Oct 2020 11:18 PM IST
विज्ञापन
Unnao: 14 months in jail without being suffocated
घर में माता पिता के साथ मौजूद 14 माह जेल में रहने वाला निर्दोष प्रमोद कुमार। - फोटो : UNNAO
पेज तीन फ्लायर-
विज्ञापन

फॉलोअप-
फोटो नंबर-19
बिना जुर्म घुट-घुटकर काटे जेल में 14 माह
सब-
जिस युवती की हत्या में जेल भेजा गया था, वह महाराष्ट्र के अहमदनगर में नौकरी करते मिली थी
क्रासर-
पुलिस की गलत विवेचना पर करेंगे कानूनी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी।
उन्नाव। एक पैर से कमजोर बेकसूर प्रमोद को जेल में बिताए 14 माह 14 साल के बराबर लगे। एक-एक दिन उसने घुट-घुटकर बिताए। यही सोचता रहा कि कोई जुर्म न करने पर भी आखिर उसे जेल क्यों भेजा गया। आपबीती बताते हुए प्रमोद और उसके पिता जगदीश की आंखें भर आईं। कहा कि न्याय की लड़ाई में दो कीमती प्लाट बेचने पड़ गए। प्रमोद व उसके पिता ने गलत विवेचना करने वाले पुलिस अफसरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है।
ढाई साल पहले श्रद्धा की हत्या के आरोप में दिव्यांग प्रमोद को 14 माह तक जेल में रहना पड़ा था। वह श्रद्धा महाराष्ट्र में अहमदनगर में नौकरी कर रही थी। घर लौटते समय पुलिस ने उसे कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर पकड़ा था। जुराखनखेड़ा निवासी जगदीश कुमार एक अधिवक्ता के बस्ते पर मुंशी हैं। 8 मार्च 1018 का दिन जगदीश व उसके परिवार के लिए मुसीबत बनकर आया। जगदीश ने बताया कि इसी दिन उसके पड़ोस में रहने वाले योगेंद्र की पत्नी श्रद्धा लापता हुई थी। प्रमोद से योगेंद्र ने 20 हजार रुपये उधार लिए थे। बार-बार मांगने पर उसने विवाद किया था। इसी खुन्नस में योगेंद्र ने एक युवती की लाश की शिनाख्त पत्नी श्रद्धा के रूप में करते हुए प्रमोद पर हत्या कर शव जला देने का आरोप लगाया था।
विज्ञापन

जगदीश कुमार के मुताबिक एक पैर से कमजोर प्रमोद हत्या के बाद शव को आसीवन थाना क्षेत्र ले जाने में अक्षम है। पूछताछ में पुलिस से उसने बार-बार यही बात कही लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई। तीन बहनों और दो भाइयों में प्रमोद तीसरे नंबर का है। शारीरिक रूप से कमजोर होने के बाद भी वह बहनों की शादी और परिवार का खर्च चलाने में पिता का हाथ बंटाने के लिए शेखपुर स्थित शराब मिल में काम करता था। उसके जेल जाने से पूरा परिवार टूट गया। बेटे को न्याय दिलाने के लिए पिता को जमीन बेचनी पड़ी। प्रमोद के जेल जाने पर पिता जगदीश, मां शिवकली, छोटा भाई सुभाष, बहन पूजा, आरती व दिशा का रोकर बुराहाल रहा। समाज में उसे और उसके परिवार को लोगों के ताने और जलालत भी झेलनी पड़ी। प्रमोद ने बताया कि अब वह दही चौकी स्थित एक चर्म इकाई में काम करके, परिवार का भरण पोषण करने में पिता का हाथ बंटा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

--
पिता ने अधिकारियों को दिए 87 प्रार्थना पत्र
प्रमोद कुमार के पिता जगदीश कुमार ने बताया कि बेटे को निर्दोष बताते हुए जेल से छुड़वाने के लिए उसने एसपी, डीजी व मुख्यमंत्री तक 87 प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई। आरोपी बनाए जाने के बाद वह खुद बेटे को लेकर आसीवन थाने गए थे। तब तत्कालीन एसओ सियाराम वर्मा ने बेटे को बैठा लिया और उसे महिला को खोजकर लाने का फरमान सुना दिया। बाद में पुलिस ने बेटे को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया था।

--
एसपी बोले, विवेचना में चूक की होगी जांच
एसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि पुलिस की विवेचना में चूक की जांच कराई जाएगी। हालांकि एक और युवक का नाम आने से विवेचना अभी चल रही है। जेल में बिताए 14 माह तो प्रमोद को वापस नहीं किए जा सकते पर अब कोर्ट में उसकी बेकसूर होने की बात रखते मुकदमे से बरी कराया जाएगा। जलाया गया शव किस युवती का था, श्रद्धा के पति ने पहचान के समय झूठ बोला या गफलत में रहा, अब उससे पूछताछ कर सच सामने लाया जाएगा। श्रद्धा को उसकी मनमुताबिक उसके मायके भेज दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed