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एकता की मिसाल है मजार व शिवमंदिर
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Updated Thu, 15 Dec 2016 12:30 AM IST
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मजार
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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लगभग पांच शताब्दी से भारतीय संस्कृति को समेटे सर्वधर्म संभाव के प्रतीक रहे तकिया मेला पौष के पहले गुरुवार से लगता है। मेला परिसर बाबा सहस्त्रलिंगेश्वर महादेव व ख्याति प्राप्त सूफ ी संत मोहब्बतशाह बाबा की मजार तथा उनके शिष्य न्यामत शाह की मजार भी स्थित है जो हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। मोहब्बतशाह बाबा का कोई प्रामाणिक जन्म स्थान और पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में कोई प्रमाणिक साहित्य उपलब्ध नहीं है। गद्दीधरों के अनुसार, मोहब्बतशाह बाबा उदार व परोपकारी व्यक्ति थे। वह सहस्त्र लिंगेश्वर मंदिर में बैठकर पूजन अर्चन करते थे तथा मस्जिद में नमाज अदा करते थे।
जिले के कवि काका बैसवारी उन्हें मक्का मदीना का मानते थे तो कुछ साहित्यकार बसरा बगदाद बताते हैं। पाटन स्थित तकिया मदरसा के मौलवी इब्राईमरजा के मुताबिक, उनका जन्म हेरात ईराक में हुआ था। जन्म के बारे में कोई प्रमाणिक अभिलेख भले ही उपलब्ध न हो लेकिन उनका अंतिम समय बीघापुर तहसील स्थित तकिया में ही बीता। तकिया के गद्दीधरों की परंपरा के वर्तमान अली हुसैनशाह 18 वें गद्दीधर हैं। गद्दीधरों के अनुसार, मोहब्बत शाह बाबा ने सरगुजा, बंजरिया (बहराईच) कटरा चरखारी, जिंगनी व महुआहार आदि स्थानों पर रुककर भी लोगों को उपदेश दिए। कालांतर में सहस्त्रलिंगेश्वर मंदिर के सामने कुटी बनाकर रहने लगे और उनका अंतकाल भी यहीं हुआ। नवाब आसफ ाउददौला ने भी मोहब्बतशाह बाबा से भेंट की थी जिसका उल्लेख अवध गजेटियर में भी है। मोहब्बतशाह बाबा के बारे में क्षेत्र ही नहीं दूर-दूर तक उनके चमत्कारों की कहानियां प्रचलित हैं। बाबा सहस्त्रलिंगेश्वर की प्रतिदिन आराधना करते थे। आज भी मजार के गद्दीधर उस परंपरा का निर्वाह करते चले आ रहे हैं। सहस्त्रलिंगेश्वर की स्थापना के बारे में कोई भी प्रामाणिक तथ्य उपलब्ध नहीं हैं।
भगवान राम को हुआ था शिवलिंग का दर्शन
गड़रियाखेड़ा निवासी पूर्व शिक्षक रामभजन सिंह ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि वनगमन के समय भगवान राम इसी मार्ग से होकर श्रंगबेरपुर गए थे। रात्रि प्रवास के दौरान राम को स्वप्न में शिवलिंग का दर्शन हुआ था। प्रात:काल होने पर राम ने घने जंगल के बीच स्थित झुरमुटों के बीच इस शिवलिंग का दर्शन किया था। तभी से इस स्थान पर कोई न कोई संत, महात्मा आकर रुकते रहे। वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार पूर्व जिलाधिकारी अरुण आर्या ने कराया था। प्रदेश में तकिया मेला लगभग तीन सौ वर्षों से अपनी ख्याति बनाए हुए है लेकिन इधर कुछ वर्षों से प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है।
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अब तक 18 गद्दीधर हो चुके हैं
पाटन (उन्नाव)। मोहब्बतशाह बाबा में अब तक 18 गद्दीधर हो चुके हैं। इनमें शाकतशाह दीवान, शाह नवदीनशाह, अलादीनशाह, सुक्खाशाह, रहमानशाह, नसीबशाह, उल्फ तशाह, मुसाफि रशाह, मुख्तारशाह, इमामअली शाह, हसनअली शाह, अब्बासअली शाह, असगर शाह व अली हुसैनशाह रहे हैं। इस समय गुलाम हुसैन शाह गद्दी संभाले हुए हैं।
जिले के कवि काका बैसवारी उन्हें मक्का मदीना का मानते थे तो कुछ साहित्यकार बसरा बगदाद बताते हैं। पाटन स्थित तकिया मदरसा के मौलवी इब्राईमरजा के मुताबिक, उनका जन्म हेरात ईराक में हुआ था। जन्म के बारे में कोई प्रमाणिक अभिलेख भले ही उपलब्ध न हो लेकिन उनका अंतिम समय बीघापुर तहसील स्थित तकिया में ही बीता। तकिया के गद्दीधरों की परंपरा के वर्तमान अली हुसैनशाह 18 वें गद्दीधर हैं। गद्दीधरों के अनुसार, मोहब्बत शाह बाबा ने सरगुजा, बंजरिया (बहराईच) कटरा चरखारी, जिंगनी व महुआहार आदि स्थानों पर रुककर भी लोगों को उपदेश दिए। कालांतर में सहस्त्रलिंगेश्वर मंदिर के सामने कुटी बनाकर रहने लगे और उनका अंतकाल भी यहीं हुआ। नवाब आसफ ाउददौला ने भी मोहब्बतशाह बाबा से भेंट की थी जिसका उल्लेख अवध गजेटियर में भी है। मोहब्बतशाह बाबा के बारे में क्षेत्र ही नहीं दूर-दूर तक उनके चमत्कारों की कहानियां प्रचलित हैं। बाबा सहस्त्रलिंगेश्वर की प्रतिदिन आराधना करते थे। आज भी मजार के गद्दीधर उस परंपरा का निर्वाह करते चले आ रहे हैं। सहस्त्रलिंगेश्वर की स्थापना के बारे में कोई भी प्रामाणिक तथ्य उपलब्ध नहीं हैं।
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भगवान राम को हुआ था शिवलिंग का दर्शन
गड़रियाखेड़ा निवासी पूर्व शिक्षक रामभजन सिंह ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि वनगमन के समय भगवान राम इसी मार्ग से होकर श्रंगबेरपुर गए थे। रात्रि प्रवास के दौरान राम को स्वप्न में शिवलिंग का दर्शन हुआ था। प्रात:काल होने पर राम ने घने जंगल के बीच स्थित झुरमुटों के बीच इस शिवलिंग का दर्शन किया था। तभी से इस स्थान पर कोई न कोई संत, महात्मा आकर रुकते रहे। वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार पूर्व जिलाधिकारी अरुण आर्या ने कराया था। प्रदेश में तकिया मेला लगभग तीन सौ वर्षों से अपनी ख्याति बनाए हुए है लेकिन इधर कुछ वर्षों से प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है।
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अब तक 18 गद्दीधर हो चुके हैं
पाटन (उन्नाव)। मोहब्बतशाह बाबा में अब तक 18 गद्दीधर हो चुके हैं। इनमें शाकतशाह दीवान, शाह नवदीनशाह, अलादीनशाह, सुक्खाशाह, रहमानशाह, नसीबशाह, उल्फ तशाह, मुसाफि रशाह, मुख्तारशाह, इमामअली शाह, हसनअली शाह, अब्बासअली शाह, असगर शाह व अली हुसैनशाह रहे हैं। इस समय गुलाम हुसैन शाह गद्दी संभाले हुए हैं।