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Unnao News: जिले की तीन झीलों का होगा कायाकल्प व सुंदरीकरण
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गंजमुरादाबाद (उन्नाव)। जल संचय के लिए भारत सरकार की झीलों का कायाकल्प व सुंदरीकरण कराने की योजना पर जिले में भी काम शुरू किया गया है। इसमें अभी प्रथम चरण में तीन झीलों का चयन किया गया है। इन झीलों की गहरी खोदाई के साथ ही सुंदरीकरण कराए जाने वाले कार्यों का प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है।
पर्यावरण में संतुलन बनाने एवं भूगर्भ जल के रिचार्ज के लिए झीलों की सूरत बदलने की कवायद शुरू की गई है। इसके लिए जिले की तीन बदहाल झीलें चिह्नित की गई हैं। इनमें गंजमुरादाबाद की कुशराजपुर के मजरा भिलोई, भिखारीपुर पतसिया सहित एक अन्य झील को शामिल किया गया है। अब इन झीलों को दुरुस्त किया जाएगा। इसमें कायाकल्प व सुंदरीकरण के कार्य कराए जाएंगे। बताया जाता है कि एक समय था, जब इन झीलों का क्षेत्र काफी बढ़ा रहता था।
झीले पानी से लबालब रहती थीं। धीरे-धीरे जिम्मेदारों की लापरवाही व उदासीनता से झीलें अतिक्रमण का शिकार होकर संकुचित होती चली गईं। साथ ही अपना पुराना स्वरूप भी खोने लगीं। क्षेत्र घटता गया तो झीलों में पानी लाने वाले मुहाने भी बंद होने की कगार पर पहुंच गए। इससे भूगर्भ जलस्तर पर भी असर पड़ा। अब केंद्र सरकार ने झीलों को पुराने स्वरूप में लाने की कवायद शुरू की है। इसके तहत झीलों का कायाकल्प कराया जाना है।
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यह होंगे कार्य
-चिह्नित झील में पहले पानी ठहराने के इंतजाम होंगे।
-झील में पानी पहुंचे और रुके, इसके लिए मुहाने दुरुस्त होंगे।
-मुहाने पर अतिक्रमण को हटाया जाएगा।
-झील की सफाई के साथ गहरी खोदाई होगी।
-झील के चारों तरफ मेड़बंदी के साथ पौधरोपण होगा।
-सुंदरता के लिए किनारों पर पार्कनुमा फुलवारी तैयार की जाएगी।
-कायाकल्प होने के बाद झील से भूगर्भ जल को रिचार्ज करने में मदद मिलेगी।
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भारत सरकार से आए पत्र के आधार पर तीन झीलों का चयन किया गया है। इन झीलों का कायाकल्प कराया जाएगा। परिसर के आसपास सुंदरीकरण कार्य भी कराए जाएंगे। प्रस्तावित कार्यों के प्रस्ताव तैयार कराकर केंद्र सरकार को भेज दिया जाएगा। -मुनेश चंद्र, मनरेगा उपायुक्त
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पर्यावरण में संतुलन बनाने एवं भूगर्भ जल के रिचार्ज के लिए झीलों की सूरत बदलने की कवायद शुरू की गई है। इसके लिए जिले की तीन बदहाल झीलें चिह्नित की गई हैं। इनमें गंजमुरादाबाद की कुशराजपुर के मजरा भिलोई, भिखारीपुर पतसिया सहित एक अन्य झील को शामिल किया गया है। अब इन झीलों को दुरुस्त किया जाएगा। इसमें कायाकल्प व सुंदरीकरण के कार्य कराए जाएंगे। बताया जाता है कि एक समय था, जब इन झीलों का क्षेत्र काफी बढ़ा रहता था।
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झीले पानी से लबालब रहती थीं। धीरे-धीरे जिम्मेदारों की लापरवाही व उदासीनता से झीलें अतिक्रमण का शिकार होकर संकुचित होती चली गईं। साथ ही अपना पुराना स्वरूप भी खोने लगीं। क्षेत्र घटता गया तो झीलों में पानी लाने वाले मुहाने भी बंद होने की कगार पर पहुंच गए। इससे भूगर्भ जलस्तर पर भी असर पड़ा। अब केंद्र सरकार ने झीलों को पुराने स्वरूप में लाने की कवायद शुरू की है। इसके तहत झीलों का कायाकल्प कराया जाना है।
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यह होंगे कार्य
-चिह्नित झील में पहले पानी ठहराने के इंतजाम होंगे।
-झील में पानी पहुंचे और रुके, इसके लिए मुहाने दुरुस्त होंगे।
-मुहाने पर अतिक्रमण को हटाया जाएगा।
-झील की सफाई के साथ गहरी खोदाई होगी।
-झील के चारों तरफ मेड़बंदी के साथ पौधरोपण होगा।
-सुंदरता के लिए किनारों पर पार्कनुमा फुलवारी तैयार की जाएगी।
-कायाकल्प होने के बाद झील से भूगर्भ जल को रिचार्ज करने में मदद मिलेगी।
भारत सरकार से आए पत्र के आधार पर तीन झीलों का चयन किया गया है। इन झीलों का कायाकल्प कराया जाएगा। परिसर के आसपास सुंदरीकरण कार्य भी कराए जाएंगे। प्रस्तावित कार्यों के प्रस्ताव तैयार कराकर केंद्र सरकार को भेज दिया जाएगा। -मुनेश चंद्र, मनरेगा उपायुक्त