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सामूहिक विवाह से जिले में बहेगी सांप्रदायिक सौहार्द की ‘हवा’
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उन्नाव। दिसंबर के पहले हफ्ते में जिले में सांप्रदायिक सौहार्द की ‘हवा’ बहेगी। मौका होगा मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का। जिलेस्तर पर एक साथ 700 सामूहिक विवाह कराने का लक्ष्य दिया गया है। अब तक 321 पंजीकरण हो चुके हैं।
2017 में योगी सरकार ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत एक स्थान पर कई जोड़ों का सामूहिक रूप से विवाह कराया जाता है। जोड़ों में हिंदू के साथ-साथ मुस्लिम भी होते हैं। इसलिए एक ही स्थान पर एक तरफ हिंदू मंडप और दूसरी ओर मुस्लिम निकाह के लिए अलग व्यवस्था की जाती है। जिससे विवाह
परिसर में एक तरफ वैदिक मंत्रों की गूंज होती है तो दूसरी तरफ कुबूल है की आवाज सुनाई देती है। जिला समाज कल्याण अधिकारी नीलम सिंह ने बताया कि सामूहिक विवाह के लिए ब्लाक और नगरीय निकायों में आवेदन जमा होने शुरू हो गए हैं। शासन से अभी तारीख निर्धारित नहीं की गई है। फिर भी स्थानीयस्तर पर अन्य तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
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मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में एक विवाह पर सरकार 51 हजार रुपये खर्च करेगी। इसमें 35 हजार रुपये कन्या के खाते में डाले जाएंगे। 10 हजार के कपड़े, पायल, बर्तन व वस्त्र दिया जाएगा। शेष 6 हजार रुपये पंडाल और खाने-पीने में खर्च होगा। जिला समाज कल्याण अधिकारी के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन कराने वालों में हिंदू के साथ-साथ मुस्लिम वर्ग के लोग भी हैं।
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2017 में योगी सरकार ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत एक स्थान पर कई जोड़ों का सामूहिक रूप से विवाह कराया जाता है। जोड़ों में हिंदू के साथ-साथ मुस्लिम भी होते हैं। इसलिए एक ही स्थान पर एक तरफ हिंदू मंडप और दूसरी ओर मुस्लिम निकाह के लिए अलग व्यवस्था की जाती है। जिससे विवाह
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परिसर में एक तरफ वैदिक मंत्रों की गूंज होती है तो दूसरी तरफ कुबूल है की आवाज सुनाई देती है। जिला समाज कल्याण अधिकारी नीलम सिंह ने बताया कि सामूहिक विवाह के लिए ब्लाक और नगरीय निकायों में आवेदन जमा होने शुरू हो गए हैं। शासन से अभी तारीख निर्धारित नहीं की गई है। फिर भी स्थानीयस्तर पर अन्य तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
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मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में एक विवाह पर सरकार 51 हजार रुपये खर्च करेगी। इसमें 35 हजार रुपये कन्या के खाते में डाले जाएंगे। 10 हजार के कपड़े, पायल, बर्तन व वस्त्र दिया जाएगा। शेष 6 हजार रुपये पंडाल और खाने-पीने में खर्च होगा। जिला समाज कल्याण अधिकारी के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन कराने वालों में हिंदू के साथ-साथ मुस्लिम वर्ग के लोग भी हैं।