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Unnao News: महिला से दुष्कर्म करने वाले को 10 साल की सजा
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उन्नाव। महिला से दुष्कर्म करने के 20 साल पुराने मामले में कोर्ट ने दोषी को 10 साल की सजा सुनाई है। दो आरोपियों की मौत हो चुकी है। दोषी पर 24 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
सफीपुर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र देकर बताया था कि उसका पति माखी थानाक्षेत्र के एक गांव में रहकर प्राइवेट नौकरी करता है। तीन अप्रैल 2004 को रात करीब आठ बजे वह बच्चों के साथ घर में थी। इसी दौरान गांव के तीन लोग घर में घुसे और असलहे लगाकर उसे जान से मारने की धमकी देकर दुष्कर्म किया। पीड़िता के अनुसार, उसने शोर मचाने का प्रयास किया तो उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया।
इसके बाद गाली गलौज की और जान से मारने की धमकी देकर भाग गए। घटना के अगले दिन सुबह पति को घटना की जानकारी दी और रिपोर्ट दर्ज कराने कोतवाली गई लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की और टालमटोल करती रही। इसके बाद उसने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया और न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ दुष्कर्म, मारपीट, जान से मारने की धमकी सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की।
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मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही दो आरोपियों की मौत हो गई। गुरुवार को मुकदमे की सुनवाई एससी/एसटी स्पेशल न्यायालय में पूरी हुई। विशेष लोक अभियोजक जगन्नाथ कुशवाहा की दलीलों, साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोषी को को न्यायाधीश डॉ. सत्यवान सिंह ने 10 साल कैद की सजा सुनाई। उस पर अर्थदंड भी लगाया।
मारपीट के चार दोषियों को पांच साल की सजा
उन्नाव। हसनगंज कोतवाली क्षेत्र के नेवलगंज गांव निवासी मन्नालाल ने सात मार्च 2015 को कोतवाली में तहरीर देकर गांव के ही अशोक, दौलत, शिव कुमार और ओमप्रकाश के खिलाफ मारपीट और दांत से काटकर घायल करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने नाली का पानी निकालने के विवाद में उसके साथ गाली-गलौज की और विरोध करने पर पीटा। चेहरे व शरीर के अन्य हिस्सों में दांत से काट कर घायल किया। पुलिस ने चारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। घटना की जांच के बाद तत्कालीन उपनिरीक्षक कुलदीप सिंह ने 10 मई 2015 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। गुरुवार को मामले की सुनवाई पूरी हुई। अभियोजन पक्ष से जिला शासकीय अधिवक्ता अनिल त्रिपाठी ने पैरवी की और उनकी दलीलों और साक्ष्यों के आधार पर दोष साबित होने पर जिला जज प्रतिमा श्रीवास्तव ने चारों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई। (संवाद)
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सफीपुर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र देकर बताया था कि उसका पति माखी थानाक्षेत्र के एक गांव में रहकर प्राइवेट नौकरी करता है। तीन अप्रैल 2004 को रात करीब आठ बजे वह बच्चों के साथ घर में थी। इसी दौरान गांव के तीन लोग घर में घुसे और असलहे लगाकर उसे जान से मारने की धमकी देकर दुष्कर्म किया। पीड़िता के अनुसार, उसने शोर मचाने का प्रयास किया तो उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया।
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इसके बाद गाली गलौज की और जान से मारने की धमकी देकर भाग गए। घटना के अगले दिन सुबह पति को घटना की जानकारी दी और रिपोर्ट दर्ज कराने कोतवाली गई लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की और टालमटोल करती रही। इसके बाद उसने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया और न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ दुष्कर्म, मारपीट, जान से मारने की धमकी सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की।
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मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही दो आरोपियों की मौत हो गई। गुरुवार को मुकदमे की सुनवाई एससी/एसटी स्पेशल न्यायालय में पूरी हुई। विशेष लोक अभियोजक जगन्नाथ कुशवाहा की दलीलों, साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोषी को को न्यायाधीश डॉ. सत्यवान सिंह ने 10 साल कैद की सजा सुनाई। उस पर अर्थदंड भी लगाया।
मारपीट के चार दोषियों को पांच साल की सजा
उन्नाव। हसनगंज कोतवाली क्षेत्र के नेवलगंज गांव निवासी मन्नालाल ने सात मार्च 2015 को कोतवाली में तहरीर देकर गांव के ही अशोक, दौलत, शिव कुमार और ओमप्रकाश के खिलाफ मारपीट और दांत से काटकर घायल करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने नाली का पानी निकालने के विवाद में उसके साथ गाली-गलौज की और विरोध करने पर पीटा। चेहरे व शरीर के अन्य हिस्सों में दांत से काट कर घायल किया। पुलिस ने चारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। घटना की जांच के बाद तत्कालीन उपनिरीक्षक कुलदीप सिंह ने 10 मई 2015 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। गुरुवार को मामले की सुनवाई पूरी हुई। अभियोजन पक्ष से जिला शासकीय अधिवक्ता अनिल त्रिपाठी ने पैरवी की और उनकी दलीलों और साक्ष्यों के आधार पर दोष साबित होने पर जिला जज प्रतिमा श्रीवास्तव ने चारों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई। (संवाद)