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विद्यालयों में नहीं पहुंच रहीं डाक्टरों की टीमें
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Thu, 26 Mar 2015 11:34 PM IST
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उन्नाव। परिषदीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना केवल कागजों पर ही संचालित की जा रही है। विद्यालयों में टीमें नहीं पहुंच रही हैं। यदि कहीं किसी विद्यालय में बच्चों के बीमार होने की सूचना मिलती है उसके बाद ही टीम एक्टिव होती है।
जिले में संचालित 2039 प्राथमिक व 803 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का हर महीने स्वास्थ्य परीक्षण किया जाना है। इससे यह पता चल सकेगा कि बच्चे में कौन सी बीमारी है। यदि बच्चे का इलाज विद्यालय में दवा देने से ही हो सकता है तो ठीक है अन्यथा उसको क्षेत्र की सीएचसी या पीएचसी ले जाकर इलाज कराना है।
उसके बाद भी यदि बच्चा ठीक नहीं होता है तो जिला अस्पताल लाकर इलाज कराया जाना है। सभी जगह बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण व इलाज मुफ्त होना है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। विकासखंड गंजमुरादाबाद, बांगरमऊ व बीघापुर क्षेत्र में संचालित परिषदीय विद्यालयों की स्थिति तो यह है कि चार-चार महीने बीत गए स्वास्थ्य टीम पहुंची ही नहीं।
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ऐसे में इन विकासखंडों में संचालित विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं में कौन सी बीमारी है इसका पता नहीं लग पाता। बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण हो रहा है कि नहीं यह तो दूर की बात है लेकिन सीएमओ कार्यालय से शासन को जांच रिपोर्ट लगातार भेजी जा रही है।
क्या बोले जिम्मेदार
सीएमओ डॉ. गीता यादव ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है। विद्यालयों का ग्राफ बड़ा होने के कारण हर महीने स्वास्थ्य परीक्षण नहीं हो पाता। लेकिन तीन महीनों में टीम विद्यालय पहुंच जाती है। विद्यालय में दवाओं की किट का भी वितरण किया जाता है। फिर भी यदि कोई ऐसा विद्यालय है तो वहां टीम भेजी जाएगी।
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जिले में संचालित 2039 प्राथमिक व 803 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का हर महीने स्वास्थ्य परीक्षण किया जाना है। इससे यह पता चल सकेगा कि बच्चे में कौन सी बीमारी है। यदि बच्चे का इलाज विद्यालय में दवा देने से ही हो सकता है तो ठीक है अन्यथा उसको क्षेत्र की सीएचसी या पीएचसी ले जाकर इलाज कराना है।
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उसके बाद भी यदि बच्चा ठीक नहीं होता है तो जिला अस्पताल लाकर इलाज कराया जाना है। सभी जगह बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण व इलाज मुफ्त होना है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। विकासखंड गंजमुरादाबाद, बांगरमऊ व बीघापुर क्षेत्र में संचालित परिषदीय विद्यालयों की स्थिति तो यह है कि चार-चार महीने बीत गए स्वास्थ्य टीम पहुंची ही नहीं।
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ऐसे में इन विकासखंडों में संचालित विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं में कौन सी बीमारी है इसका पता नहीं लग पाता। बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण हो रहा है कि नहीं यह तो दूर की बात है लेकिन सीएमओ कार्यालय से शासन को जांच रिपोर्ट लगातार भेजी जा रही है।
क्या बोले जिम्मेदार
सीएमओ डॉ. गीता यादव ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है। विद्यालयों का ग्राफ बड़ा होने के कारण हर महीने स्वास्थ्य परीक्षण नहीं हो पाता। लेकिन तीन महीनों में टीम विद्यालय पहुंच जाती है। विद्यालय में दवाओं की किट का भी वितरण किया जाता है। फिर भी यदि कोई ऐसा विद्यालय है तो वहां टीम भेजी जाएगी।