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ग्राम शिक्षा निधि के खाते का शिक्षक नेता मांग रहे हिसाब

Sun, 22 Mar 2015 11:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव Updated Sun, 22 Mar 2015 11:24 PM IST
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Teacher leaders are demanding calculation
उन्नाव/अचलगंज। परिषदीय विद्यालयों में संचालित ग्राम शिक्षा निधि के खाते से बीएसए की ओर से मांगे गए रुपये का शिक्षक नेता हिसाब मांग रहे हैं। शिक्षक नेताओं का कहना है कि हम लोगाें से पैसा मांग लिया गया लेकिन वह कहां लगाया गया इसकी कोई जानकारी हमें नहीं दी गई। पैसा न होने से परीक्षाएं कराने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
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जिले में संचालित 2039 प्राथमिक व 803 उच्च प्राथमिक विद्यालय में ग्राम शिक्षा निधि खाते संचालित हैं। इन खातों में प्रति वर्ष विकास अनुदान के रूप में प्राथमिक विद्यालय में पांच हजार रुपये, उच्च प्राथमिक विद्यालय में सात हजार रुपये के अलावा टीएलएम का पांच सौ रुपये तथा शिक्षामित्राें का मानदेय आता था।
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पिछले वर्ष से ग्राम शिक्षा निधि में शिक्षामित्रों के मानदेय को छोड़कर अन्य बजट आना बंद हो गया है। अब यह पैसा विद्यालय प्रबंधक समिति के खाते में भेजा जा रहा है। पिछले वर्ष तक ग्राम शिक्षा निधि में जो भी बजट पड़ा हुआ था बीएसए अब उसकी डीडी बनवाकर पैसा अपने खाते में पैसा हस्तांतरित करा रहे हैं।
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जबकि शिक्षक नेताओं का कहना है कि यह पैसा वापस लेने के लिए टीचरों को कोई भी लिखित आदेश नहीं दिया गया है। शिक्षक नेताओं की माने तो सभी परिषदीय विद्यालयों के ग्राम शिक्षा निधि के खाते में पड़े पैसे को जोड़ा जाए तो धन करोड़ों में निकलेगा। इस पैसे को कहां लगाया जाएगा इसकी जानकारी हम लोगों को नहीं दी गई।

वित्तीय वर्ष में ही खर्च करना पड़ता है धन
उन्नाव। ग्राम शिक्षा निधि में जो भी धन आता है उसे उसी वित्तीय वर्ष में खर्च करना पड़ता है। उप्र जूनियर हाई प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री अनुपम मिश्रा व अलचगंज ब्लॉक अध्यक्ष सुरेश रावत की माने तो मार्च कभी भी पैसा समय से नहीं आता इससे वह खाते में ही पड़ा रहता है। वित्तीय वर्ष बीत जाने के बाद उस धन का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। यदि खाते में पैसा पड़ा भी होता है तो टीचर को यह अधिकार नहीं दिया गया है कि वह इसका प्रयोग कर सके। इसलिए कई ऐसे विद्यालय हैं जिसमें 25 से 30 हजार रुपये तक बजट पड़ा हुआ है।

बजट वापस लेकर बच्चों की शिक्षा के साथ हुआ खिलवाड़
उन्नाव। कुरमापुर गांव के ग्राम प्रधान शैलेश शुक्ला की माने तो धोखे में रहकर यह पैसा निकाला गया है। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वजीफा बढ़ा हुआ पड़ा था वही पैसा बाहर निकाला जा रहा है। जबकि पिछले वर्ष वजीफा आया ही नहीं यदि ग्राम शिक्षा निधि के खाते में पैसा होता तो बच्चों को परीक्षा देने में दिक्क्तें न आतीं। उन्हें अपने घर से उत्तर पुस्तिकाएं न लानी पड़तीं। इससे तो बच्चाें की शिक्षा के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है।

क्या बोले जिम्मेदार
बीएसए कार्यालय के सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी अनूप सिंह ने बताया कि यह पैसा डायरेक्टर के निर्देश पर वापस मंगाया जा रहा है। बाद में इस पैसे का क्या किया जाएगा इसकी जानकारी हमें भी नहीं है।

बीएसए डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि शिक्षक नेता हमसे आदेश मांगे मैं दूंगा। पैसा मुझे अपने घर नहीं ले जाना है। शासन के जो निर्देश हैं उसी आधार पर काम किया जा रहा है।
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