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Unnao News: जायद फसलों की पैदावार बढ़ाने के बताए गए तरीके
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संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। मोतीनगर स्थित नार्मल स्कूल मैदान में चल रहे तीन दिवसीय किसान मेले का रविवार को समापन हो गया। अंतिम दिन किसानों को जायद सीजन की फसलों की बुआई करने और पैदावार बढ़ाने के तरीके बताए गए।
उप कृषि निदेशक डाॅ. मुकुल तिवारी व जिला कृषि अधिकारी कुलदीप मिश्रा ने बताया कि जायद सीजन की फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग जरूरी है। बताया कि सुनिश्चित सिंचाई साधन वाले क्षेत्रों में आलू, गन्ना, मटर तथा राई/सरसों के खाली खेतों में जायद की फसलें लेना उपयुक्त रहता है। इसके अतिरिक्त बसंतकालीन गन्ना के खेतों को भी जायद की सह-फसली खेती के लिए चुना जा सकता है।
उपकृषि निदेशक ने बताया कि जायद सीजन में खरीफ फसल के लिए मृदा नमूने एकत्रित कर विश्लेषित कराने का सर्वोत्तम समय है। अधिकांश क्षेत्रों में धान व गेहूं का फसल चक्र अपनाने से भूमि में जीवांश की मात्रा धीरे, धीरे कम होती जा रही है। ऐसे क्षेत्रों में गेहूं की कटाई के बाद क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने पर हरी खाद के लिए ढैंचा की बुआई भी की जा सकती है। यूपी डास्प जिला परियोजना समन्वयक डॉ. राजीव वर्मा ने बताया कि जैविक खेती के बारे में जानकारी दी।
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उन्नाव। मोतीनगर स्थित नार्मल स्कूल मैदान में चल रहे तीन दिवसीय किसान मेले का रविवार को समापन हो गया। अंतिम दिन किसानों को जायद सीजन की फसलों की बुआई करने और पैदावार बढ़ाने के तरीके बताए गए।
उप कृषि निदेशक डाॅ. मुकुल तिवारी व जिला कृषि अधिकारी कुलदीप मिश्रा ने बताया कि जायद सीजन की फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग जरूरी है। बताया कि सुनिश्चित सिंचाई साधन वाले क्षेत्रों में आलू, गन्ना, मटर तथा राई/सरसों के खाली खेतों में जायद की फसलें लेना उपयुक्त रहता है। इसके अतिरिक्त बसंतकालीन गन्ना के खेतों को भी जायद की सह-फसली खेती के लिए चुना जा सकता है।
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उपकृषि निदेशक ने बताया कि जायद सीजन में खरीफ फसल के लिए मृदा नमूने एकत्रित कर विश्लेषित कराने का सर्वोत्तम समय है। अधिकांश क्षेत्रों में धान व गेहूं का फसल चक्र अपनाने से भूमि में जीवांश की मात्रा धीरे, धीरे कम होती जा रही है। ऐसे क्षेत्रों में गेहूं की कटाई के बाद क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने पर हरी खाद के लिए ढैंचा की बुआई भी की जा सकती है। यूपी डास्प जिला परियोजना समन्वयक डॉ. राजीव वर्मा ने बताया कि जैविक खेती के बारे में जानकारी दी।
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