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स्टोर में दवाएं, बाहर की पर्चियां लिख रहे डॉक्टर
अमर उजाला, उन्नाव
Updated Sun, 14 Feb 2016 12:41 AM IST
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जिला अस्पताल के स्टोर रूम में दवाएं मौजूद होने के बाद भी ओपीडी कर रहे डॉक्टर मरीजों को बाहर से दवाएं लिख रहे हैं। कमीशन के खेल जिला अस्पताल में धड़ल्ले से चल रहा है। महंगी दवाएं तो दूर जुकाम-बुखार तक की दवा बाहर से लिखी जा रही है।
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केस- 01
मरीज का नाम- नदीम
उम्र- 09 साल
निवासी- दारापुर बांगरमऊ
बांगरमऊ के दारापुर निवासी नदीम(9)पुत्र जहीर को बुखार आने पर पिता ने उसे जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया था। यहां डॉक्टर ने उसे दिमागी बुखार बताया और सिर्फ एक सीरप ही अस्पताल से दी बाकी दवाएं बाहर से लिख दीं। इसमें (ओकास्टमएल, किडफ्लू डीएम, डेफ्लाटोप व इंजेक्शन ओक्स सैफेट) बाहर से लिख दिया। उसके मुताबिक यह दवाएं उसे मेडिकल स्टोर संचालक ने चार सौ रुपये की दीं। जहीर ने बताया कि वह दो दिनों से बाहर से ही दवाएं जा ला रहा है।
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केस - 02
मरीज का नाम- निहारिका
उम्र- 06 साल
निवासी- आदर्श नगर कोतवाली
आदर्श नगर मोहल्ले में रहने वाली निहारिका को परिजनों ने बुखार आने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया। भर्ती होने के बाद अस्पताल से उसे सिर्फ ग्लूकोज की बोतल लगा दी गई। बाकी की दवाओं में (स्नोगेट सीरप, नूडाग्स सीरप, एफकोलो व रेजीहेप्पो) को लाने के लिए डॉक्टर ने बाहर से पर्चा लिख दिया।
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सेटिंग की कं पनियों की ही डॉक्टर लिखते हैं दवाएं
मेडिकल स्टोर संचालक रवी मिश्रा, पवन, सुरेश ने बताया कि अस्पताल में तैनात डॉक्टर जो भी दवाएं बाहर से लिखते हैं उन दवाओं में उनका 35 से 60 प्रतिशत तक कमीशन होता है। दर्द, गैस, उल्टी, एंटीबायोटिक की दवाओं के अलावा कई ऐसे इंजेक्शन हैं जो जिला अस्पताल में मौजूद हैं लेकिन वह बाहर से लिखे जाते हैं। इतना ही नहीं एक मरीज यदि बीमार होने पर यदि उसने अस्पताल के दो अलग-अलग डॉक्टरों को दिखाया तो वह दोनो डॉक्टर अपनी-अपनी सेटिंग की कंपनियों की दवाएं लिखेंगे। मरीजों को उससे फायदा मिलता है कि नहीं उनसे नहीं मतलब।
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स्टोर में यह हैं दवाएं, फिर भी मेडिकल स्टोर जा रहे पर्चे
जिला अस्पताल के स्टोर रूम में (ड्राई सीरप एम्क्सोस्लीन, एस्लोफेनिक टेबलेट, एस्लोफेनिक इंजेक्शन, एल्फाकेल्कोडाल कैल्शियम कैप्सूल, एमाइकासीन इंजेक्शन, डेक्सामेथासोन इंजेक्शन, डायजेपॉम इंजेक्शन, डाइक्लोफेनिक इंजेक्शन, फेल्कोनाजेल टैबलेट) के अलावा अन्य ऐसी दवाएं हैं जो स्टोर रूम में हैं लेकिन पर्चे में बाहर से लिखी जा रही हैं।
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क्या बोले सीएमएस
सीएमएस डॉ. एसपी चौधरी ने बताया कि कभी-कभी दो मेल की दवाएं आ जाती हैं। जिसमें एक ओपीडी में रखवाई जाती है दूसरी स्टोर में रहती है। दवाएं ओपीडी में हैं यदि मरीजों को बाहर से लिखी जा रही हैं तो वह आकर शिकायत करें। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।