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Unnao News: वरिष्ठ लिपिक की 22 साल बाद गई नौकरी
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न्यायालय ने वरिष्ठ नियुक्ति को पाया अनियमित, सेवा समाप्ति का आदेश
शहर के रानी लक्ष्मीबाई स्कूल में है कार्यरत
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। बालिका इंटर कॉलेज में 22 साल से तैनात वरिष्ठ लिपिक की नियुक्ति को न्यायालय ने अनियमित पाया है। न्यायालय ने सेवा समाप्ति का आदेश दिया है। वरिष्ठ लिपिक इसी कॉलेज की प्रधानाचार्या के भाई हैं। अनियमित नियुक्ति और टाइपिंग में अक्षम पाए जाने पर यह आदेश दिया है।
शहर के रानी लक्ष्मीबाई कन्या विद्यालय इंटर कॉलेज में तैनात वरिष्ठ लिपिक पंकज श्रीवास्तव की 2000 में तैनाती हुई थी। नियमानुसार नियुक्ति न होने पर तत्कालीन डीआईओएस ने इस पर सहमति नहीं दी थी। इस पर वरिष्ठ लिपिक ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। याचिका की सुनवाई करते हुए उसी समय न्यायालय ने वेतन जारी करने का आदेश दे दिया था।
2018 में विद्यालय प्रबंध समिति ने वरिष्ठ लिपिक का टाइपिंग टेस्ट लिया तो वह फेल हो गए थे, जबकि वरिष्ठ लिपिक के अधिवक्ता केडी नाग ने न्यायालय में शपथ पत्र देकर कहा कि वरिष्ठ लिपिक टाइप में दक्ष हैं। इस पर न्यायाधीश ने न्यायालय में ही उनसे टाइपिंग कराई तो वह नहीं कर पाए।
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प्रबंध समिति के अधिवक्ता रोहित त्रिपाठी ने न्यायालय को बताया कि वरिष्ठ लिपिक जिस स्कूल में तैनात हैं उसी में उनकी बहन प्रधानाचार्या हैं, इस लिए उनकी नियुक्ति विधि विरुद्ध है। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंड पीठ की कोर्ट संख्या आठ के न्यायाधीश सरल श्रीवास्तव ने वरिष्ठ लिपिक की सेवा समाप्त करने का आदेश दिया है। डीआईओएस एसपी सिंह ने बताया कि न्यायालय का आदेश अभी देखा नहीं है, जानकारी की जाएगी।
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शहर के रानी लक्ष्मीबाई स्कूल में है कार्यरत
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। बालिका इंटर कॉलेज में 22 साल से तैनात वरिष्ठ लिपिक की नियुक्ति को न्यायालय ने अनियमित पाया है। न्यायालय ने सेवा समाप्ति का आदेश दिया है। वरिष्ठ लिपिक इसी कॉलेज की प्रधानाचार्या के भाई हैं। अनियमित नियुक्ति और टाइपिंग में अक्षम पाए जाने पर यह आदेश दिया है।
शहर के रानी लक्ष्मीबाई कन्या विद्यालय इंटर कॉलेज में तैनात वरिष्ठ लिपिक पंकज श्रीवास्तव की 2000 में तैनाती हुई थी। नियमानुसार नियुक्ति न होने पर तत्कालीन डीआईओएस ने इस पर सहमति नहीं दी थी। इस पर वरिष्ठ लिपिक ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। याचिका की सुनवाई करते हुए उसी समय न्यायालय ने वेतन जारी करने का आदेश दे दिया था।
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2018 में विद्यालय प्रबंध समिति ने वरिष्ठ लिपिक का टाइपिंग टेस्ट लिया तो वह फेल हो गए थे, जबकि वरिष्ठ लिपिक के अधिवक्ता केडी नाग ने न्यायालय में शपथ पत्र देकर कहा कि वरिष्ठ लिपिक टाइप में दक्ष हैं। इस पर न्यायाधीश ने न्यायालय में ही उनसे टाइपिंग कराई तो वह नहीं कर पाए।
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प्रबंध समिति के अधिवक्ता रोहित त्रिपाठी ने न्यायालय को बताया कि वरिष्ठ लिपिक जिस स्कूल में तैनात हैं उसी में उनकी बहन प्रधानाचार्या हैं, इस लिए उनकी नियुक्ति विधि विरुद्ध है। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंड पीठ की कोर्ट संख्या आठ के न्यायाधीश सरल श्रीवास्तव ने वरिष्ठ लिपिक की सेवा समाप्त करने का आदेश दिया है। डीआईओएस एसपी सिंह ने बताया कि न्यायालय का आदेश अभी देखा नहीं है, जानकारी की जाएगी।