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Unnao News: 76 करोड़ की पंप कैनाल में घपला, काम पूरा होने से पहले फर्श धंसी

Sat, 01 Feb 2025 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 01 Feb 2025 11:39 PM IST
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Scam in pump canal worth Rs 76 crore, floor caved in before completion of work
तकनीकी टीम के साथ जांच करते सीडीओ। - फोटो : तकनीकी टीम के साथ जांच करते सीडीओ।
उन्नाव। 76 करोड़ की डलमऊ-बी पंप कैनाल परियोजना के निर्माण में बड़े पैमाने पर घपला सामने आया है। सांसद की शिकायत पर तकनीकी टीम के साथ जांच करने पहुंचे सीडीओ को यहां कंक्रीट, लिंटर, सीमेंट मानक के अनुरूप नहीं मिली। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता खराब होने से काम पूरा होने से पहले फर्श भी कई जगह धंस गई। पांच करोड़ से अधिक लागत के काम में आईआईटी से जांच कराने का नियम होने के बाद भी एचबीटीयू कानपुर से जांच कराकर सैंपल पास कराए गए। सीडीओ ने सैंपल सील कराए और आईआईटी से जांच कराने के आदेश दिए हैं। वहीं सांसद की शिकायत पर डीएम ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है।उन्होंने जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही।
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किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के लिए बीघापुर तहसील के डौंडियाखेड़ा में चौधरी चरण सिंह डलमऊ-बी पंप नहर परियोजना से निर्माण चल रहा है। परियोजना पर 76 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वर्ष 2023 से परियोजना में पुल पुलियों के साथ पंप हाउस, भवन का निर्माण, बिजली और यांत्रिक कार्य कराए जा रहे हैं। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) है।
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सांसद साक्षी महाराज ने अक्तूबर 2024 में डीएम को पत्र भेजकर पंप कैनाल की गुणवत्ता पर संदेह जताते हुए जांच कराने को कहा था। डीएम ने सीडीओ प्रेम प्रकाश मीणा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति में पीडब्ल्यूडी एक्सईएन और शारदा नहर खंड के एक्सईएन को शामिल किया था। शनिवार को सीडीओ टीम के साथ जांच करने पहुंचे। कई जगह फर्श धंसी मिली। दीवार, छत में भी मानकों की अनदेखी नजर आई। कुएं और बड़े-बड़े वजनी पंप के लायक लिंटर नहीं पाए गए।
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सीडीओ ने यूपीपीसीएल के इंजीनियरों से निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच की जानकारी ली तो बताया गया कि एचबीटीयू कानपुर से जांच कराई गई है। इस पर सीडीओ ने इसे शासनादेश का उल्लंघन बताते हुए नाराजगी जताई। बताया कि पांच करोड़ से अधिक लागत के निर्माण में आईआईटी से जांच कराने का शासनादेश है तो यहां 76 करोड़ के काम में एचबीटीयू से जांच क्यों कराई गई। उन्होंने तकनीकी टीम से निर्माण सामग्री का नमूना भरवाया और आईआईटी कानपुर से सिविल वर्क, पंप, पाइपलाइन एवं पूरे हाइड्रोलिक सिस्टम की विस्तृत जांच कराने के आदेश दिया।
सीडीओ ने बताया कि काम पूरा करने की समय सीमा मार्च 2025 है और अप्रैल से नहर में 300 क्यूसेक पानी छोड़ना है। लेकिन काम की रफ्तार से समय पर पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। सैंपल की जांच रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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समय के साथ बढ़ती गई लागत, काम पूरा नहीं
- बीघापुर क्षेत्र में सिंचाई समस्या को देखते हुए वर्ष 1985-86 में परियोजना पर काम शुरू हुआ था। 300 क्यूसेक क्षमता की नहर पर मोटर बोट पर सात पंप रखे गए थे। पंप नहर के निर्माण से उन्नाव और रायबरेली क्षेत्र के किसानों को सिंचाई का लाभ मिला था। परियोजना की मियाद 15 वर्ष की थी लेकिन जब 25 साल योजना चल गई तो सरकार ने 2010 में 29.38 करोड़ रुपये जारी करके स्थायी नहर पंप बनाने की स्वीकृति दी थी।
- पुर्नस्थापना का काम 19 जनवरी 2012 को शुरू हुआ। इसमें मिट्टी के अलावा पुल पुलियों व पंप हाउस के निर्माण के साथ भवन और बिजली संबंधी काम कराए गए थे। काम 18 सितंबर 2014 को पूरा होना था लेकिन देरी होने से परियोजना की लागत बढ़ गई। वर्ष 2018 में शारदा नहर उन्नाव खंड परियोजना व्यय वित्त समिति बैठक में 76 करोड़ का पुर्नमूल्यांकन प्रस्ताव रखा गया था। वर्ष 2023 में बजट मिलने पर काम शुरू हुआ जो अभी जारी है।

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40 हजार किसानों को मिलेगा फायदा
डलमऊ पंप नहर से उन्नाव जिले के लगभग 120 गांव और रायबरेली जिले के 200 गांव के 40 हजार किसानों को लाभ मिलता। पूर्व में मिले 29.38 करोड़ से विभाग से नहर से बीघापुर के कल्याणपुर, नानमऊ, जगतपुर, धनकोली सहित रायबरेली के कई गांवों के 40 हजार किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए नहर का पानी मिलेगा।
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गुणवत्तापूर्ण काम शासन की प्राथमिकता : सांसद
सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि शासन की पहली प्राथमिकता है कि विकास और निर्माण कार्य गुणवत्ता पूर्ण हों। बताया कि किसी ने डलमऊ पंप नहर में गड़बड़ी की शिकायत की थी। इसी पर डीएम को पत्र लिखा था। जांच होगी तो सच्चाई सामने आएगी। बताया कि अगर गड़बड़ी की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई कराएंगे।
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