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आलू बुआई के लिए नहीं मिल रही खाद
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उन्नाव। आलू बुआई के पीक सीजन में किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। किसान डीएपी के लिए साधन सहकारी समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। खाद न मिलने पर किसान निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीद रहे हैं।
इस बार 10500 हेक्टेअर में आलू बुआई का लक्ष्य रखा गया है। आलू बुआई के समय किसान खेत में डीएपी डालते हैं। सरसों में भी किसान डीएपी का प्रयोग करते हैं। पीक सीजन में समितियों से खाद गायब हो गई है। फतेहपुर चौरासी ब्लॉक क्षेत्र में नौ साधन सहकारी समितियां संचालित हैं। इन समितियों में जसरा मारुफपुर, जाजामऊ, राजेपुर, फरदापुर, बबुरिहा, उद्साह, भड़सर नौशाहरा, सैंता व फतेहपुर चौरासी गढ़ी शामिल हैं। वर्तमान समय में इन सभी समितियों में डीएपी नहीं है। किसानों के मुताबिक इन समितियों में यदि थोड़ी खाद आ भी जाती है तो आवश्यकता से बहुत कम होने के कारण कुछ लोग ही लाभांवित हो पाते हैं। अधिकांश किसानों को लौटना पड़ता है। सहकारिता प्रकोष्ठ के ब्लॉक संयोजक कृपाशंकर अवस्थी, नंदलाल, आनंद कुमार, लक्ष्मीशंकर मिश्र ने बताया कि इस समय आलू, सरसों की बुआई प्रमुखता से चल रही है। इसमें डीएपी की काफी आवश्यकता होती है। जरूरत के बाद भी खाद नहीं मिल पा रही है। सुबह से शाम तक समितियों पर इंतजार करने के बाद शाम को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि साधन सहकारी समिति में 1200 रुपये प्रति बोरी डीएपी मिलती है। निजी दुकानों पर प्राइवेट कंपनी की डीएपी 1400 से 1500 रुपये में मिल रही है। किसानों ने बताया कि निजी दुकानदारों को भी पता है कि समितियों में खाद नहीं है। इसलिए इसका फायदा उठाकर महंगे दामों पर डीएपी बेच रहे हैं। किसान भी जल्द बुआई के लिए ज्यादा कीमत देकर डीएपी खरीद रहा है।
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सादखेड़ा के राकेश कुमार ने बताया कि वह कई दिन से डीएपी के लिए परेशान है। समितियों में खाद नहीं है। बाजार में महंगी है। इससे काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। ऊंचा नेवादा के नन्हक्के ने बताया कि वह दो दिन से डीएपी के लिए भटक रहे हैं। समितियों व बाजार में डीएपी खाद न होने से किसानों की बुआई प्रभावित हो रही है। समितियों के सचिव महेंद्र सिंह यादव व शिवपाल सिंह ने बताया कि डीएपी के लिए चेक जमा कर दी है। खाद आते ही वितरण किया जाएगा।
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इस बार 10500 हेक्टेअर में आलू बुआई का लक्ष्य रखा गया है। आलू बुआई के समय किसान खेत में डीएपी डालते हैं। सरसों में भी किसान डीएपी का प्रयोग करते हैं। पीक सीजन में समितियों से खाद गायब हो गई है। फतेहपुर चौरासी ब्लॉक क्षेत्र में नौ साधन सहकारी समितियां संचालित हैं। इन समितियों में जसरा मारुफपुर, जाजामऊ, राजेपुर, फरदापुर, बबुरिहा, उद्साह, भड़सर नौशाहरा, सैंता व फतेहपुर चौरासी गढ़ी शामिल हैं। वर्तमान समय में इन सभी समितियों में डीएपी नहीं है। किसानों के मुताबिक इन समितियों में यदि थोड़ी खाद आ भी जाती है तो आवश्यकता से बहुत कम होने के कारण कुछ लोग ही लाभांवित हो पाते हैं। अधिकांश किसानों को लौटना पड़ता है। सहकारिता प्रकोष्ठ के ब्लॉक संयोजक कृपाशंकर अवस्थी, नंदलाल, आनंद कुमार, लक्ष्मीशंकर मिश्र ने बताया कि इस समय आलू, सरसों की बुआई प्रमुखता से चल रही है। इसमें डीएपी की काफी आवश्यकता होती है। जरूरत के बाद भी खाद नहीं मिल पा रही है। सुबह से शाम तक समितियों पर इंतजार करने के बाद शाम को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
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किसानों का कहना है कि साधन सहकारी समिति में 1200 रुपये प्रति बोरी डीएपी मिलती है। निजी दुकानों पर प्राइवेट कंपनी की डीएपी 1400 से 1500 रुपये में मिल रही है। किसानों ने बताया कि निजी दुकानदारों को भी पता है कि समितियों में खाद नहीं है। इसलिए इसका फायदा उठाकर महंगे दामों पर डीएपी बेच रहे हैं। किसान भी जल्द बुआई के लिए ज्यादा कीमत देकर डीएपी खरीद रहा है।
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सादखेड़ा के राकेश कुमार ने बताया कि वह कई दिन से डीएपी के लिए परेशान है। समितियों में खाद नहीं है। बाजार में महंगी है। इससे काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। ऊंचा नेवादा के नन्हक्के ने बताया कि वह दो दिन से डीएपी के लिए भटक रहे हैं। समितियों व बाजार में डीएपी खाद न होने से किसानों की बुआई प्रभावित हो रही है। समितियों के सचिव महेंद्र सिंह यादव व शिवपाल सिंह ने बताया कि डीएपी के लिए चेक जमा कर दी है। खाद आते ही वितरण किया जाएगा।