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मशरूम की कमाई, मूंगफली में लगाई, मुनाफा चोखा

Fri, 03 Sep 2021 10:47 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 03 Sep 2021 10:47 PM IST
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खेत में तैयार मूंगफली की फसल दिखातीं महिला किसान निर्मला। संवाद - फोटो : UNNAO
सफीपुर (उन्नाव)। स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्य निर्मला ने ऋण लेकर तीन साल पहले मशरूम की खेती शुरू की। 20 से 22 हजार लागत में सीजन में 45 हजार रुपये की बचत देने वाले मशरूम ने उसकी किस्मत बदल दी। मशरूम से हुई बचत से वह अपने तीन बीघा खेत में सब्जी, मूंगफली और धान से हर साल औसतन 25 हजार रुपये बचा लेती हैं।
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सफीपुर ब्लाक के रायपुर नेवादा गांव की महिलाओं ने वर्ष 2017-18 में फूलमती स्वयं सहायता समूह बनाया। महिलाओं ने समूह में जमा राशि से ऋ ण लेकर अपना काम शुरू किया। इसी समूह की सदस्य निर्मला पत्नी रामदास ने वर्ष 2019 में समूह से 30 हजार रुपये का ऋण लेकर अपने घर के बाहर नांद बनाकर कर मशरूम की खेती शुरू की। मेहनत व देखरेख से पहली फसल में ही उसे अच्छा लाभ हुआ। निर्मला ने दूसरे व तीसरे वर्ष भी मशरूम की खेती जारी रखी। उसे हर साल करीब 45 हजार रुपये का मुनाफा होने लगा। मशरूम की कमाई हाथ आई तो उसने पति रामदास के साथ मिलकर अपने तीन बीघा खेत में सब्जी, मूंगफली और धान की फसल शुरू की। निर्मला ने बताया कि डेढ़ बीघा में मूंगफली की फसल में जुताई, खाद, पानी और दवा पर ढाई हजार रुपये खर्च कर उसे दस हजार रुपये की बचत हो जाती है। वहीं पांच बिसुआ में तरोई, लौकी, टमाटर, मिर्च आदि की खेती कर औसतन दस हजार रुपये और एक बीघे खेत में 12 क्विंटल धान का उत्पादन होता है। व्यवसायिक खेती कर निर्मला ने पूरे गांव को नजीर दी है।
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निर्मला का मायका रायपुर नेवादा में है। 35 वर्ष पूर्व उसका विवाह हरदोई जनपद के माधौगंज में हुआ था। उसके पिता ने उसे तीन बीघा भूमि दी तो वह पति रामदास के साथ मायके चली आई। शुरुआत में खेती से अच्छी कमाई न होने पर पति ने छोटी सी गुमटी में किराने की दुकान कर ली। जबसे उसने मशरूम की खेती में हाथ आजमाया। तबसे खेती फायदेमंद सौदा साबित हो रही है।
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गांव के स्कूल में संचालित रहे लोक शिक्षा केंद्र में ही निर्मला ने पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने विकासखंड कार्यालय के कर्मियों के संपर्क में आकर समूह की जानकारी ली। फिर स्वयं सहायता समूह का गठन किया। निर्मला के मुताबिक, जल्द ही वह एक लोडर खरीदने जा रही हैं। इससे वह मशरूम व अन्य सब्जियों को उगाकर कानपुर व लखनऊ बाजार ले जाकर बेच सकेंगी। जिससे उनका मुनाफा बढ़ेगी। निर्मला ने समूह की अन्य महिलाओं को भी खेती की तरफ आकर्षित किया है।
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