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ताबूत और अलम उठाकर मजलिस, ताजिए दफन

Fri, 20 Aug 2021 05:20 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 20 Aug 2021 05:20 PM IST
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इमामबाड़े में ताजिया और अलम की जियारत करते अकीदतमंद। संवाद - फोटो : UNNAO
उन्नाव/सफीपुर। मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन सहित 72 शाहदतों का गम मनाने वाले सभी वर्ग के मातमदारों ने शहादतों को याद किया। मातमदारों ने ताबूत व अलम उठा कर मजलिस व मातम कर गम मनाया। सुबह अलग-अलग करबला पहुंच ताजिए दफन किए। मोहर्रम पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक प्रशासन सचेत रहा।
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मौलाना रजीउल जाफर ने मजलिस को संबोधित कर कहा कि शासक यजीद ने सच्चाई के मार्ग पर चलने वालों को शहीद कर इमाम के खेमों में आग लगाकर महिलाओं, बच्चों को बंदी बना कैद खाने ले गए। धर्म-अधर्म की इस जंग के बाद शहीद होने वाले पूरे विश्व में सभी की जुबान पर है और शासक यजीद की पहचान तक समाप्त हो गई। उन्होंने कहा कि अरब देश के शासक यजीद के अधर्मी शासन के विरुद्ध मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन ने आवाज उठाई तो शासक ने हुसैन से मित्रता का हाथ बढ़ा दिया पर इमाम हुसैन अलै के इनकार के बाद यजीद ने इमाम को बातचीत का न्योता देकर करबला बुलाया।
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करबला में भी हुसैन के इनकार करने पर शासक यजीद की फौज ने हुसैन सहित उनके साथियों को कैद कर सात मोहर्रम से भोजन-पानी पर पाबंदी लगा दी। तीन दिन की भूख प्यास में ही 10 मोहर्रम को एक-एक कर 72 लोगो को शहीद कर दिया। यजीद की फौज ने इमाम के खेमों में आग लगाकर महिलाओं व बच्चों को कैद कर लिया। इमाम हुसैन का गम मनाने वालों ने खाने-पीने की व्यवस्था कराई। पानी, शरबत, चाय पिलाने का सिलसिला जारी रहा। लोगों ने इबादत की और इमाम के गम में नंगे पैर रहे।
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