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सेंगर के रसूख में अफसरों ने की थी अनसुनी

Tue, 08 Sep 2020 12:36 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 08 Sep 2020 12:36 AM IST
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Officers had unheard of Sanger's influence
उन्नाव। किशोरी से दुष्कर्म में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर के रसूख के आगे जिले के आला अधिकारी भी नतमस्तक रहे। सेंगर के बचाव में पीड़िता और उसके परिवार की भी नहीं सुनी गई। कार्रवाई के लिए वह डीएम से लेकर एसपी व पुलिस के अन्य अधिकारियों की चौखट पर दस्तक देती रही लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अफसरों ने मामले को दबाने का भरसक प्रयास किया। कार्रवाई न करने का परिणाम यह हुआ कि किशोरी के पिता की जान भी चली गई। मामला सीबीआई तक पहुंचा तो परतें खुलकर सामने आ गईं।
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मामले की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी। 4 जून 2017 को विधायक के गांव निवासी किशोरी ने विधायक पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। उस समय नेहा पांडेय उन्नाव की एसपी थीं। वह जनवरी 2016 से अक्तूबर 2107 तक उन्नाव में तैनात रहीं। जांच में सीबीआई ने शुरुआती कार्रवाई में उनकी शिथिलता पाई है। इसी दौरान उन्नाव की डीएम रहीं अदिति सिंह ने भी सेंगर के दबाव में कार्रवाई नहीं की। अदिति सिंह जून 2017 से अक्तूबर 2017 तक उन्नाव की डीएम रहीं थीं।
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3 अप्रैल 2018 को दिल्ली से गांव आए पीड़िता के पिता को विधायक के छोटे भाई अतुल सेंगर ने गुर्गों के साथ मिलकर पीटा था। 8 अप्रैल 2018 की रात जेल में बंद किशोरी के पिता हालत बिगड़ गई। जेल अधिकारियों ने रात 9 बजे जिला अस्पताल भेजा था जहां सुबह 3:49 बजे उसकी मौत हो गई। उस समय पुष्पांजलि उन्नाव की एसपी थीं और अष्टभुजा प्रसाद सिंह अपर पुलिस अधीक्षक थे। सीबीआई ने इस प्रकरण में इन दोनों अधिकारियों की भी लापरवाही पाई है।
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पुलिस भी सलाखों के पीछे
पीड़िता व उसका परिवार न्याय के लिए जब भी पुलिस के पास गया उन्हें चलता कर दिया। जांच सीबीआई के हाथ आई तो गुनहगार पुलिस कर्मियों को जेल जाना पड़ा था।
तीन अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता की पिटाई और 8 अप्रैल को मौत की घटना में सीओ सफीपुर कुंवर बहादुर सिंह, एसओ अशोक सिंह भदौरिया, हल्का इंचार्ज एसआई कामता प्रसाद हेड कांस्टेबल रामराज शुक्ला, सिपाही लक्ष्य कुमार शुक्ला, मोहित कुमार, सिपाही आमिर समेत छह पुलिस कर्मियों को निलंबित किया गया था। बाद में सीबीआई ने जांच में एसओ अशोक भदौरिया, दरोगा कामता प्रसाद व सिपाही आमिर पर रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेजा था। तत्कालीन एसओ और एसआई अभी तिहाड़ जेल में हैं।
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