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मच्छरों की भरमार, मलेरिया विभाग नाकाम
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उन्नाव। एक तरफ संक्रामक रोगों की भरमार और दूसरी तरफ मच्छरों के प्रकोप के बाद भी लेकिन रोकथाम के लिए जिम्मेदार विभाग नाकाम है। विभागीय अधिकारियों का कहन है कि कीट संग्रहकर्ता से लेकर फील्ड वर्कर तक के पद खाली पड़े हैं। ऐसे में जितना हो पा रहा है कर रहे हैं।
मलेरिया विभाग में फील्ड वर्कर के दो पद स्वीकृत हैं। लेकिन दोनों पद मौजूदा समय में खाली चल रहे हैं। फील्ड वर्कर ही दवाओं का छिड़काव कर लोगों को जागरुक करने का काम करते हैं। सुपीरियर फील्ड वर्कर के पद पर सिर्फ एक कर्मी की तैनाती है।
जबकि विभाग की नींव माने जाने वाले कीट संग्रहकर्ता का पद पिछले सात साल से खाली चल रहा है। फाइलेरिया नियंत्रण इकाई में सुपीरियर फील्ड वर्कर में स्वीकृत दो पदों के सापेक्ष एक पद खाली चल रहा है। फील्ड वर्कर के स्वीकृत 9 पद में से 6 पद खाली हैं।
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सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश खुद मानते हैं कि मलेरिया विभाग में स्टॉफ की कमी है। हालांकि मलेरिया विभाग स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर छिड़काव करा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता पोषण समितियां सक्रिय हैं। शहरी क्षेत्र में नगर पालिका का सहयोग मिल रहा है।
मलेरिया अधिकारी आरसी यादव ने बताया कि मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से लोग मलेरिया का शिकार होते हैं। मादा एनाफिलीज ही मलेरिया के कारक प्लाजमोडियम नामक प्रोटोजेआ का वाहक होती है। मादा एनाफिलीज ही संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ्य व्यक्ति तक पहुंचता है। सामान्य तौर पर मादा एनाफिलीज के काटने के 14 दिन बाद मलेरिया के लक्षण सामने आते हैं।
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मलेरिया विभाग में फील्ड वर्कर के दो पद स्वीकृत हैं। लेकिन दोनों पद मौजूदा समय में खाली चल रहे हैं। फील्ड वर्कर ही दवाओं का छिड़काव कर लोगों को जागरुक करने का काम करते हैं। सुपीरियर फील्ड वर्कर के पद पर सिर्फ एक कर्मी की तैनाती है।
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जबकि विभाग की नींव माने जाने वाले कीट संग्रहकर्ता का पद पिछले सात साल से खाली चल रहा है। फाइलेरिया नियंत्रण इकाई में सुपीरियर फील्ड वर्कर में स्वीकृत दो पदों के सापेक्ष एक पद खाली चल रहा है। फील्ड वर्कर के स्वीकृत 9 पद में से 6 पद खाली हैं।
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सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश खुद मानते हैं कि मलेरिया विभाग में स्टॉफ की कमी है। हालांकि मलेरिया विभाग स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर छिड़काव करा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता पोषण समितियां सक्रिय हैं। शहरी क्षेत्र में नगर पालिका का सहयोग मिल रहा है।
मलेरिया अधिकारी आरसी यादव ने बताया कि मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से लोग मलेरिया का शिकार होते हैं। मादा एनाफिलीज ही मलेरिया के कारक प्लाजमोडियम नामक प्रोटोजेआ का वाहक होती है। मादा एनाफिलीज ही संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ्य व्यक्ति तक पहुंचता है। सामान्य तौर पर मादा एनाफिलीज के काटने के 14 दिन बाद मलेरिया के लक्षण सामने आते हैं।