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नवाबगंज ब्लाक में सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Fri, 06 Feb 2015 11:36 PM IST
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उन्नाव। जनपद के नवाबगंज ब्लाक से जुड़ी ग्राम पंचायतों में सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे पाए गए हैं। इनमें अतिकुपोषित बच्चों की संख्या तीन सौ से अधिक है।
सबसे कम कुपोषित बच्चों की संख्या शहर में एक हजार से कम है। कुपोषण से जूझ रही इन ग्राम पंचायतों को कुपोषणमुक्त कराने के लिए जिलास्तरीय अधिकारियों ने गोद लिया है।
जिले में कुपोषण तेजी से बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है। इसको देखते हुए कुपोषण की चपेट में आए बच्चों को पीली और लाल श्रेणी में बांटा गया है। वर्तमान में जनपद में कुल कुपोषित बच्चों की संख्या 73268 है। इनमें पीली श्रेणी में 71201 और लाल श्रेणी में 2067 बच्चे रखे गए हैं।
जानकारों की मानें तो लाल श्रेणी के बच्चे अतिकुपोषित हैं। इन्हें सबसे पहले इलाज की आवश्यकता बताई जाती है। कुपोषित बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा नवाबगंज ब्लाक में है। दिसंबर में तैयार की गई सूची के अनुसार, ब्लाक में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 395 और साधारण कुपोषण के शिकार बच्चे 10763 हैं। सूत्रों की मानें तो जिले की 126 ग्राम पंचायतें अति कुपोषित की श्रेणी में रखी गई हैं।
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खून की कमी से जूझ रही हैं 9674 गर्भवती
जिले में एनीमिया (खून की कमी) से ग्रसित गर्भवतियों की संख्या 9674 है। असोहा ब्लाक में सबसे ज्यादा 1719 गर्भवती एनीमिया पीड़ित हैं। हसनगंज, पुरवा व सुमेरपुर ब्लाक में एनीमिया ग्रसित गर्भवतियों की संख्या शून्य है। दिसंबर में जन्मे नवजातों में करीब 299 ऐसे हैं जिनका वजन जन्म के समय ढाई किलो से कम रहा।
डीएम, सीडीओ ने दो-दो गांवों को लिया है गोद
कुपोषण मिटाने के लिए शासन के निर्देश पर डीएम और सीडीओ ने अतिकुपोषित गांवों में दो-दो ग्राम पंचायतों को गोद लिया है। इसके अलावा 63 अन्य जिलास्तरीय अधिकारियों ने भी दो-दो गांव गोद लेकर कुपोषण मिटाने की कवायद शुरू कर दी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं वह अपने गोद लिए गांवों में सप्ताह में एक बार अवश्य जाएं और कुपोषण दूर करने की योजनाएं लागू करें।
सबसे कम कुपोषित बच्चों की संख्या शहर में एक हजार से कम है। कुपोषण से जूझ रही इन ग्राम पंचायतों को कुपोषणमुक्त कराने के लिए जिलास्तरीय अधिकारियों ने गोद लिया है।
जिले में कुपोषण तेजी से बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है। इसको देखते हुए कुपोषण की चपेट में आए बच्चों को पीली और लाल श्रेणी में बांटा गया है। वर्तमान में जनपद में कुल कुपोषित बच्चों की संख्या 73268 है। इनमें पीली श्रेणी में 71201 और लाल श्रेणी में 2067 बच्चे रखे गए हैं।
जानकारों की मानें तो लाल श्रेणी के बच्चे अतिकुपोषित हैं। इन्हें सबसे पहले इलाज की आवश्यकता बताई जाती है। कुपोषित बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा नवाबगंज ब्लाक में है। दिसंबर में तैयार की गई सूची के अनुसार, ब्लाक में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 395 और साधारण कुपोषण के शिकार बच्चे 10763 हैं। सूत्रों की मानें तो जिले की 126 ग्राम पंचायतें अति कुपोषित की श्रेणी में रखी गई हैं।
खून की कमी से जूझ रही हैं 9674 गर्भवती
जिले में एनीमिया (खून की कमी) से ग्रसित गर्भवतियों की संख्या 9674 है। असोहा ब्लाक में सबसे ज्यादा 1719 गर्भवती एनीमिया पीड़ित हैं। हसनगंज, पुरवा व सुमेरपुर ब्लाक में एनीमिया ग्रसित गर्भवतियों की संख्या शून्य है। दिसंबर में जन्मे नवजातों में करीब 299 ऐसे हैं जिनका वजन जन्म के समय ढाई किलो से कम रहा।
डीएम, सीडीओ ने दो-दो गांवों को लिया है गोद
कुपोषण मिटाने के लिए शासन के निर्देश पर डीएम और सीडीओ ने अतिकुपोषित गांवों में दो-दो ग्राम पंचायतों को गोद लिया है। इसके अलावा 63 अन्य जिलास्तरीय अधिकारियों ने भी दो-दो गांव गोद लेकर कुपोषण मिटाने की कवायद शुरू कर दी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं वह अपने गोद लिए गांवों में सप्ताह में एक बार अवश्य जाएं और कुपोषण दूर करने की योजनाएं लागू करें।