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सराफा की मौत पर उबला शहर, घंटों जाम, हंगामा
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
Updated Tue, 04 Oct 2016 12:47 AM IST
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मौके पर जमा भीड़
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सूचना पर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष और सदर विधायक भी पहुंच गए। जाम के दौरान जिन लोगों ने निकलने का प्रयास किया भीड़ ने उनकी भी पिटाई कर दी। सूचना पर सीओ सिटी व कोतवाल भी दलबल के साथ पहुंचे। सीओ सिटी ने तीन दिन में घटना का खुलासा और एसडीएम ने मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया, करीब दो घंटे बाद जाम खुला।
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मालूम हो कि शहर के मोहल्ला एबी नगर दक्षिणी निवासी प्रमोद सोनी (25) पुत्र मोहन की मोहल्ला हिरन नगर में ज्वैलरी की दुकान है। 12 सितंबर की रात दुकान बंद करके वह अपने छोटे भाई आशीष के साथ बाइक से घर जा रहा था। घर से थोड़ी दूर पहले दो बाइक सवार चार बदमाशों ने प्रमोद को रोका बैग छीना तो बदमाशों ने प्रमोद के सीने के पास गोली मार दी। बदमाशों ने आशीष पर भी फायर किया इससे उसके दाहिने हाथ में छर्रे लगे थे। दोनो भाईयों के घायल होेने के बाद लुटेरे दस लाख रुपये के सोने के जेवर भरे बैग लेकर भाग निकले थे। परिजनों ने दोनो भाइयों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। इसमें प्रमोद की हालत सीरियस होने पर डाक्टरों ने उसे हैलट रेफर कर दिया था। हैलट में भी सुधार न होने पर परिजन प्रमोद का इलाज कानपुर के एक नर्सिंगहोम में करा रहे थे। सोमवार सुबह प्रमोद ने दम तोड़ दिया।
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वाहनों की लाइटें तोड़ी, कुछ की हवा निकाल दी
परिजन शाम करीब चार बजे शव लाने के बाद शहर पहुंचे और गंाधीनगर तिराहा के पास सड़क पर शव रखकर जाम लगा दिया। सूचना पर सदर विधायक विधायक पंकज गुप्ता, व्यापारी नेता रजनीकांत श्रीवास्तव ने भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। भीड़ इस कदर आक्रोशित थी कि जिसने भी जाम तोड़कर निकलने का प्रयास किया उसके साथ मारपीट हुई कई गाड़ियों की लाइट तोड़ी तो कुछ की हवा निकाल दी। सीओ सिटी हृदयेश कठेरिया व कोतवाल संजय पांडेय धरना स्थल पर पहुंचे। बाद में सदर विधायक ने परिजनों को समझाया और एसडीएम को बुलाकर मुआवजे की बात कही। एसडीएम विनय प्रकाश श्रीवास्तव ने मामले की जानकारी ली और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। साथ ही कोतवाल से जांच खुद करने के आदेश दिए। सीओ ने तीन दिन के अंदर लुटेरों को पकड़ने का आश्वासन दिया तब जाकर मामला शांत हो सका।
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प्रमोद पर थी परिवार की जिम्मेदारी
प्रमोद चार भाईयों में दूसरे नंबर का था। उसके अन्य तीन भाई मूक-बधिर हैं। परिजनों ने प्रमोद को ज्वैलरी की दुकान खुलवा रखी थी। इसी दुकान में वह अपने छोटे भाई आशीष को भी लगाए था। दोनों ही दुकान चलाकर परिवार का भरण पोषण करते थे। प्रमोद की मौत से परिवार का सहारा ही छिन गया।
शहनाई बजने से पहले ही उजड़ीं खुशियां
जिस घर में एक महीने बाद शहनाई बजने वाली थी उस घर की खुशियां मातम में बदल गईं। पिता मोहन सोनी ने बताया कि 16 नवंबर को प्रमोद की बारात जानी थी। घर में बेटे की शादी की तैयारियां चल रहीं थीं। जो जेवर लुटेरे ले गए उसमें शादी के भी जेवर थे। बेटे की मौत से परिवार उजड़ गया। अब तीन बेटों का बोझ वह कैसे उठाएगा वह खुद नहीं समझ पा रहा था।
क्या बोले एसडीएम
एसडीएम सदर विनय प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि मंगलवार को डीएम से बात कर मुख्यमंत्री राहतकोष से मदद दिलाने के लिए लिखवाया जाएगा। सदर विधायक से भी बात हो गई है। जितनी प्रशासन से मदद हो सकेगी उतनी की जाएगी। उन्होंने बताया कि कोतवाल को मामले की जांच करने के आदेश दिए गए हैं।