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Unnao News: पर्चा बनवाने, डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने में लग रहे दो घंटे
Fri, 05 Sep 2025 12:49 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
Updated Fri, 05 Sep 2025 12:49 AM IST
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फोटो-1- पैथोलॉजी में सैंपल देने के लिए लाइन में लगे मरीज। संवाद
उन्नाव। जिला अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को घंटों की देरी से इलाज मिल रहा है। पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने और जांच कराने में उन्हें तीन घंटे तक का समय लग रहा है।
नौ बजे अस्पताल पहुंचने वाले मरीज को 12 बजे इलाज मिल रहा है। वहीं, अगर जांच करानी पड़ रही है तो पूरा दो बजे तक समय उसी में लग रहा है। इसके अलावा जांच रिपोर्ट के लिए मरीजों को अगले दिन फिर चक्कर लगाना होता है। गुरुवार को ओपीडी में पहुंचने वाले बुखार और पेट दर्द के मरीजों को डॉक्टरों ने जांच कराने की सलाह दी। इससे पैथोलॉजी में भी भीड़ रही। सुबह आठ बजे के बाद ही पैथोलॉजी में सैंपल देने के लिए मरीजों की भीड़ शुरू हो गई। 10 बजे तक अधिक भीड़ होने से सैंपल देने की लाइन में लगे मरीजों में धक्कामुक्की भी हुई।
सीएमएस डॉ.राजीव गुप्ता ने कहा कि इन दिनाें मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इससे भीड़ हो रही है। अतिरिक्त स्वास्थ्य कर्मियों को लगाया गया है। पर्चा काउंटर पर सभी चार काउंटर चल रहे हैं। वहीं पैथोलॉजी में भी कर्मचारी बढ़ाए गए हैं। जरूरत हुई तो अन्य वैकल्पिक व्यवस्था कराई जाएगी। मरीजों को समुचित इलाज मिले, यही पहली प्राथमिकता है।
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सराय गांव के लवकुश ने बताया कि वह सुबह नौ बजे जिला अस्पताल पहुंच गए थे। उनके हाथ-पैर में दर्द और कमजोरी रहती है। पहले पर्चा बनवाने में एक घंटा लग गया। इसके बाद डॉक्टर को दिखाने पहुंचे तो यहां लाइन भी दो घंटा लाइन में लगना पड़ा। गदनखेड़ा की कृष्णा देवी ने बताया कि उन्हें चक्कर आता है और बीपी की समस्या है। तीन माह से इलाज चल रहा है। जब भी दवा लेने आतीं है तो तीन घंटा लग जाता है। बताया कि पर्चा काउंटर से लेकर जांच कराने तक जगह-जगह धक्के खाने पड़ते हैं। तालिब सरांय के मोहम्मद मुश्ताक ने बताया कि उन्हें बुखार आ रहा है। जिला अस्पताल में तो दिखाने की हिम्मत नहीं होती है। यहां आने पर लाइन में लगे-लगे तबीयत और खराब हो जाती है। धक्कामुक्की भी बहुत होती है। इससे दिक्कत होती है। धौकल खेड़ा के कल्लू ने बताया कि बुखार और कमजोरी है। डॉक्टर ने जांच कराने की सलाह दी है। लेकिन जांच कराने की तो हिम्मत नहीं पड़ रही। पैथोलॉजी में इतनी भीड़ होती है कि बाहर से ही देखकर तबीयत और खराब हो रही है।
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नौ बजे अस्पताल पहुंचने वाले मरीज को 12 बजे इलाज मिल रहा है। वहीं, अगर जांच करानी पड़ रही है तो पूरा दो बजे तक समय उसी में लग रहा है। इसके अलावा जांच रिपोर्ट के लिए मरीजों को अगले दिन फिर चक्कर लगाना होता है। गुरुवार को ओपीडी में पहुंचने वाले बुखार और पेट दर्द के मरीजों को डॉक्टरों ने जांच कराने की सलाह दी। इससे पैथोलॉजी में भी भीड़ रही। सुबह आठ बजे के बाद ही पैथोलॉजी में सैंपल देने के लिए मरीजों की भीड़ शुरू हो गई। 10 बजे तक अधिक भीड़ होने से सैंपल देने की लाइन में लगे मरीजों में धक्कामुक्की भी हुई।
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सीएमएस डॉ.राजीव गुप्ता ने कहा कि इन दिनाें मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इससे भीड़ हो रही है। अतिरिक्त स्वास्थ्य कर्मियों को लगाया गया है। पर्चा काउंटर पर सभी चार काउंटर चल रहे हैं। वहीं पैथोलॉजी में भी कर्मचारी बढ़ाए गए हैं। जरूरत हुई तो अन्य वैकल्पिक व्यवस्था कराई जाएगी। मरीजों को समुचित इलाज मिले, यही पहली प्राथमिकता है।
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सराय गांव के लवकुश ने बताया कि वह सुबह नौ बजे जिला अस्पताल पहुंच गए थे। उनके हाथ-पैर में दर्द और कमजोरी रहती है। पहले पर्चा बनवाने में एक घंटा लग गया। इसके बाद डॉक्टर को दिखाने पहुंचे तो यहां लाइन भी दो घंटा लाइन में लगना पड़ा। गदनखेड़ा की कृष्णा देवी ने बताया कि उन्हें चक्कर आता है और बीपी की समस्या है। तीन माह से इलाज चल रहा है। जब भी दवा लेने आतीं है तो तीन घंटा लग जाता है। बताया कि पर्चा काउंटर से लेकर जांच कराने तक जगह-जगह धक्के खाने पड़ते हैं। तालिब सरांय के मोहम्मद मुश्ताक ने बताया कि उन्हें बुखार आ रहा है। जिला अस्पताल में तो दिखाने की हिम्मत नहीं होती है। यहां आने पर लाइन में लगे-लगे तबीयत और खराब हो जाती है। धक्कामुक्की भी बहुत होती है। इससे दिक्कत होती है। धौकल खेड़ा के कल्लू ने बताया कि बुखार और कमजोरी है। डॉक्टर ने जांच कराने की सलाह दी है। लेकिन जांच कराने की तो हिम्मत नहीं पड़ रही। पैथोलॉजी में इतनी भीड़ होती है कि बाहर से ही देखकर तबीयत और खराब हो रही है।

फोटो-1- पैथोलॉजी में सैंपल देने के लिए लाइन में लगे मरीज। संवाद