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स्ट्रेचर न मिलने से इमरजेंसी गेट पर तड़पा घायल
उन्नाव
Updated Sun, 28 May 2017 12:14 AM IST
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ई-रिक्शा में तड़फता घायल शफीक
- फोटो : अमर उजाला
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जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं व डाक्टरों की अनदेखी के कारण शुक्रवार को महिला की मौत हुई उसके बाद भी जिम्मेदारों की आंखें नहीं खुली। शनिवार को सड़क हादसे में घायल अधेड़ इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर न मिलने से ई रिक्शा में ही तड़पता रहा। अधेड़ के पैर में कई जगह जख्म होने से वह चलने में असमर्थ था। काफी प्रयास के बाद भी जब स्ट्रेेचर नहीं मिला तो वहां मौजूद लोगों की मदद से रिक्शा चालक ने उसे इमरजेंसी में भर्ती कराया।
आवास विकास कालोनी निवासी शफीक (55) शनिवार दोपहर बेटे आजाद के साथ शहर के स्टेशन रोड पर खरीदारी करने स्कूटी से जा रहे थे। मोतीनगर स्थित हनुमान मंदिर के पास स्कूटी में पीछे से आ रहे ट्रक ने टक्कर मार दी। इससे शफीक का दाएं पैर में कई जगह चोट आई। स्कूटी क्षतिग्रस्त हो जाने से पुत्र आजाद ने एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन बात न हो पाने से वह पिता शफीक को ई-रिक्शा में लादकर जिला अस्पताल के इमरजेंसी पहुंचा।
इमरजेंसी वार्ड तक ले जाने के लिए उसने स्ट्रेचर ढूंढना शुरू किया। आजाद के अनुसार उसने इमरजेंसी वार्ड में कर्मचारियों से स्ट्रेचर दिलाने की मांग की लेकिन उन्होंने उसे खुद ही ढूंढ लेने की बात कहकर चलता कर दिया। काफी देर तक स्ट्रेचर न मिलने पर शफीक रिक्शा में ही तड़फता रहा। अधिक खून निकलता देख चालक ने वहां मौजूद लोगों की मदद से शफीक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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मालूम हो कि शुक्रवार को अचलगंज थानाक्षेत्र के कोरारी में रहने वाले राजेश की पत्नी ममता की भी मौत इमरजेंसी गेट पर हुई थी। राजेश कई बार डाक्टरों से इमरजेंसी गेट तक चलकर पत्नी के देखने की मिन्नतें करता रहा, लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। अंत में उसने दम तोड़ दिया।
तीमारदार के भरोसे रहते मरीज
उन्नाव। जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीज तीमारदार के ही भरोसे रहते हैं। अस्पताल आने वाले मरीज को गेट से वार्ड तक ले जाने की जिम्मेदारी परिजनों को ही उठानी पड़ती है। यहां तक कि इमरजेंसी में देखने के बाद वार्ड ब्वाय तीमारदार से मरीज को बेड तक ले जाने का आदेश देता है। जबकि शासन से निर्देश है कि अस्पताल पहुंचने के बाद मरीज की जिम्मेदारी अस्पताल की है।
क्या बोले सीएमएस
मरीज को स्ट्रेचर न मिलने पर सीएमएस डा. एसपी चौधरी का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मियों को सख्त निर्देश हैं कि मरीजों को स्ट्रेचर की तत्काल व्यवस्था कराई जाए। इतना ही नहीं मरीज की पूरी सहायत की जाए। लापरवाही मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि पर्याप्त स्ट्रेचर उपलब्ध हैं।
आवास विकास कालोनी निवासी शफीक (55) शनिवार दोपहर बेटे आजाद के साथ शहर के स्टेशन रोड पर खरीदारी करने स्कूटी से जा रहे थे। मोतीनगर स्थित हनुमान मंदिर के पास स्कूटी में पीछे से आ रहे ट्रक ने टक्कर मार दी। इससे शफीक का दाएं पैर में कई जगह चोट आई। स्कूटी क्षतिग्रस्त हो जाने से पुत्र आजाद ने एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन बात न हो पाने से वह पिता शफीक को ई-रिक्शा में लादकर जिला अस्पताल के इमरजेंसी पहुंचा।
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इमरजेंसी वार्ड तक ले जाने के लिए उसने स्ट्रेचर ढूंढना शुरू किया। आजाद के अनुसार उसने इमरजेंसी वार्ड में कर्मचारियों से स्ट्रेचर दिलाने की मांग की लेकिन उन्होंने उसे खुद ही ढूंढ लेने की बात कहकर चलता कर दिया। काफी देर तक स्ट्रेचर न मिलने पर शफीक रिक्शा में ही तड़फता रहा। अधिक खून निकलता देख चालक ने वहां मौजूद लोगों की मदद से शफीक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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मालूम हो कि शुक्रवार को अचलगंज थानाक्षेत्र के कोरारी में रहने वाले राजेश की पत्नी ममता की भी मौत इमरजेंसी गेट पर हुई थी। राजेश कई बार डाक्टरों से इमरजेंसी गेट तक चलकर पत्नी के देखने की मिन्नतें करता रहा, लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। अंत में उसने दम तोड़ दिया।
तीमारदार के भरोसे रहते मरीज
उन्नाव। जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीज तीमारदार के ही भरोसे रहते हैं। अस्पताल आने वाले मरीज को गेट से वार्ड तक ले जाने की जिम्मेदारी परिजनों को ही उठानी पड़ती है। यहां तक कि इमरजेंसी में देखने के बाद वार्ड ब्वाय तीमारदार से मरीज को बेड तक ले जाने का आदेश देता है। जबकि शासन से निर्देश है कि अस्पताल पहुंचने के बाद मरीज की जिम्मेदारी अस्पताल की है।
क्या बोले सीएमएस
मरीज को स्ट्रेचर न मिलने पर सीएमएस डा. एसपी चौधरी का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मियों को सख्त निर्देश हैं कि मरीजों को स्ट्रेचर की तत्काल व्यवस्था कराई जाए। इतना ही नहीं मरीज की पूरी सहायत की जाए। लापरवाही मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि पर्याप्त स्ट्रेचर उपलब्ध हैं।