{"_id":"582372694f1c1b067fb39c5d","slug":"highway-toll-plaza-was-jammed-in-the-back-of","type":"story","status":"publish","title_hn":"नोट के फेर में हाईवे टोल प्लाजा पर लगा जाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नोट के फेर में हाईवे टोल प्लाजा पर लगा जाम
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Nov 2016 12:38 AM IST
विज्ञापन
jam at toolplaza
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चालकों ने टैक्स देने के लिए 500 या 1000 का नोट थमाते रहे लेकिन जब वापसी में प्लाजा कर्मी पांच सौ नोट देते तो चालक चलन बंद होने की बात कहकर हंगामा करते। इसके चलते टोल प्लाजा में 100, 50 व छोटे नोटों की किल्लत हो गई। इसके चलते सुबह से दोपहर तक टोल प्लाजा पर जाम की स्थिति रही। लखनऊ से आने और जाने वाले वाहनों की दोनो ओर लंबी कतारें लगी रहीं। कई बार विवाद होने से माहौल बिगड़ने की आशंका को देखते हुए टोल प्लाजा पर पुलिस ड्यूटी भी लगानी पड़ी।
टोल प्लाजा मैनेजर एस चौहान ने बताया कि 100 व उससे छोटे नोटों की कमी के चलते सुबह कुछ देर के लिए दिक्त हुई थी। उन्होंने बताया कि किसी से भी हजार व पांच सौ के नोट लेने से इनकार नहीं किया जा रहा है।
इनसेट
उद्यमियों ने पीएम के फैसले का स्वागत किया
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएसन केंद्रीय कमेटी के सदस्य जीएन मिश्रा ने केंद्र सरकार के इस फैसले को सराहा। उन्होंने बताया कि बुधवार को उद्यमियों को तात्कालिक नगदी की समस्या का सामना करना पड़ा लेकिन इसके दूरगामी परिणाम उद्यमियों के लिए अच्छे होंगे। उन्होंने बताया कि बुधवार को जैसे ट्रक भाड़ा, लेवर पेमेंट, कच्चे माल की खरीद आदि में दिक्कत आई। उनके अनुसार प्रधामंत्री के इस फैसले से कालाधन बाहर आएगा या बेकार हो जाएगा। बताया कि ब्लैक मनी इंडस्ट्रीज में बराबरी में लगाया जाता था। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद उन उद्यमियों को सहूलियत होगी जो ईमानदारी से अपना उद्यम चलाते हैं।
विज्ञापन
इनसेट
राजनीतिक दलों में बेचैनी
काले धन को लेकर मंगलवार देर शाम प्रधानमंत्री की ओर से की गई सर्जिकल स्ट्राइक ने राजनीतिक दलों में भी खलबली मचा दी है। सबसे अधिक मुश्किलें उनके सामने हैं जो चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। काले धन के बूते चुनाव जीतने के मंसबूों पर पानी फिरने की बेचैनी साफ दिखी। हालांकि राजनीतिक दलों के लोग खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि प्रधानमंत्री को हजार व पांच सौ के नोट की बंद करने से पहले हफ्ते-दस दिन का समय जरूर देना चाहिए था।
----------
बाइक खरीदने पहुंचे किसान को लौटाया
पांच सौ और हजार रुपये के नोट अचानक बंद होने से नगर की कृषि उत्पादन मंडी और नौनिहालगंज में सन्नाटा छाया रहा। ग्रामीण क्षेत्र के सैकड़ों किसान बड़े नोट को बदलने नगर आए लेकिन बैंकों की बंदी देखकर बैरंग वापस हो गए।
नगर के संडीला रोड स्थित कृषि उत्पादन मंडी में ग्राम कलवारी निवासी ललित सिंह व चक हनुमान निवासी नीरज त्रिपाठी सहित एक दर्जन काश्तकार ट्रैक्टर से गेहूं लेकर बिक्री के लिए मंडी यार्ड आए थे लेकिन व्यापारियों ने पहले ही आगाह कर दिया कि उन्हें पांच सौ या हजार के नोट ही लेने पड़ेंगे लेकिन काश्तकारों ने बडे़ नोट लेने से इंकार कर दिया और अपनी कृषि उपज लेकर घर वापस लौट गए। ग्राम माढ़ापुर निवासी साहेबलाल की बेटी का तिलक 16 नवंबर को होना है। इसके लिए बुधवार को वह बाइक खरीदने आया था। लेकिन बाइक एजेंसी मालिकों ने बड़े नोट लेने से मना कर दिया। बड़े नोट बंद होने का भारी असर यहां की मार्केट में दिखाई दिया। कपड़ा, इलेक्ट्रानिक, किराना व बर्तन दुकानदारों की बोहनी तक नहीं हुई। वहीं बाजार में छोटे नोटों का अकाल दिखा। सैकड़ों नागरिक और ग्रामीण फ ुटकर रुपयों के अभाव में सब्जी सहित रोजमर्रा की जरूरत का सामान नहीं खरीद सके।
विज्ञापन
टोल प्लाजा मैनेजर एस चौहान ने बताया कि 100 व उससे छोटे नोटों की कमी के चलते सुबह कुछ देर के लिए दिक्त हुई थी। उन्होंने बताया कि किसी से भी हजार व पांच सौ के नोट लेने से इनकार नहीं किया जा रहा है।
विज्ञापन
इनसेट
उद्यमियों ने पीएम के फैसले का स्वागत किया
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएसन केंद्रीय कमेटी के सदस्य जीएन मिश्रा ने केंद्र सरकार के इस फैसले को सराहा। उन्होंने बताया कि बुधवार को उद्यमियों को तात्कालिक नगदी की समस्या का सामना करना पड़ा लेकिन इसके दूरगामी परिणाम उद्यमियों के लिए अच्छे होंगे। उन्होंने बताया कि बुधवार को जैसे ट्रक भाड़ा, लेवर पेमेंट, कच्चे माल की खरीद आदि में दिक्कत आई। उनके अनुसार प्रधामंत्री के इस फैसले से कालाधन बाहर आएगा या बेकार हो जाएगा। बताया कि ब्लैक मनी इंडस्ट्रीज में बराबरी में लगाया जाता था। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद उन उद्यमियों को सहूलियत होगी जो ईमानदारी से अपना उद्यम चलाते हैं।
विज्ञापन
इनसेट
राजनीतिक दलों में बेचैनी
काले धन को लेकर मंगलवार देर शाम प्रधानमंत्री की ओर से की गई सर्जिकल स्ट्राइक ने राजनीतिक दलों में भी खलबली मचा दी है। सबसे अधिक मुश्किलें उनके सामने हैं जो चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। काले धन के बूते चुनाव जीतने के मंसबूों पर पानी फिरने की बेचैनी साफ दिखी। हालांकि राजनीतिक दलों के लोग खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि प्रधानमंत्री को हजार व पांच सौ के नोट की बंद करने से पहले हफ्ते-दस दिन का समय जरूर देना चाहिए था।
----------
बाइक खरीदने पहुंचे किसान को लौटाया
पांच सौ और हजार रुपये के नोट अचानक बंद होने से नगर की कृषि उत्पादन मंडी और नौनिहालगंज में सन्नाटा छाया रहा। ग्रामीण क्षेत्र के सैकड़ों किसान बड़े नोट को बदलने नगर आए लेकिन बैंकों की बंदी देखकर बैरंग वापस हो गए।
नगर के संडीला रोड स्थित कृषि उत्पादन मंडी में ग्राम कलवारी निवासी ललित सिंह व चक हनुमान निवासी नीरज त्रिपाठी सहित एक दर्जन काश्तकार ट्रैक्टर से गेहूं लेकर बिक्री के लिए मंडी यार्ड आए थे लेकिन व्यापारियों ने पहले ही आगाह कर दिया कि उन्हें पांच सौ या हजार के नोट ही लेने पड़ेंगे लेकिन काश्तकारों ने बडे़ नोट लेने से इंकार कर दिया और अपनी कृषि उपज लेकर घर वापस लौट गए। ग्राम माढ़ापुर निवासी साहेबलाल की बेटी का तिलक 16 नवंबर को होना है। इसके लिए बुधवार को वह बाइक खरीदने आया था। लेकिन बाइक एजेंसी मालिकों ने बड़े नोट लेने से मना कर दिया। बड़े नोट बंद होने का भारी असर यहां की मार्केट में दिखाई दिया। कपड़ा, इलेक्ट्रानिक, किराना व बर्तन दुकानदारों की बोहनी तक नहीं हुई। वहीं बाजार में छोटे नोटों का अकाल दिखा। सैकड़ों नागरिक और ग्रामीण फ ुटकर रुपयों के अभाव में सब्जी सहित रोजमर्रा की जरूरत का सामान नहीं खरीद सके।