{"_id":"618ab2fd58fa032343191b87","slug":"high-court-unnao-news-knp6629942122","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट ने पूछा, पुलिस आवास के लिए राशि क्यों नहीं दी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट ने पूछा, पुलिस आवास के लिए राशि क्यों नहीं दी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गंजमुरादाबाद। नवसृजित थाना बेहटामुजावर में पुलिस आवास के लिए अभी तक कोई धनराशि स्वीकृत न किए जाने पर मंगलवार को उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार को दो सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। उच्च न्यायालय ने पूछा है कि आखिर अब तक पुलिस आवास की धनराशि क्यों नहीं स्वीकृत की गई है।
बांगरमऊ तहसील क्षेत्र के ग्राम इस्माइलपुर आंबापारा निवासी उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ के वरिष्ठ अधिवक्ता व यश भारती से सम्मानित फारूक अहमद ने बांगरमऊ थाने को विभाजित कर बेहटा मुजावर को नया थाना बनाने के संबंध में 2014 में एक जनहित याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय द्वारा पारित 11 नवंबर 2019 के आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 नवंबर 2019 को बांगरमऊ थाने को विभाजित कर बेहटा मुजावर को नया थाना घोषित किया था। 45 पुलिसकर्मियों की तैनाती 15 नवंबर 2019 को कर दी थी। उस समय थाने की बिल्डिंग नहीं थी। सिर्फ दो पुराने कमरों में संचालित पुलिस चौकी के स्थान पर थाना बेहटा मुजावर स्थापित कर दिया गया था। को संचालित कर दिया गया। सात जनवरी 2020 को फारूक अहमद ने थाने की बिल्डिंग व पुलिस आवास बनाने के लिए उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की।
हाईकोर्ट के 17 व 20 जनवरी 2020 को दिए आदेश के बाद प्रदेश सरकार ने 29 जनवरी 2020 को थाने की बिल्डिंग के लिए 6.04 करोड़ रुपये स्वीकृत किए लेकिन पुलिसकर्मियों के आवास को कोई धनराशि स्वीकृत नहीं की गई। जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मंगलवार को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राजेश बिंदल व न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह ने आवास के लिए अब तक धनराशि स्वीकृत न करने पर प्रदेश सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। पूछा है कि उत्तर प्रदेश सरकार बताए कि अब तक पुलिस आवास की धनराशि स्वीकृत क्यों नहीं की गई। अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
बांगरमऊ तहसील क्षेत्र के ग्राम इस्माइलपुर आंबापारा निवासी उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ के वरिष्ठ अधिवक्ता व यश भारती से सम्मानित फारूक अहमद ने बांगरमऊ थाने को विभाजित कर बेहटा मुजावर को नया थाना बनाने के संबंध में 2014 में एक जनहित याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय द्वारा पारित 11 नवंबर 2019 के आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 नवंबर 2019 को बांगरमऊ थाने को विभाजित कर बेहटा मुजावर को नया थाना घोषित किया था। 45 पुलिसकर्मियों की तैनाती 15 नवंबर 2019 को कर दी थी। उस समय थाने की बिल्डिंग नहीं थी। सिर्फ दो पुराने कमरों में संचालित पुलिस चौकी के स्थान पर थाना बेहटा मुजावर स्थापित कर दिया गया था। को संचालित कर दिया गया। सात जनवरी 2020 को फारूक अहमद ने थाने की बिल्डिंग व पुलिस आवास बनाने के लिए उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की।
विज्ञापन
हाईकोर्ट के 17 व 20 जनवरी 2020 को दिए आदेश के बाद प्रदेश सरकार ने 29 जनवरी 2020 को थाने की बिल्डिंग के लिए 6.04 करोड़ रुपये स्वीकृत किए लेकिन पुलिसकर्मियों के आवास को कोई धनराशि स्वीकृत नहीं की गई। जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मंगलवार को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राजेश बिंदल व न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह ने आवास के लिए अब तक धनराशि स्वीकृत न करने पर प्रदेश सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। पूछा है कि उत्तर प्रदेश सरकार बताए कि अब तक पुलिस आवास की धनराशि स्वीकृत क्यों नहीं की गई। अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी।
विज्ञापन