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आदर्श नर्सिंग होम का लाइसेंस निलंबित
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उन्नाव। सिकंदरपुर सरोसी में संचालित आदर्श नर्सिंग होम में सीडीओ के निरीक्षण के दौरान मिली अनियमितताओं के बाद सीएमओ ने लाइसेंस निलंबित कर दिया है।
सीडीओ दिव्यांशु पटेल को मंगलवार को सिकंदरपुर सरोसी में निरीक्षण के दौरान आदर्श नर्सिंग होम में अनियमितताएं मिली थीं। अस्पताल संचालक से डिग्री और नर्सिंगहोम के दस्तावेज मांगे थे। संचालक डिग्री नहीं दिखा पाया था। पंजीकरण के दस्तावेज भी सही नहीं मिले थे। इस पर नर्सिंगहोम को सील कर दिया गया था। सीडीओ की रिपोर्ट देर शाम सीएमओ कार्यालय पहुंचने के बाद सीएमओ ने लाइसेंस निलंबित कर दिया है। सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि निजी अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर उसे सील कर दिया गया है।
शहर के लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रहे निजी अस्पतालों में जमकर खेल हो रहा है। नर्सिंगहोम में कुछ न होने से बाद भी सीएमओ कार्यालय से लाइसेंस जारी किया जा रहा है। अधिकारी के निरीक्षण में कमियां मिलने पर स्वास्थ्य अधिकारी तत्काल तो कार्रवाई कर देते हैं लेकिन बाद में सांठगांठ कर फिर से संचालन होने लगता है। आदर्श नर्सिग होम में कमियां मिलना कोई पहला मामला नहीं है। हकीकत में जांच कराई जाए तो तीस फीसदी ऐसे अस्पताल हैं जिनके पास पार्याप्त संसाधनों के साथ डॉक्टरों की सूची नहीं है। ऐसे नर्सिंगहोम संचालक मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
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सीडीओ दिव्यांशु पटेल को मंगलवार को सिकंदरपुर सरोसी में निरीक्षण के दौरान आदर्श नर्सिंग होम में अनियमितताएं मिली थीं। अस्पताल संचालक से डिग्री और नर्सिंगहोम के दस्तावेज मांगे थे। संचालक डिग्री नहीं दिखा पाया था। पंजीकरण के दस्तावेज भी सही नहीं मिले थे। इस पर नर्सिंगहोम को सील कर दिया गया था। सीडीओ की रिपोर्ट देर शाम सीएमओ कार्यालय पहुंचने के बाद सीएमओ ने लाइसेंस निलंबित कर दिया है। सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि निजी अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर उसे सील कर दिया गया है।
शहर के लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रहे निजी अस्पतालों में जमकर खेल हो रहा है। नर्सिंगहोम में कुछ न होने से बाद भी सीएमओ कार्यालय से लाइसेंस जारी किया जा रहा है। अधिकारी के निरीक्षण में कमियां मिलने पर स्वास्थ्य अधिकारी तत्काल तो कार्रवाई कर देते हैं लेकिन बाद में सांठगांठ कर फिर से संचालन होने लगता है। आदर्श नर्सिग होम में कमियां मिलना कोई पहला मामला नहीं है। हकीकत में जांच कराई जाए तो तीस फीसदी ऐसे अस्पताल हैं जिनके पास पार्याप्त संसाधनों के साथ डॉक्टरों की सूची नहीं है। ऐसे नर्सिंगहोम संचालक मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
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