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पानी के बीच बालू में फंसी लाशें बनी सिरदर्द
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Fri, 16 Jan 2015 12:23 AM IST
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उन्नाव। घाट से दूर पानी में पड़ी करीब पचास लाशें जिला प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गई हैं। इन लाशों तक पहुंचने और फिर इन्हें दफनाने का तरीका उसे नहीं सूझ रहा है।
दरअसल, जिस स्थान पर लाशें पड़ीं है वहां मिट्टी गीली होने के कारण जेसीबी भी नहीं पहुंच पा रही। यही नहीं बीच पानी में बालू में फंसी लाशों को बाहर निकालना भी नहीं हो पा रहा है। बुधवार के बाद गुरुवार को भी कानपुर भैरव घाट से इस काम में माहिर लोगों की टीम बुलाई गई लेकिन वह भी इस समस्या का हल नहीं निकाल सकी। ऐसे में जिला प्रशासन की यह समस्या तभी हल हो सकती है जब गंगा में पानी छोड़ा जाए। डीएम सौम्या अग्रवाल और कार्यवाहक एसपी पवन कुमार ने मौके पर जाकर स्थिति भी देखी।
बुधवार के बाद गुरुवार को पहले घाट के पास शवों को दफनाने के बाद समतलीकरण का काम कराया गया, ताकि जेसीबी आगे बढ़ सकें। लेकिन जैसे ही जेसीबी ने आगे की ओर रफ्तार पकड़ी मिट्टी गीली होने के कारण धंसने लगी। जिसकारण चालक ने पीछे हटना ही मुनासिब समझा। फिलहाल जिला प्रशासन इन लाशों को दफनाने के लिए जोड़तोड़ लगाने में जुटा है।
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शाम को डीएम और एसपी मौके पर पहुंचे और लाशों को निकालने के लिए मंथन किया। कुछ देर अधिकारियों से बातचीत करने के बाद यह दोनों काफिले के साथ कानपुर की ओर निकल गए जहां करीब एक घंटे बाद लौटे। बताया जा रहा है कि गंगा में पानी कैसे बढ़े इस बारे में यह लोग बिठुर-परियर पुल के पास रोके गए पानी को छोड़े जाने पर कानपुर अधिकारियों के साथ विचार विमर्श करने पहुंचे थे।
दो सौ सफाई कर्मचारियों की फौज लगाई गई
उन्नाव। परियर घाट की सफाई में गुरुवार को करीब दो सौ सफाई कर्मचारियों की टीम लगा दी गई। जिसने घाट के कोने-कोने से बिखरे पड़े कपड़े, लकड़ी व अन्य सामान समेटा। इसके अलावा सुबह से ही चार जेसीबी की मदद से मिट्टी का समतलीकरण का कार्य चलता रहा। इस दौरान सदर तहसीलदार मंजूर अहमद व नायब तहसीलदार विवेक मिश्र लेखपालों की टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे।
चिता की लकड़ी से दूर की ठंड
उन्नाव। परियर घाट पर काम में जुटे अधिकारी व कर्मचारियों ने ठंड अधिक होने के कारण चिता की लकड़ी को ही जलाकर तापना शुरू कर दिया। जगह-जगह इन लकड़ियों का अलाव जलता हुआ देखा गया।
आज भी तैनात रही भारी फोर्स
उन्नाव। गुरुवार को भी परियर घाट पर दो गाड़ी पीएसी के साथ ही कई थानों की फोर्स तैनात रही। भारी फोर्स को देखकर लोग घाट तक जाने से कतराते रहे।
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दरअसल, जिस स्थान पर लाशें पड़ीं है वहां मिट्टी गीली होने के कारण जेसीबी भी नहीं पहुंच पा रही। यही नहीं बीच पानी में बालू में फंसी लाशों को बाहर निकालना भी नहीं हो पा रहा है। बुधवार के बाद गुरुवार को भी कानपुर भैरव घाट से इस काम में माहिर लोगों की टीम बुलाई गई लेकिन वह भी इस समस्या का हल नहीं निकाल सकी। ऐसे में जिला प्रशासन की यह समस्या तभी हल हो सकती है जब गंगा में पानी छोड़ा जाए। डीएम सौम्या अग्रवाल और कार्यवाहक एसपी पवन कुमार ने मौके पर जाकर स्थिति भी देखी।
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बुधवार के बाद गुरुवार को पहले घाट के पास शवों को दफनाने के बाद समतलीकरण का काम कराया गया, ताकि जेसीबी आगे बढ़ सकें। लेकिन जैसे ही जेसीबी ने आगे की ओर रफ्तार पकड़ी मिट्टी गीली होने के कारण धंसने लगी। जिसकारण चालक ने पीछे हटना ही मुनासिब समझा। फिलहाल जिला प्रशासन इन लाशों को दफनाने के लिए जोड़तोड़ लगाने में जुटा है।
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शाम को डीएम और एसपी मौके पर पहुंचे और लाशों को निकालने के लिए मंथन किया। कुछ देर अधिकारियों से बातचीत करने के बाद यह दोनों काफिले के साथ कानपुर की ओर निकल गए जहां करीब एक घंटे बाद लौटे। बताया जा रहा है कि गंगा में पानी कैसे बढ़े इस बारे में यह लोग बिठुर-परियर पुल के पास रोके गए पानी को छोड़े जाने पर कानपुर अधिकारियों के साथ विचार विमर्श करने पहुंचे थे।
दो सौ सफाई कर्मचारियों की फौज लगाई गई
उन्नाव। परियर घाट की सफाई में गुरुवार को करीब दो सौ सफाई कर्मचारियों की टीम लगा दी गई। जिसने घाट के कोने-कोने से बिखरे पड़े कपड़े, लकड़ी व अन्य सामान समेटा। इसके अलावा सुबह से ही चार जेसीबी की मदद से मिट्टी का समतलीकरण का कार्य चलता रहा। इस दौरान सदर तहसीलदार मंजूर अहमद व नायब तहसीलदार विवेक मिश्र लेखपालों की टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे।
चिता की लकड़ी से दूर की ठंड
उन्नाव। परियर घाट पर काम में जुटे अधिकारी व कर्मचारियों ने ठंड अधिक होने के कारण चिता की लकड़ी को ही जलाकर तापना शुरू कर दिया। जगह-जगह इन लकड़ियों का अलाव जलता हुआ देखा गया।
आज भी तैनात रही भारी फोर्स
उन्नाव। गुरुवार को भी परियर घाट पर दो गाड़ी पीएसी के साथ ही कई थानों की फोर्स तैनात रही। भारी फोर्स को देखकर लोग घाट तक जाने से कतराते रहे।