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बेधड़क चलाओ ई-रिक्शा, नहीं होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Updated Wed, 22 Jun 2016 12:37 AM IST
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ई-रिक्शा से लगा जाम
- फोटो : अमर उजाला
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सड़कों पर सैकड़ों की संख्या में दौड़ रहे ई-रिक्शा में से केवल18 ही एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत हैं। शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा दौड़ा रहे चालक मनमाने तरीके से सवारियां बैठाते हैं। इससे आए दिन हादसे होने के बाद भी एआरटीओ और ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही।
शहर में पीड़ी नगर से लेकर गांधी नगर तिराहा, शुक्लागंज टेंपो स्टैंड से बड़ा चौराहा, बड़ा चौराहा से लखनऊ बाईपास व सिविल लाइन पर सुबह से शाम तक सैकड़ों ई-रिक्शा दौड़ते हैं। चालक बेतरतीब तरीके से आडे़-तिरछे रिक्शा सड़क पर खड़े कर सवारियां भरने लगते हैं। बिना किसी मानक या लिखा पढ़ी के दौड़ रहे इन रिक्शों से रोज जाम लगता है। ई-रिक्शा में बैठने वाली सवारियों का किराया तक तय नहीं है। इससे चालक मनमाना किराया वसूल कर रहे हैं।
बिना लाइसेंस नहीं खरीद सकते ई -रिक्शा
ई-रिक्शा चलाना तो दूर खरीदने की ही लंबी प्रक्रिया है। सरकार ने इसे आजीविका का साधन माना है। इससे नियमानुसार चालक को ई-रिक्शा खरीदने के लिए दस दिन की ट्रेनिंग करनी होगी। इसका सर्टिफिकेट जारी होगा। तब परमानेंट लाइसेंस बनेगा। इसके बाद ई-रिक्शा खरीदा जा सकता है। टैक्स जमा होने के बाद ही इसे सड़क पर चलाया जा सकेगा।
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क्या कहती हैं एआरटीओ प्रशासन
ई-रिक्शा सरकार की अच्छी योजना है। इसे व्यापार नहीं माना गया है। यह आजीविका का साधन है। इसलिए इसमें नियम भी काफी हैं। सख्ती करने पर लोग माननीयों की शरण में चले जाते हैं। इससे कार्रवाई करने में भी दिक्कतें आती हैं। उन्होंने स्वीकार कि या कि सड़कों पर ई-रिक्शा धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। फिर भी कार्रवाई की जाएगी।
माला बाजपेई, एआरटीओ प्रशासन
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शहर में पीड़ी नगर से लेकर गांधी नगर तिराहा, शुक्लागंज टेंपो स्टैंड से बड़ा चौराहा, बड़ा चौराहा से लखनऊ बाईपास व सिविल लाइन पर सुबह से शाम तक सैकड़ों ई-रिक्शा दौड़ते हैं। चालक बेतरतीब तरीके से आडे़-तिरछे रिक्शा सड़क पर खड़े कर सवारियां भरने लगते हैं। बिना किसी मानक या लिखा पढ़ी के दौड़ रहे इन रिक्शों से रोज जाम लगता है। ई-रिक्शा में बैठने वाली सवारियों का किराया तक तय नहीं है। इससे चालक मनमाना किराया वसूल कर रहे हैं।
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बिना लाइसेंस नहीं खरीद सकते ई -रिक्शा
ई-रिक्शा चलाना तो दूर खरीदने की ही लंबी प्रक्रिया है। सरकार ने इसे आजीविका का साधन माना है। इससे नियमानुसार चालक को ई-रिक्शा खरीदने के लिए दस दिन की ट्रेनिंग करनी होगी। इसका सर्टिफिकेट जारी होगा। तब परमानेंट लाइसेंस बनेगा। इसके बाद ई-रिक्शा खरीदा जा सकता है। टैक्स जमा होने के बाद ही इसे सड़क पर चलाया जा सकेगा।
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क्या कहती हैं एआरटीओ प्रशासन
ई-रिक्शा सरकार की अच्छी योजना है। इसे व्यापार नहीं माना गया है। यह आजीविका का साधन है। इसलिए इसमें नियम भी काफी हैं। सख्ती करने पर लोग माननीयों की शरण में चले जाते हैं। इससे कार्रवाई करने में भी दिक्कतें आती हैं। उन्होंने स्वीकार कि या कि सड़कों पर ई-रिक्शा धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। फिर भी कार्रवाई की जाएगी।
माला बाजपेई, एआरटीओ प्रशासन