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कबाड़ में पड़े हैं विद्यालयों में लगे अग्निशमन यंत्र
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Thu, 09 Jul 2015 12:13 AM IST
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उन्नाव। अग्निशमन विभाग के दिशा निर्देशों को परिषदीय विद्यालयों ने किनारे कर यहां पढ़ने वाले नौनिहालों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है। कई परिषदीय विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र कबाड़ में पड़े हैं तो कहीं बेकार हो चुके हैं। इतना ही नहीं टीचरों को ट्रेनिंग न देने के कारण उन्हें इस यंत्र को चलाना तक नहीं आता।
परिषदीय विद्यालयों में एमडीएम व्यवस्था लागू होने के साथ ही जिले के सभी 2039 प्राथमिक व 803 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सुरक्षा की दृष्टि से प्रत्येक विद्यालय में दो-दो अग्निशमन यंत्र लगवाए गए थे। एक अग्निशमन यंत्र का सिलेंडर किचन में तथा दूसरा प्रधान टीचर के कक्ष में लगना था।
इसके साथ ही बालू से भरी बाल्टी भी रखी जानी हैं। लेकिन कुछ विद्यालयों को छोड़कर कहीं भी यह व्यवस्था अमली जामा नहीं पहन पा रही है। इतना ही नहीं इन अग्निशमन यंत्रों का रिन्यूवल प्रत्येक वर्ष किया जाए। इसके लिए साल में प्रत्येक विद्यालय को तीन हजार रुपये भी शासन की ओर से उपलब्ध कराए जाते हैं। जिसमें एक सिलेंडर के हिसाब से डेढ़ हजार रुपये आता है। इसमें सिलेंडर का रिन्यूवल कराने के साथ ही उसमें गैस भी भरवाई जानी है।
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यदि हकीकत पर गौर किया जाए तो विद्यालयों में मामला उल्टा ही है। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों की बात तो दूर नगर क्षेत्र में संचालित विद्यालयों में कार्यरत टीचरों को यह तक नहीं मालूम है कि अग्निशमन यंत्र रखा कहां हैं। इतना ही नहीं यदि आग लग जाती है तो उस यंत्र को कोई को भी टीचर चला नहीं सकता। विभागीय सूत्रों की माने तो अग्निशमन विभाग से लोग आकर बीईओ से मिल लेते हैं और सड़क के एक दो विद्यालयों में स्लिप चिपका कर उसमें कोरम पूरा कर लेते हैं। बाद में कागजों पर रिन्यूवल व गैस भराने का कार्य चलता रहता है।
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परिषदीय विद्यालयों में एमडीएम व्यवस्था लागू होने के साथ ही जिले के सभी 2039 प्राथमिक व 803 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सुरक्षा की दृष्टि से प्रत्येक विद्यालय में दो-दो अग्निशमन यंत्र लगवाए गए थे। एक अग्निशमन यंत्र का सिलेंडर किचन में तथा दूसरा प्रधान टीचर के कक्ष में लगना था।
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इसके साथ ही बालू से भरी बाल्टी भी रखी जानी हैं। लेकिन कुछ विद्यालयों को छोड़कर कहीं भी यह व्यवस्था अमली जामा नहीं पहन पा रही है। इतना ही नहीं इन अग्निशमन यंत्रों का रिन्यूवल प्रत्येक वर्ष किया जाए। इसके लिए साल में प्रत्येक विद्यालय को तीन हजार रुपये भी शासन की ओर से उपलब्ध कराए जाते हैं। जिसमें एक सिलेंडर के हिसाब से डेढ़ हजार रुपये आता है। इसमें सिलेंडर का रिन्यूवल कराने के साथ ही उसमें गैस भी भरवाई जानी है।
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यदि हकीकत पर गौर किया जाए तो विद्यालयों में मामला उल्टा ही है। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों की बात तो दूर नगर क्षेत्र में संचालित विद्यालयों में कार्यरत टीचरों को यह तक नहीं मालूम है कि अग्निशमन यंत्र रखा कहां हैं। इतना ही नहीं यदि आग लग जाती है तो उस यंत्र को कोई को भी टीचर चला नहीं सकता। विभागीय सूत्रों की माने तो अग्निशमन विभाग से लोग आकर बीईओ से मिल लेते हैं और सड़क के एक दो विद्यालयों में स्लिप चिपका कर उसमें कोरम पूरा कर लेते हैं। बाद में कागजों पर रिन्यूवल व गैस भराने का कार्य चलता रहता है।