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15 हेक्टेअर में बसेगा निराला नगर भाग-दो
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उन्नाव। निराला नगर फेज-दो 15 हेक्टेयर में बसेगा। यूएसडीए 11 हेक्टेअर जमीन का भुगतान करते हुए पहले ही जमीन पर मालिकाना हक पा चुका है। प्राधिकरण को अभी किसानों से तीन हेक्टेअर जमीन खरीदनी है। 1.25 हेक्टेअर जमीन के मुआवजे का ग्राम पंचायत को भुगतान करना है। डीएम के साथ 29 दिसंबर को संभावित बैठक में किसानों से जमीन खरीद का मसौदा तय होने की उम्मीद है।
आठ साल पहले प्राधिकरण की ओर से निराला नगर फेज-दो योजना की शुरुआत करते समय पीडी नगर योजना और लखनऊ-कानपुर राजमार्ग के बीच में स्थित जमीन का चयन किया था। इसमें ग्राम समाज सहित कुछ किसानों के स्वामित्व वाली 11 हेक्टेयर जमीन का भुगतान कर प्राधिकरण अधिग्रहण कर चुका है। कुछ किसानों के न्यायालय मेें चुनौती दे दी थी। इससे योजना लटक गई थी। प्राधिकरण की ओर से खरीदी जा चुकी जमीन के बीच मौजूद सवा चार हेक्टेयर जमीन खरीदे बिना योजना को विकसित करना संभव नहीं हो पा रहा है। इससे अब पंजीकरण वापस न लेने वालों को ब्याज सहित रकम वापस करना प्राधिकरण के लिए सिरदर्द बना है।
प्राधिकरण की ओर से पूर्व में अलग-अलग श्रेणी के 190 भूखंड बेचने की योजना तैयार की थी। इसमें पंजीकरण कराने वाले 50 फीसद लोग रकम वापस लेते हुए पंजीकरण निरस्त करा चुके हैं। इसलिए प्राधिकरण पंजीकृत लोगों को लॉटरी के माध्यम से भूखंड देने के साथ नये पंजीकरण भी शुरू करेगा। पंजीकृत लोगों में लॉटरी के माध्यम से निर्धारित मानक के तहत पहले से तय 190 भूखंड देने के बाद भी तीन सौ भूखंड अतिरिक्त बचेंगे। इसलिए पंजीकरण खोलते ही प्राधिकरण को मुआवजे के तौर पर किसानों सहित ग्राम पंचायत की जमीन के एवज में भुगतान की रकम से अधिक धनराशि वापस मिल जाएगी।
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प्राधिकरण के अधीक्षण अभियंता व प्रभारी सचिव आरडी वर्मा का कहना है कि प्राधिकरण का गठन ही लोगों को नो प्रॉफिट-नो लॉस पर अमल करते हुए उचित कीमत पर पूर्ण विकसित आवासीय व व्यवसायिक योजनाओं में भवन व भूखंड देना है। प्रशासनिक स्वीकृति मिलते ही जमीन कब्जे में लेकर ले आउट तैयार कराते हुए भूखंडों का निर्धारण किया जाएगा। 190 लोगों को भूखंड देने के बाद बचने वाले प्लाट बेचने के लिए नये पंजीकरण शुरू किए जाएंगे।
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आठ साल पहले प्राधिकरण की ओर से निराला नगर फेज-दो योजना की शुरुआत करते समय पीडी नगर योजना और लखनऊ-कानपुर राजमार्ग के बीच में स्थित जमीन का चयन किया था। इसमें ग्राम समाज सहित कुछ किसानों के स्वामित्व वाली 11 हेक्टेयर जमीन का भुगतान कर प्राधिकरण अधिग्रहण कर चुका है। कुछ किसानों के न्यायालय मेें चुनौती दे दी थी। इससे योजना लटक गई थी। प्राधिकरण की ओर से खरीदी जा चुकी जमीन के बीच मौजूद सवा चार हेक्टेयर जमीन खरीदे बिना योजना को विकसित करना संभव नहीं हो पा रहा है। इससे अब पंजीकरण वापस न लेने वालों को ब्याज सहित रकम वापस करना प्राधिकरण के लिए सिरदर्द बना है।
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प्राधिकरण की ओर से पूर्व में अलग-अलग श्रेणी के 190 भूखंड बेचने की योजना तैयार की थी। इसमें पंजीकरण कराने वाले 50 फीसद लोग रकम वापस लेते हुए पंजीकरण निरस्त करा चुके हैं। इसलिए प्राधिकरण पंजीकृत लोगों को लॉटरी के माध्यम से भूखंड देने के साथ नये पंजीकरण भी शुरू करेगा। पंजीकृत लोगों में लॉटरी के माध्यम से निर्धारित मानक के तहत पहले से तय 190 भूखंड देने के बाद भी तीन सौ भूखंड अतिरिक्त बचेंगे। इसलिए पंजीकरण खोलते ही प्राधिकरण को मुआवजे के तौर पर किसानों सहित ग्राम पंचायत की जमीन के एवज में भुगतान की रकम से अधिक धनराशि वापस मिल जाएगी।
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प्राधिकरण के अधीक्षण अभियंता व प्रभारी सचिव आरडी वर्मा का कहना है कि प्राधिकरण का गठन ही लोगों को नो प्रॉफिट-नो लॉस पर अमल करते हुए उचित कीमत पर पूर्ण विकसित आवासीय व व्यवसायिक योजनाओं में भवन व भूखंड देना है। प्रशासनिक स्वीकृति मिलते ही जमीन कब्जे में लेकर ले आउट तैयार कराते हुए भूखंडों का निर्धारण किया जाएगा। 190 लोगों को भूखंड देने के बाद बचने वाले प्लाट बेचने के लिए नये पंजीकरण शुरू किए जाएंगे।