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कर्जमाफी: सत्यापन में 220 किसान योजना से बाहर
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उन्नाव। प्रदेश सरकार की कर्जमाफी योजना से 220 किसान बाहर हो गए हैं। पिछले साल ऑफलाइन आवेदन के बाद सत्यापन में अपात्र पाए जाने के बाद सूची से इन किसानों का नाम हटा दिया गया है। शेष बचे सात सौ से अधिक किसान अभी भी कर्जमाफी के इंतजार में हैं। कृषि विभाग का दावा है कि शेष बचे किसानों की डिमांड जनरेट करके शासन को भेजी जा चुकी है।
भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव के दौरान सूबे में सरकार बनने पर किसानों का फसली ऋण माफ करने की घोषणा की थी। मार्च 2018 में जब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो घोषणा को अमलीजामा पहनाने की कवायद शुरू की थी। योजना में केवल 2 हेक्टेयर (8 बीघा) तक की भूमि वाले किसानों का एक लाख रुपये तक का लोन माफ किए जाने की बात कही गई थी। जुलाई 2018 से किसानों के बैंक खातों में पैसा भेजने की कवायद शुरू हुई थी। वैसे कृषि विभाग अब तक जिले से 70 हजार से अधिक किसानों का फसली ऋण माफ किए जाने का दावा कर रहा है। बीच में सरकार ने ऐसे किसानों को राहत दी जिनको किसी कारण से योजना का लाभ नहीं मिल पाया था। पिछले साल ऐसे किसानों से सरकार ने ऑफलाइन आवेदन लेने के आदेश दिए थे। इस दौरान 927 किसानों ने शिकायतें दर्ज कराईं लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी इन किसानों का लोन माफ नहीं हुआ। फिर शासन ने इन आवेदनों का दुबारा सत्यापन कराने के आदेश दिए। बैंक और तहसील की ओर से कराए गए सत्यापन में 220 किसान अपात्र पाए गए। इनमें से कई किसानों की खेती ज्यादा निकली तो कई दो बैंकों से लोन लेने के कारण योजना से बाहर हो गए। शेष बचे 707 किसानों की कर्जमाफी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जिला कृषि अधिकारी कुलदीप मिश्रा ने कहा कि 927 आवेदन ऑफलाइन आए थे। उनका सत्यापन कराने के आदेश मिले थे। इस पर बैंक से खाते और तहसील से खेती के क्षेत्रफल की जांच कराई गई। जिसमें 220 किसान योजना के बनाए मानकों पर खरे नहीं उतरे। जिस कारण उन्हें सूची से हटा दिया गया। शेष 707 पात्र किसानों की डिमांड बनाकर कर्जमाफी के लिए शासन को भेजी जा चुकी है।
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भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव के दौरान सूबे में सरकार बनने पर किसानों का फसली ऋण माफ करने की घोषणा की थी। मार्च 2018 में जब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो घोषणा को अमलीजामा पहनाने की कवायद शुरू की थी। योजना में केवल 2 हेक्टेयर (8 बीघा) तक की भूमि वाले किसानों का एक लाख रुपये तक का लोन माफ किए जाने की बात कही गई थी। जुलाई 2018 से किसानों के बैंक खातों में पैसा भेजने की कवायद शुरू हुई थी। वैसे कृषि विभाग अब तक जिले से 70 हजार से अधिक किसानों का फसली ऋण माफ किए जाने का दावा कर रहा है। बीच में सरकार ने ऐसे किसानों को राहत दी जिनको किसी कारण से योजना का लाभ नहीं मिल पाया था। पिछले साल ऐसे किसानों से सरकार ने ऑफलाइन आवेदन लेने के आदेश दिए थे। इस दौरान 927 किसानों ने शिकायतें दर्ज कराईं लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी इन किसानों का लोन माफ नहीं हुआ। फिर शासन ने इन आवेदनों का दुबारा सत्यापन कराने के आदेश दिए। बैंक और तहसील की ओर से कराए गए सत्यापन में 220 किसान अपात्र पाए गए। इनमें से कई किसानों की खेती ज्यादा निकली तो कई दो बैंकों से लोन लेने के कारण योजना से बाहर हो गए। शेष बचे 707 किसानों की कर्जमाफी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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जिला कृषि अधिकारी कुलदीप मिश्रा ने कहा कि 927 आवेदन ऑफलाइन आए थे। उनका सत्यापन कराने के आदेश मिले थे। इस पर बैंक से खाते और तहसील से खेती के क्षेत्रफल की जांच कराई गई। जिसमें 220 किसान योजना के बनाए मानकों पर खरे नहीं उतरे। जिस कारण उन्हें सूची से हटा दिया गया। शेष 707 पात्र किसानों की डिमांड बनाकर कर्जमाफी के लिए शासन को भेजी जा चुकी है।
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