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Unnao News: समितियों में पहुंचने लगी डीएपी, किसानों को राहत

Sat, 26 Oct 2024 01:17 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 26 Oct 2024 01:17 AM IST
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DAP started reaching committees, relief to farmers
उन्नाव। खाद की किल्लत झेल रहे किसानों को कृषि विभाग विभाग ने राहत दी है। डीएपी की कमी से परेशान किसानों की समस्या को अमर उजाला में प्रमुखता से उठाए जाने के बाद अधिकारियों ने समितियों में खाद भिजवानी शुरू कर दी है। खाद मिलने से किसानों के चेहरे खिल उठे।
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कृषि विभाग के डीएपी और एनपीके के 10,000 के स्टॉक के दावे के बाद भी समितियों में एक भी बोरी न होने परर अमर उजाला ने गुरुवार को खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसमें बताया था कि 158 क्रियाशील समितियों में अधिकांश में डीएपी नहीं है। जबकि इस समय गेहूं, आलू व सरसों की बुआई के लिए किसान डीएपी मांग रहे हैं। समितियों में ताला लटका होने से किसान मायूस होकर लौटने को मजबूर हो रहे है।
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खबर प्रकाशित होने के बाद खलबली मच गई। आनन-फानन कृषि अधिकारी ने साधन सहकारी समितियों से जानकारी लेकर खाद उपलब्ध करानी शुरू कर दी। किसानों की मांग के अनुसार कहीं पर 300 तो कहीं पर 500 बोरियां डीएपी की भिजवाईं। खाद पहुंचने की सूचना पर किसान भी पहुंच गए। जिसके बाद किसानों को डीएपी का वितरण शुरू करा दिया गया।
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जिला कृषि अधिकारी शशांक कुमार ने बताया कि जनपद में 10,000 स्टॉक के सापेक्ष 5000 से अधिक बोरियों का वितरण कराया जा चुका है। जहां पर कमी होने की जानकारी मिल रही है, वहां पर तुरंत डीएपी उपलब्ध कराई जा रही है। बताया कि डीएपी की कमी नहीं है। जिले में पर्याप्त स्टॉक है।



किसानों से वैकल्पिक उर्वरकों का प्रयोग करने की अपील
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि भारत सरकार ने 2023-24 से 2024-25 तक के लिए पीएम प्रणाम योजना शुरू की है। योजना के तहत रसायनिक खाद डीएपी, यूरिया, एनपीके व एमओपी के स्थान पर वैकल्पिक उर्वरकों नैनो तरल यूरिया, तरल यूरिया, सल्फर कोटेड यूरिया व सिंगल सुपर फास्फेट को बढ़ावा देने और संतुलित मात्रा में प्रयोग करने के लिए किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।

बताया कि रसायनिक उर्वरकों का असंतुलित मात्रा में प्रयोग किए जाने से मृदा स्वास्थ्य, कृषि पैदावार एवं पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि मृदा परीक्षण के आधार पर वैज्ञानिक संस्तुतियों के अनुसार ही फसलों में संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें। यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी के स्थान पर नैनो तरल यूरिया, डीएपी, सल्फर कोटेड यूरिया व एसएसपी के अलावा हरी, जैविक खाद व वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करते हुए प्राकृतिक खेती करें। इससे खेती की लागत में कमी आएगी और मृदा व पर्यावरण भी शुद्ध होगा।
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