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भक्तों ने किया मां कात्यायनी का पूजन
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नवाबगंज स्थित दुर्गा माता मंदिर में भक्तों द्वारा लाया प्रसाद चढ़ाते पुजारी।
- फोटो : UNNAO
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उन्नाव। नवरात्र के छठवें दिन देवी भक्तों ने मंदिरों में पहुंच कर माता के कात्यायनी स्वरूप की पूजा-अर्चना की। मंदिरों में भक्तों की संख्या बढ़ने के साथ मंदिर समिति के पदाधिकारियों व तैनात पुलिस कर्मियों को अब बिना मास्क पहुंचने वाले श्रद्धालुओं से गाइड का पालन कराने की जद्दोजहद करनी पड़ रही है। मंदिर के गेट तक पहुंचने के बाद टोकने पर कोई जेब और पर्स से निकालकर मास्क पहन लेता है।
शासन के निर्देशों पर प्रशासन की ओर से नवरात्र पर प्रमुख देवी मंदिरों में पहुंचने वालों के शरीर का तापमान चेक करने सहित मास्क लगवाए जाने को जरूरी बताया गया था। प्रशासन ने मंदिरों में पुलिस बल तो तैनात करा दिया, लेकिन अधिकांश मंदिर समितियों की ओर से थर्मल स्कैनिंग की कोई व्यवस्था नहीं की गई। यह बात दूसरी है कि अधिकांश श्रद्धालु मास्क लगाने के बाद ही मंदिर पहुंच रहे हैं।
अब नवरात्र समापन की ओर है। अब तक केवल घरों में ही पूजन करते रहे श्रद्धालु भी मंदिर पहुंच रहे हैं। इसलिए दिन बीतने के साथ मंदिरों में दर्शन-पूजन करने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। कुछ भीड़ में कुछ लोग बिना मुंह ढके मंदिर परिसर तक पहुंच जाते हैं। इन्हें टोकने पर अधिकांश पास में पहले से उपलब्ध मास्क निकाल कर लगा लेते हैं, लेकिन कुछ को वैकल्पिक व्यवस्था करने पर मजबूर होना पड़ता है। पुलिस कर्मियों का कहना है कि वह अपनी तरफ से बिना मास्क किसी को प्रवेश नहीं करने देते हैं। इसमें मंदिर समितियों का सहयोग भी प्राप्त हो रहा है।
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शहर के वयोवृद्ध आचार्य करुणा शंकर तिवारी के मुताबिक गुरुवार को माता कत्यायनी स्वरूप का पूजन किया जाता है और षष्ठी तिथि सरस्वती को भी समर्पित मानी जाती है। कत्यायन ऋषि ने तप करते हुए देवी पुत्री रूप में जन्म लेने का वरदान मांगा था। इसलिए देवी ने अजन्मा स्वरूप त्याग कर न सिर्फ पुत्री के रूप में जन्म लिया, बल्कि पति के बजाए हमेशा पिता के गोत्र को ही अपनाए रखा। इसीलिए देवी को कात्यायनी के तौर पर जाना जाता है।
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शासन के निर्देशों पर प्रशासन की ओर से नवरात्र पर प्रमुख देवी मंदिरों में पहुंचने वालों के शरीर का तापमान चेक करने सहित मास्क लगवाए जाने को जरूरी बताया गया था। प्रशासन ने मंदिरों में पुलिस बल तो तैनात करा दिया, लेकिन अधिकांश मंदिर समितियों की ओर से थर्मल स्कैनिंग की कोई व्यवस्था नहीं की गई। यह बात दूसरी है कि अधिकांश श्रद्धालु मास्क लगाने के बाद ही मंदिर पहुंच रहे हैं।
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अब नवरात्र समापन की ओर है। अब तक केवल घरों में ही पूजन करते रहे श्रद्धालु भी मंदिर पहुंच रहे हैं। इसलिए दिन बीतने के साथ मंदिरों में दर्शन-पूजन करने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। कुछ भीड़ में कुछ लोग बिना मुंह ढके मंदिर परिसर तक पहुंच जाते हैं। इन्हें टोकने पर अधिकांश पास में पहले से उपलब्ध मास्क निकाल कर लगा लेते हैं, लेकिन कुछ को वैकल्पिक व्यवस्था करने पर मजबूर होना पड़ता है। पुलिस कर्मियों का कहना है कि वह अपनी तरफ से बिना मास्क किसी को प्रवेश नहीं करने देते हैं। इसमें मंदिर समितियों का सहयोग भी प्राप्त हो रहा है।
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शहर के वयोवृद्ध आचार्य करुणा शंकर तिवारी के मुताबिक गुरुवार को माता कत्यायनी स्वरूप का पूजन किया जाता है और षष्ठी तिथि सरस्वती को भी समर्पित मानी जाती है। कत्यायन ऋषि ने तप करते हुए देवी पुत्री रूप में जन्म लेने का वरदान मांगा था। इसलिए देवी ने अजन्मा स्वरूप त्याग कर न सिर्फ पुत्री के रूप में जन्म लिया, बल्कि पति के बजाए हमेशा पिता के गोत्र को ही अपनाए रखा। इसीलिए देवी को कात्यायनी के तौर पर जाना जाता है।