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हर तरफ बाघ की दहशत, ग्रामीण बोले, सुनी दहाड़
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बाघ के पंजे के निशान देखते मुख्य मंडल वन संरक्षक आरके सिंह व डीएफओ। संवाद
- फोटो : UNNAO
औरास/उन्नाव। हमले में एक किसान की मौत और दूसरे के घायल होने पर हर तरफ बाघ की दहशत है। किसान फसलों की रखवाली और सिंचाई करने खेतों पर नहीं जा रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि रात में उन्होंने बाघ की दहाड़ सुनी थी। वन विभाग ने लोगों से घर पर ही रहने की अपील की है।
रामपुर गढ़ौवा गांव निवासी विजय, प्रकाश, राजीव, नफीस ने बताया कि रात डेढ़ बजे खेतों की तरफ से कई बार बाघ की दहाड़ सुनाई दी। खेत में फसलों की रखवाली, सिंचाई या निराई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। ग्रामीण बोले जब तक बाघ पकड़ा नहीं जाता तब तक दहशत रहेगी। औसार के रामपुर गढ़ौवा गांव, आसपास के जवन, करौंदी, कैथनखेड़ा, मीठेपुर, लोधई, सगौड़ा के अलावा मलिहाबाद ब्लाक के दर्जनों गांवों में दहशत है। बाघ की दहशत से ग्रामीणों ने अपने बच्चों को अंखों से ओझल नहीं होने दिया। परिजन बच्चों को घर के अंदर या बाहर अपनी निगरानी में बैठाए रहे। वन विभाग के एसडीओ व अन्य अधिकारियों ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। कहा है कि रात के समय खेतों की तरफ न जाएं। दिन में समूह में खेतों पर जाएं और लाठी-डंडे साथ रखें। बच्चों को अकेला न छोड़ें। दहाड़ या आहट मिलने पर तत्काल वन विभाग की टीम को अवगत कराएं। हसनगंज रेंजर देवदत्त ने बताया कि पहले सीतापुर के मिश्रिख में बाघ के पंजे के निशान देखे गए थे। इसके बाद हरदोई में भी बाघ के पहुंचने की पुष्टि हुई। अनुमान है कि यह वही बाघ जो औरास आ गया है।
बाघ के हमले में मरे कमलेश के शव का शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराया गया। शाम को शव गांव लाया गया। पांच भाइयों में सबसे बड़े बेटे की मौत से मां शांति, पिता बाबूलाल, छोटे भाई छोटू, रंगी, उमेश और मटरू सहित परिवार के सदस्यों का बुरा हाल रहा। मोहान विधायक ब्रजेश रावत देर शाम गांव पहुंचे और मृतक के परिजनों को ढाढ़स बंधाने के साथ ही शासन से अधिक से अधिक आर्थिक मदद दिलाने का आश्वासन दिया। मुख्य वन संरक्षक लखनऊ मंडल आरके सिंह ने भी मृतक व घायल किसान के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने अपने पास से पांच हजार रुपये की आर्थिक मदद भी दी।
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रामपुर गढ़ौवा गांव निवासी विजय, प्रकाश, राजीव, नफीस ने बताया कि रात डेढ़ बजे खेतों की तरफ से कई बार बाघ की दहाड़ सुनाई दी। खेत में फसलों की रखवाली, सिंचाई या निराई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। ग्रामीण बोले जब तक बाघ पकड़ा नहीं जाता तब तक दहशत रहेगी। औसार के रामपुर गढ़ौवा गांव, आसपास के जवन, करौंदी, कैथनखेड़ा, मीठेपुर, लोधई, सगौड़ा के अलावा मलिहाबाद ब्लाक के दर्जनों गांवों में दहशत है। बाघ की दहशत से ग्रामीणों ने अपने बच्चों को अंखों से ओझल नहीं होने दिया। परिजन बच्चों को घर के अंदर या बाहर अपनी निगरानी में बैठाए रहे। वन विभाग के एसडीओ व अन्य अधिकारियों ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। कहा है कि रात के समय खेतों की तरफ न जाएं। दिन में समूह में खेतों पर जाएं और लाठी-डंडे साथ रखें। बच्चों को अकेला न छोड़ें। दहाड़ या आहट मिलने पर तत्काल वन विभाग की टीम को अवगत कराएं। हसनगंज रेंजर देवदत्त ने बताया कि पहले सीतापुर के मिश्रिख में बाघ के पंजे के निशान देखे गए थे। इसके बाद हरदोई में भी बाघ के पहुंचने की पुष्टि हुई। अनुमान है कि यह वही बाघ जो औरास आ गया है।
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बाघ के हमले में मरे कमलेश के शव का शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराया गया। शाम को शव गांव लाया गया। पांच भाइयों में सबसे बड़े बेटे की मौत से मां शांति, पिता बाबूलाल, छोटे भाई छोटू, रंगी, उमेश और मटरू सहित परिवार के सदस्यों का बुरा हाल रहा। मोहान विधायक ब्रजेश रावत देर शाम गांव पहुंचे और मृतक के परिजनों को ढाढ़स बंधाने के साथ ही शासन से अधिक से अधिक आर्थिक मदद दिलाने का आश्वासन दिया। मुख्य वन संरक्षक लखनऊ मंडल आरके सिंह ने भी मृतक व घायल किसान के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने अपने पास से पांच हजार रुपये की आर्थिक मदद भी दी।
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