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हत्या में सिपाही की जमातन अर्जी खारिज
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उन्नाव। कोतवाली में मारपीट से सब्जी विक्रेता की मौत के मामले में हत्या में जेल में बंद सिपाही की जमानत अर्जी बुधवार को खारिज कर दी गई।
बांगरमऊ के भटपुरी निवासी मोहम्मद फैसल (18) पुत्र इस्लाम हुसैन सब्जी बेचने का काम करता था। कोरोना कर्फ्यू के दौरान 21 मई को वह सब्जीमंडी के पास स्थित अपने घर के बाहर ठेले पर सब्जी बेच रहा था। मौके पर पहुंचे सिपाही विजय चौधरी ने एक होमगार्ड की मदद से उसे पीटा और कोतवाली लेकर चला गया था। कोतवाली में हालत बिगड़ने पर सीएचसी ले जाया गया था। वहां उसकी मौत हो गई थी। परिजनों ने सिपाही विजय चौधरी समेत तीन पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विजय व होमगार्ड को कोर्ट ने जेल भेज दिया था। पोस्टमार्टम में 14 चोटें मिलने की पुष्टि हुई थी। सिपाही विजय के परिजनों ने उसकी जमानत की अर्जी डाली थी।
एडीजे 5 विशेष सत्र न्यायाधीश गैंगस्टर संदीप गुप्ता ने सुनवाई की। अभियोजक हरीश अवस्थी ने प्रकरण के सभी बिंदुओं को सामने रखकर इसे अमानवीय कृत्य बताया। कहा कि आरोपी सिपाही को जमानत दी गई तो वह साक्ष्य प्रभावित कर मुकदमे को कमजोर करेगा। इससे गरीब परिवार न्याय से वंचित हो जाएगा। आरोपी सिपाही व बचाव पक्ष के वकील ने जमानत स्वीकार करने की बात की। दोनों पक्ष सुनने के बाद न्यायालय ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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बांगरमऊ के भटपुरी निवासी मोहम्मद फैसल (18) पुत्र इस्लाम हुसैन सब्जी बेचने का काम करता था। कोरोना कर्फ्यू के दौरान 21 मई को वह सब्जीमंडी के पास स्थित अपने घर के बाहर ठेले पर सब्जी बेच रहा था। मौके पर पहुंचे सिपाही विजय चौधरी ने एक होमगार्ड की मदद से उसे पीटा और कोतवाली लेकर चला गया था। कोतवाली में हालत बिगड़ने पर सीएचसी ले जाया गया था। वहां उसकी मौत हो गई थी। परिजनों ने सिपाही विजय चौधरी समेत तीन पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विजय व होमगार्ड को कोर्ट ने जेल भेज दिया था। पोस्टमार्टम में 14 चोटें मिलने की पुष्टि हुई थी। सिपाही विजय के परिजनों ने उसकी जमानत की अर्जी डाली थी।
एडीजे 5 विशेष सत्र न्यायाधीश गैंगस्टर संदीप गुप्ता ने सुनवाई की। अभियोजक हरीश अवस्थी ने प्रकरण के सभी बिंदुओं को सामने रखकर इसे अमानवीय कृत्य बताया। कहा कि आरोपी सिपाही को जमानत दी गई तो वह साक्ष्य प्रभावित कर मुकदमे को कमजोर करेगा। इससे गरीब परिवार न्याय से वंचित हो जाएगा। आरोपी सिपाही व बचाव पक्ष के वकील ने जमानत स्वीकार करने की बात की। दोनों पक्ष सुनने के बाद न्यायालय ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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