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कड़ाके की ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Sun, 11 Jan 2015 12:23 AM IST
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उन्नाव/शुक्लागंज। पारा लुढ़कने के कारण शनिवार को भी ठंड से लोग बेहाल रहे। मजदूरी कर पेट पालने वाले लोगों के रोजी रोटी के लाले पड़ गए हैं।
शीत लहर चलने से लोग घरों से नहीं निकले। बर्फीली हवाओं के कारण बढ़ी गलन से लोगों के हाड़ तक कांप गए। अधिकतम तापमान जहां 10.2 डिग्र्री रहा वहीं न्यूनतम तापमान 4.2 डिग्र्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
दोपहर 3 बजे के बाद कुछ समय के लिए धूप निकली लेकिन यह कारगर साबित नहीं हुई। कुछ समय बाद फिर सूर्यदेव बादलों में छिप गए। शाम ढलते ही ठंड का कहर और विकराल हो गया। दिनभर कोहरे की धुंध छाई रही। शुक्रवार देररात जबरदस्त कोहरे से दृश्यता शून्य हो गई।
दिन में भी वाहन सवारों को गाड़ियों की लाइट जलाकर चलना पड़ा। ट्रेनों की लाइटें दिन में जलती दिखीं। बाजार, अस्पताल, स्टेशन व प्रमुख चौराहों पर सन्नाटा सा दिखा। सड़क पर चलने वाले राहगीर अलाव का ही आसरा ढूंढते रहे। जहां भी आग जलते दिखी वहां पर पहुंचकर ठंड दूर करने की कोशिश की।
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3.5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली पश्चिमी हवाओं से गलन बढ़ गई। दुकानदारों ने भी शाम ढलते ही दुकानें बंद कर दीं। गलन के चलते लोगों की उंगलियों ने भी काम करना बंद सा कर दिया। दिन में भी लोग खुद को पूरी तरह से गर्म कपड़ों से ढंककर ही बाहर निकले। घरों में भी पूरे दिन ब्लोअर चलते रहे।
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शीत लहर चलने से लोग घरों से नहीं निकले। बर्फीली हवाओं के कारण बढ़ी गलन से लोगों के हाड़ तक कांप गए। अधिकतम तापमान जहां 10.2 डिग्र्री रहा वहीं न्यूनतम तापमान 4.2 डिग्र्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
दोपहर 3 बजे के बाद कुछ समय के लिए धूप निकली लेकिन यह कारगर साबित नहीं हुई। कुछ समय बाद फिर सूर्यदेव बादलों में छिप गए। शाम ढलते ही ठंड का कहर और विकराल हो गया। दिनभर कोहरे की धुंध छाई रही। शुक्रवार देररात जबरदस्त कोहरे से दृश्यता शून्य हो गई।
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दिन में भी वाहन सवारों को गाड़ियों की लाइट जलाकर चलना पड़ा। ट्रेनों की लाइटें दिन में जलती दिखीं। बाजार, अस्पताल, स्टेशन व प्रमुख चौराहों पर सन्नाटा सा दिखा। सड़क पर चलने वाले राहगीर अलाव का ही आसरा ढूंढते रहे। जहां भी आग जलते दिखी वहां पर पहुंचकर ठंड दूर करने की कोशिश की।
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3.5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली पश्चिमी हवाओं से गलन बढ़ गई। दुकानदारों ने भी शाम ढलते ही दुकानें बंद कर दीं। गलन के चलते लोगों की उंगलियों ने भी काम करना बंद सा कर दिया। दिन में भी लोग खुद को पूरी तरह से गर्म कपड़ों से ढंककर ही बाहर निकले। घरों में भी पूरे दिन ब्लोअर चलते रहे।