{"_id":"6128cf758ebc3ea75c652696","slug":"civic-unnao-news-knp648447564","type":"story","status":"publish","title_hn":"जमीन का सर्किल रेट तय करने के लिए नापजोख शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जमीन का सर्किल रेट तय करने के लिए नापजोख शुरू
विज्ञापन
ओरहर गांव में गंगा एक्सप्रेसवे के दायरे में आ रही भूमि की नापजोख करते राजस्व कर्मी। संवाद
- फोटो : UNNAO
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिछिया। ओरहर गांव में गंगा एक्सप्रेसवे के दायरे में आ रही भूमि के अधिग्रहण की कीमत निर्धारित सर्किल रेट से कम दिए जाने से परेशान किसानों की शिकायत दूर करने की कवायद शुरू हो गई है। शुक्रवार को लेखपाल ने गांव पहुंच किसानों को बुलाकर उनकी भूमि की नापजोख कर्राई।
ओरहर गांव में 350 किसानों की 46 हेक्टेयर भूमि गंगा एक्सप्रेसवे के दायरे में आ रही है। इसमें ओरहर सहित मजरे दरोगाखेड़ा, खंभारखेड़ा व जाफरखेड़ा के किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया था। किसानों ने अपनी भूमि के कागजात राजस्व विभाग को दिए थे। किसानों के मुताबिक यूपीडा द्वारा भूमि अधिग्रहण का मुआवजा निर्धारित सर्किल रेट से कम दिया जा रहा है। इस कारण किसानों ने अब बैनामा कराने से इंकार कर दिया है। 23 अगस्त को गांव पहुंचे डीएम रवींद्र कुमार से किसानों ने इस संबंध में शिकायत की थी। बताया था कि सड़क व लिंक मार्ग से सटी भूमि के मुआवजे का लाभ कुछ ही किसानों को मिल पा रहा है। सड़क से निर्धारित मानक तीन सौ मीटर को दरकिनार कर मुआवजा दिया जा रहा है। सहमतिपत्र के दौरान राजस्व विभाग ने सर्किल रेट का पूरा मुआवजा देने की बात कही थी। अमर उजाला में 25 अगस्त को खबर प्रकाशित होने के बाद प्रभारी भूमि अध्याप्ति अधिकारी चंदन पटेल ने इसका संज्ञान लिया था और एसडीएम को जांच सौंपी थी।
शुक्रवार को एसडीएम सत्यप्रिय सिंह के आदेश पर लेखपाल विनोद कुमार गांव पहुंचे। उन्होंने दरोगाखेड़ा के किसानों को बुलाकर पुरवा रोड से गंगा एक्सप्रेसवे के दायरे में आ रही भूमि संख्या 229, 232, 241, 265, 264 व अन्य गाटे की नापजोख कराई। प्रभारी भूमि अध्याप्ति अधिकारी ने बताया कि एसडीएम की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ओरहर गांव में 350 किसानों की 46 हेक्टेयर भूमि गंगा एक्सप्रेसवे के दायरे में आ रही है। इसमें ओरहर सहित मजरे दरोगाखेड़ा, खंभारखेड़ा व जाफरखेड़ा के किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया था। किसानों ने अपनी भूमि के कागजात राजस्व विभाग को दिए थे। किसानों के मुताबिक यूपीडा द्वारा भूमि अधिग्रहण का मुआवजा निर्धारित सर्किल रेट से कम दिया जा रहा है। इस कारण किसानों ने अब बैनामा कराने से इंकार कर दिया है। 23 अगस्त को गांव पहुंचे डीएम रवींद्र कुमार से किसानों ने इस संबंध में शिकायत की थी। बताया था कि सड़क व लिंक मार्ग से सटी भूमि के मुआवजे का लाभ कुछ ही किसानों को मिल पा रहा है। सड़क से निर्धारित मानक तीन सौ मीटर को दरकिनार कर मुआवजा दिया जा रहा है। सहमतिपत्र के दौरान राजस्व विभाग ने सर्किल रेट का पूरा मुआवजा देने की बात कही थी। अमर उजाला में 25 अगस्त को खबर प्रकाशित होने के बाद प्रभारी भूमि अध्याप्ति अधिकारी चंदन पटेल ने इसका संज्ञान लिया था और एसडीएम को जांच सौंपी थी।
विज्ञापन
शुक्रवार को एसडीएम सत्यप्रिय सिंह के आदेश पर लेखपाल विनोद कुमार गांव पहुंचे। उन्होंने दरोगाखेड़ा के किसानों को बुलाकर पुरवा रोड से गंगा एक्सप्रेसवे के दायरे में आ रही भूमि संख्या 229, 232, 241, 265, 264 व अन्य गाटे की नापजोख कराई। प्रभारी भूमि अध्याप्ति अधिकारी ने बताया कि एसडीएम की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
विज्ञापन