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गंगा एक्सप्रेसवे के लिए भूमि देने से इनकार
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बिछिया। ओरहर गांव के ज्यादातर किसानों ने गंगा एक्सप्रेसवे के दायरे में आने वाली अपनी जमीन देने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि भूमि के अधिग्रहण की कीमत निर्धारित सर्किल रेट से कम दिए जा रहे हैं।
ओरहर गांव में 350 किसानों की 46 हेक्टेयर भूमि गंगा एक्सप्रेसवे के दायरे में आ रही है। इसमें ओरहर सहित मजरे दरोगाखेड़ा, खंभारखेड़ा व जाफरखेड़ा के किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया था। किसानों ने अपनी भूमि के कागजात राजस्व विभाग को दिए थे। किसानों के मुताबिक यूपीडा द्वारा भूमि अधिग्रहण का मुआवजा निर्धारित सर्किल रेट से कम दिया जा रहा है। इस कारण अब बैनामा कराने से इंकार कर दिया है। सोमवार को गांव पहुंचे डीएम रवींद्र कुमार से किसानों ने इस संबंध में शिकायत की थी। बताया था कि सड़क व लिंक मार्ग से सटी भूमि के मुआवजे का लाभ कुछ ही किसानों को मिल पा रहा है। सड़क से निर्धारित मानक तीन सौ मीटर को दरकिनार कर मुआवजा दिया जा रहा है। सहमतिपत्र के दौरान राजस्व विभाग ने सर्किल रेट का पूरा मुआवजा देने की बात कही थी।
प्रभारी भूमि अध्याप्ति अधिकारी चंदन पटेल ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। किसान इस मामले में मिलकर जानकारी दें तो जांच कराएंगे। शिकायत सही मिलेगी तो उन्हें उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। उधर, पीईटी परीक्षा में अधिकारियों की ड्यूटी लग जाने से मंगलवार को गांव में कैंप नहीं लग सका। इस कारण किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो सका।
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ओरहर गांव में 350 किसानों की 46 हेक्टेयर भूमि गंगा एक्सप्रेसवे के दायरे में आ रही है। इसमें ओरहर सहित मजरे दरोगाखेड़ा, खंभारखेड़ा व जाफरखेड़ा के किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया था। किसानों ने अपनी भूमि के कागजात राजस्व विभाग को दिए थे। किसानों के मुताबिक यूपीडा द्वारा भूमि अधिग्रहण का मुआवजा निर्धारित सर्किल रेट से कम दिया जा रहा है। इस कारण अब बैनामा कराने से इंकार कर दिया है। सोमवार को गांव पहुंचे डीएम रवींद्र कुमार से किसानों ने इस संबंध में शिकायत की थी। बताया था कि सड़क व लिंक मार्ग से सटी भूमि के मुआवजे का लाभ कुछ ही किसानों को मिल पा रहा है। सड़क से निर्धारित मानक तीन सौ मीटर को दरकिनार कर मुआवजा दिया जा रहा है। सहमतिपत्र के दौरान राजस्व विभाग ने सर्किल रेट का पूरा मुआवजा देने की बात कही थी।
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प्रभारी भूमि अध्याप्ति अधिकारी चंदन पटेल ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। किसान इस मामले में मिलकर जानकारी दें तो जांच कराएंगे। शिकायत सही मिलेगी तो उन्हें उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। उधर, पीईटी परीक्षा में अधिकारियों की ड्यूटी लग जाने से मंगलवार को गांव में कैंप नहीं लग सका। इस कारण किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो सका।
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